अर्धसूत्री विभाजन से पहले: G₁ प्रावस्था: कोशिका बढ़ रही है। हर गुणसूत्र में एक ही ढीला क्रोमैटिड है। इस कोशिका में 2n = 4 है: समजात गुणसूत्रों के दो जोड़े।
समजात जोड़ा 1समजात जोड़ा 2तर्कु तंतुएक ही रंग का गहरा और हल्का भाग एक समजात जोड़ा है; एक धागे पर मिला हुआ रंग क्रॉसिंग ओवर से मिला खंड हैनियंत्रण
किसी भी अवस्था पर जाएँ
दाईं ओर देखें उसी कोशिका से समसूत्री विभाजन क्या देता
मापन
- वर्तमान अवस्था
- अर्धसूत्री विभाजन से पहले: G₁ प्रावस्था
- गुणसूत्र संख्या
- 2n = 4
- क्रोमैटिड (इस कोशिका में)
- 4
- कुल कोशिकाएँ
- 1
- प्रगति
- 0%
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- अंतरावस्था से चलाना शुरू करें: कोशिका बढ़ती है, और S प्रावस्था में हर गुणसूत्र पर दूसरा क्रोमैटिड बनता है।
- पूर्वावस्था I पर रोकें: दो समजात गुणसूत्र कसकर जुड़ते हैं, और आधे से आगे बढ़ने पर एक जोड़े में रंग-बदल दिखता है — यही क्रॉसिंग ओवर है।
- मध्यावस्था I देखें: पट्टिका पर जोड़े (द्विसंयोजक) लगते हैं, एकल गुणसूत्र नहीं। यही समसूत्री विभाजन से सबसे बड़ा अंतर है।
- पश्चावस्था I और अंत्यावस्था I से गुजरें: अब दो कोशिकाएँ हैं, और "गुणसूत्र संख्या" रीडिंग 2n से n हो जाती है।
- अर्धसूत्री II चलाएँ: दोनों कोशिकाएँ सिस्टर क्रोमैटिड को अलग करती हैं, ठीक सामान्य समसूत्री विभाजन जैसे, और अंत में चार कोशिकाएँ बनती हैं।
- "समसूत्री विभाजन से साथ-साथ तुलना करें" चालू करके पूरा चलाएँ: वही आरंभिक कोशिका समसूत्री विभाजन से दो समान द्विगुणित कोशिकाएँ देती, यहाँ चार भिन्न अर्धगुणित कोशिकाएँ मिलती हैं।
तुम अपने माता-पिता जैसे तो लगते हो, पर बिलकुल एक जैसे कभी नहीं
भाई-बहनों में समानता होती है, पर दो कभी पूरी तरह एक जैसे नहीं होते — कद, आँखों का रंग, रक्त समूह सब अलग होते हैं। हर माता-पिता अपने आधे गुणसूत्र संतान को देते हैं, पर कौन-सा आधा जाएगा यह हर बार अलग होता है। इस फेरबदल का एक ही स्रोत है: अर्धसूत्री विभाजन।
हर सामान्य मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं, यानी 23 जोड़े। पर शुक्राणु या अंडाणु में केवल 23 ही होते हैं। दोनों मिलकर संतान की कोशिका में फिर 46 हो जाते हैं। यह आधा करने का काम कौन करता है? हर नई पीढ़ी की आनुवंशिक विविधता यहीं से शुरू होती है, और इस पृष्ठ के सिमुलेशन में तुम इसे अपनी आँखों से देख सकते हो।
एक सवाल उठता है: कोशिका विभाजन तो समसूत्री विभाजन से भी होता है, तो शुक्राणु-अंडाणु उससे क्यों नहीं बनते? कारण सीधा है — समसूत्री विभाजन गुणसूत्र संख्या बदलता ही नहीं। यदि माता-पिता दोनों समसूत्री विभाजन से जनन कोशिकाएँ बनाते, तो हर पीढ़ी में संतान के गुणसूत्र दोगुने होते जाते। इस समस्या का हल ही अर्धसूत्री विभाजन है।
शुरुआत से समझें: अर्धसूत्री विभाजन किसे कहते हैं और क्यों ज़रूरी है
अर्धसूत्री विभाजन एक प्रकार का कोशिका विभाजन है, जिसमें एक द्विगुणित (2n) जनक कोशिका लगातार दो बार विभाजित होकर चार अर्धगुणित (n) कोशिकाएँ बनाती है। सिमुलेशन की कोशिका में 2n = 4 है, यानी समजात गुणसूत्रों के दो जोड़े; विभाजन के अंत में हर कोशिका में n = 2 गुणसूत्र रहते हैं, हर जोड़े से एक-एक।
शुक्राणु और अंडाणु जैसी जनन कोशिकाएँ (युग्मक) अर्धसूत्री विभाजन से ही बनती हैं, इसलिए यह युग्मकजनन का आधार है। पादपों में परागकण और अंडाशय के भीतर अंडकोशिका बनने में भी यही प्रक्रिया काम करती है। अर्धसूत्री विभाजन के बिना यौन जनन में गुणसूत्र संख्या पीढ़ी दर पीढ़ी स्थिर रखना संभव नहीं होता।
अर्धसूत्री विभाजन दो चरणों में होता है: अर्धसूत्री I और अर्धसूत्री II। अर्धसूत्री I को न्यूनकारी विभाजन कहते हैं, क्योंकि यहीं गुणसूत्र संख्या 2n से n होती है। अर्धसूत्री II दिखने में सामान्य समसूत्री विभाजन जैसा ही है, क्योंकि यहाँ गुणसूत्र संख्या नहीं बदलती—केवल हर गुणसूत्र के दो सिस्टर क्रोमैटिड अलग होते हैं। दोनों मिलाकर DNA का प्रतिकृतियन केवल एक बार होता है (S प्रावस्था में), जबकि केंद्रक दो बार बँटता है — यही पूरी परिभाषा है।
शरीर की हर कोशिका में अर्धसूत्री विभाजन नहीं होता। मनुष्य में यह केवल वृषण (शुक्राणु बनाने के लिए) और अंडाशय (अंडाणु बनाने के लिए) में होता है; पादपों में परागकोश और अंडाशय में। बाकी कोशिकाएँ, जैसे त्वचा या यकृत, समसूत्री विभाजन से बढ़ती और मरम्मत होती हैं।
अर्धसूत्री विभाजन के महत्वपूर्ण शब्द
अवस्थाओं में जाने से पहले शब्दावली स्पष्ट कर लें — परीक्षा के परिभाषा वाले प्रश्न यहीं से आते हैं।
| शब्द | सरल भाषा में अर्थ |
|---|---|
| समजात गुणसूत्र | आकार, रूप और जीन स्थिति में एक जैसे दो गुणसूत्र, एक पिता से एक माता से आया |
| सूत्रयुग्मन (सिनैप्सिस) | पूर्वावस्था I में दो समजात गुणसूत्रों का पास आकर कसकर जुड़ना |
| द्विसंयोजक (टेट्रैड) | सूत्रयुग्मन के बाद जुड़े दो समजात गुणसूत्र, कुल चार क्रोमैटिड से बना |
| क्रॉसिंग ओवर | द्विसंयोजक में नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड के बीच खंड बदलना, जो नए जीन संयोजन बनाता है |
| काइज़्मा | वह बिंदु जहाँ क्रॉसिंग ओवर के दौरान दो क्रोमैटिड एक-दूसरे को पार करके जुड़ते हैं |
| न्यूनकारी विभाजन | अर्धसूत्री I का दूसरा नाम, क्योंकि यहाँ गुणसूत्र संख्या आधी हो जाती है |
| अर्धगुणित (n) | गुणसूत्रों के एक ही समूह वाली कोशिका, हर प्रकार के गुणसूत्र की एक प्रति |
| द्विगुणित (2n) | गुणसूत्रों के दो समूह वाली कोशिका, हर प्रकार के गुणसूत्र की दो प्रतियाँ (एक जोड़ा) |
| युग्मक (गैमीट) | अर्धसूत्री विभाजन से बनी अर्धगुणित कोशिका, जैसे शुक्राणु या अंडाणु |
अर्धसूत्री I: न्यूनकारी विभाजन की चार अवस्थाएँ
अर्धसूत्री I का काम एक ही है: हर जोड़े के दो समजात गुणसूत्रों को अलग करना। सिस्टर क्रोमैटिड इस विभाजन में अलग नहीं होते, वे पूरे समय जुड़े रहते हैं।
पूर्वावस्था I: सूत्रयुग्मन और क्रॉसिंग ओवर
पूर्वावस्था I अर्धसूत्री विभाजन की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण अवस्था है। हर गुणसूत्र अपने समजात साथी को खोजकर उससे कसकर जुड़ता है; इस जुड़ने को सूत्रयुग्मन कहते हैं, और जुड़ी हुई संरचना को द्विसंयोजक या टेट्रैड (क्योंकि इसमें चार क्रोमैटिड होते हैं) कहा जाता है।
जुड़े रहते हुए, दो समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड आपस में DNA के खंड बदलते हैं। इसे क्रॉसिंग ओवर कहते हैं, और जहाँ यह होता है उस बिंदु को काइज़्मा कहते हैं। सिमुलेशन में इसे रंग-बदल से दिखाया गया है: एक क्रोमैटिड का बाहरी भाग अपने साथी का रंग ले लेता है। असल कोशिका में क्रॉसिंग ओवर DNA के वास्तविक टूटने और फिर जुड़ने से होता है; रंग-बदल केवल समझाने का तरीका है।
पूर्वावस्था I के अंत में केंद्रक आवरण टूट जाता है और तर्कु बनना शुरू होता है, ठीक समसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था जैसे। एक फर्क सब कुछ बदल देता है: यहाँ गुणसूत्र जोड़े में हाथ पकड़े हैं, अकेले नहीं।
मध्यावस्था I: जोड़े पंक्ति में, एकल गुणसूत्र नहीं
हर द्विसंयोजक मध्यावस्था पट्टिका पर आ जाता है। सिमुलेशन की 2n = 4 वाली कोशिका में 2 द्विसंयोजक बनते हैं, और हर गुणसूत्र में दो क्रोमैटिड होने से हर द्विसंयोजक में 4 क्रोमैटिड होते हैं।
समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था से यही सबसे बड़ा दृश्य अंतर है। समसूत्री विभाजन में हर एकल गुणसूत्र अकेला पंक्ति में लगता है; अर्धसूत्री I में एक जोड़े के दोनों समजात गुणसूत्र साथ में लगते हैं। किस जोड़े का कौन-सा गुणसूत्र किस ध्रुव की ओर जाएगा, यह संयोगवश तय होता है — यही स्वतंत्र अपव्यूहन (इंडिपेंडेंट असॉर्टमेंट) की शुरुआत है।
पश्चावस्था I: समजात गुणसूत्र अलग हुए
तर्कु तंतु हर जोड़े के दो समजात गुणसूत्रों को विपरीत ध्रुवों की ओर खींचते हैं। यह समसूत्री विभाजन की पश्चावस्था (जहाँ सिस्टर क्रोमैटिड अलग होते हैं) से पूरी तरह अलग है — यहाँ सेंट्रोमियर नहीं टूटता; हर गुणसूत्र अपने दोनों सिस्टर क्रोमैटिड लिए हुए ही अपने ध्रुव पर जाता है।
इसी कारण अर्धसूत्री I को न्यूनकारी विभाजन कहा जाता है: इससे पहले कोशिका में 2n = 4 गुणसूत्र थे, और इसके बाद हर भविष्य की कोशिका में केवल n = 2 रहेंगे। संख्या घट गई, पर हर गुणसूत्र अभी भी दोहरा (दो क्रोमैटिड वाला) है।
अंत्यावस्था I: दो अर्धगुणित कोशिकाएँ
दोनों ध्रुवों पर केंद्रक आवरण फिर बनते हैं, कोशिकाद्रव्य बँट जाता है, और परिणाम दो कोशिकाएँ हैं — हर एक में n = 2 गुणसूत्र, हर गुणसूत्र में अभी भी दो सिस्टर क्रोमैटिड। कुछ प्रजातियों में ये दो कोशिकाएँ सीधे अर्धसूत्री II में चली जाती हैं; कुछ में एक छोटा विराम (इंटरकाइनेसिस) होता है — पर दोनों स्थितियों में कोई नया DNA प्रतिकृतियन नहीं होता।
अर्धसूत्री II: सम विभाजन की चार अवस्थाएँ
अर्धसूत्री I से बनी दोनों कोशिकाएँ अब स्वतंत्र रूप से, एक साथ अर्धसूत्री II चलाती हैं। इसे सम विभाजन कहा जाता है क्योंकि गुणसूत्र संख्या नहीं बदलती — यह दिखने और काम में बिलकुल सामान्य समसूत्री विभाजन जैसा है, बस कोशिका में गुणसूत्र संख्या अब n है, 2n नहीं।
पूर्वावस्था II और मध्यावस्था II
हर कोशिका में तर्कु फिर बनता है, गुणसूत्र संघनित बने रहते हैं। मध्यावस्था II में हर गुणसूत्र अपनी कोशिका की पट्टिका पर एकल रूप में लगता है, जोड़े में नहीं—यहीं अर्धसूत्री II समसूत्री विभाजन की मध्यावस्था जैसा दिखता है।
पश्चावस्था II: सिस्टर क्रोमैटिड अलग हुए
हर गुणसूत्र का सेंट्रोमियर टूटता है, और उसके दो सिस्टर क्रोमैटिड विपरीत ध्रुवों की ओर जाते हैं। हर क्रोमैटिड अब स्वतंत्र गुणसूत्र है। यह चरण अक्षरशः समसूत्री विभाजन की पश्चावस्था जैसा है, फर्क सिर्फ यह कि यह एक अर्धगुणित कोशिका के भीतर हो रहा है।
अंत्यावस्था II: चार जनन कोशिकाएँ
दोनों कोशिकाएँ फिर बँटती हैं, और परिणाम चार अर्धगुणित कोशिकाएँ हैं, हर एक में n = 2 एक-क्रोमैटिड वाले गुणसूत्र। मनुष्य में ये मामूली आकृतिगत बदलाव के बाद शुक्राणु या अंडाणु बन जाते हैं।
चार कोशिकाएँ कभी एक-दूसरे जैसी नहीं होती। हर एक में क्रॉसिंग ओवर से बदले क्रोमैटिड और मध्यावस्था I में अलग तरह से सजे गुणसूत्रों का मिश्रण होता है, इसलिए हर एक का जीन संयोजन अलग है।
क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन: विविधता के दो इंजन
अर्धसूत्री विभाजन में आनुवंशिक विविधता दो अलग घटनाओं से बनती है। पहली है क्रॉसिंग ओवर: पूर्वावस्था I में नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड खंड बदलते हैं और नए जीन संयोजन वाले क्रोमैटिड बनाते हैं। दूसरी है स्वतंत्र अपव्यूहन: मध्यावस्था I में किस द्विसंयोजक का कौन-सा गुणसूत्र किस ध्रुव की ओर जाएगा, यह हर जोड़े के लिए अलग-अलग और संयोगवश तय होता है।
n जोड़े गुणसूत्रों वाली कोशिका में केवल स्वतंत्र अपव्यूहन से संभव भिन्न गुणसूत्र संयोजनों की संख्या 2ⁿ होती है। सिमुलेशन की कोशिका में n = 2, इसलिए यह 2^2 = 4 है। मनुष्य में n = 23, इसलिए यह संख्या 2^23 = 83,88,608 हो जाती है — और इसमें क्रॉसिंग ओवर की विविधता अभी जोड़ी नहीं गई। इसलिए दो भाई-बहन कभी एक जैसे नहीं दिखते।
द्विसंयोजकों की संख्या = nn जोड़े समजात गुणसूत्रों के लिए n = 2n / 2
संभावित गुणसूत्र संयोजन = 2ⁿकेवल स्वतंत्र अपव्यूहन से, क्रॉसिंग ओवर के बिना
समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन में अंतर
दोनों कोशिका विभाजन हैं, दोनों में DNA एक बार ही प्रतिकृतियन होता है, पर परिणाम पूरी तरह अलग हैं। यदि तुमने इस साइट का समसूत्री विभाजन सिमुलेशन पहले देखा है, तो नीचे की सारणी उससे मिलाकर देखो।
| विशेषता | समसूत्री विभाजन | अर्धसूत्री विभाजन |
|---|---|---|
| विभाजनों की संख्या | एक बार | दो बार (अर्धसूत्री I और II) |
| बनी संतति कोशिकाएँ | 2 | 4 |
| गुणसूत्र संख्या | अपरिवर्तित (2n से 2n) | आधी (2n से n; 4 से 2) |
| समजात गुणसूत्र जुड़ते हैं? | नहीं | हाँ, पूर्वावस्था I में (सूत्रयुग्मन) |
| क्रॉसिंग ओवर | नहीं होता | पूर्वावस्था I में होता है |
| संतति कोशिकाओं की आनुवंशिकता | जनक कोशिका की समान प्रतियाँ | एक-दूसरे से और जनक से भिन्न |
| कहाँ होता है | शरीर की लगभग हर विभाजित होने वाली कोशिका में | केवल जनन कोशिका बनाने वाले अंगों में |
| उद्देश्य | वृद्धि, मरम्मत, घिसी कोशिकाओं का प्रतिस्थापन | जनन कोशिकाएँ (युग्मक) बनाना |
अर्धसूत्री विभाजन का महत्व
संक्षेप में कहें तो: समसूत्री विभाजन शरीर को जीवित रखता है, अर्धसूत्री विभाजन प्रजाति को जीवित रखता है।
- जनन कोशिकाएँ बनाता है, जिससे यौन जनन संभव होता है।
- गुणसूत्र संख्या पीढ़ी दर पीढ़ी स्थिर रखता है; इसके बिना निषेचन के बाद हर पीढ़ी में गुणसूत्र संख्या दोगुनी हो जाती।
- क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन से आनुवंशिक विविधता बनाता है, जो प्रजाति के जीवित रहने की संभावना बढ़ाता है।
- हानिकारक उत्परिवर्तनों को फैलाकर पतला करने और लाभदायक उत्परिवर्तनों को नए संयोजनों में साथ लाकर विकास की गति बढ़ाता है।
सिमुलेशन में स्वयं करके देखें
हर बार पहले अनुमान लगाएँ, फिर चलाकर मिलाएँ।
- अंतरावस्था से अंत्यावस्था I तक 0.5× गति पर चलाएँ और वह क्षण नोट करें जब "2n = 4" रीडिंग "n = 2" में बदलती है।
- पूर्वावस्था I पर रोकें और समयरेखा स्लाइडर धीरे खिसकाएँ: रंग-बदल (क्रॉसिंग ओवर) ठीक किस क्षण दिखता है, देखें।
- मध्यावस्था I और मध्यावस्था II के बीच कूदें: एक में जोड़े पंक्ति में हैं, दूसरे में एकल गुणसूत्र — अंतर एक नज़र में दिखेगा।
- "समसूत्री विभाजन से साथ-साथ तुलना करें" चालू करके पूरी समयरेखा चलाएँ: दाईं ओर की दो समान द्विगुणित कोशिकाओं को बाईं ओर की चार भिन्न अर्धगुणित कोशिकाओं से मिलाएँ।
- "कुल कोशिकाएँ" रीडिंग देखें: जाँचें कि यह 1 से 2, फिर 2 से 4 ठीक अंत्यावस्था I और अंत्यावस्था II के अंत में ही बदलती है।
हल किए गए प्रश्न, चरण-दर-चरण
अर्धसूत्री विभाजन के प्रश्न ज़्यादातर गिनती के होते हैं: गुणसूत्र, क्रोमैटिड, द्विसंयोजक और संभावित संयोजन।
प्रश्न 1: सिमुलेशन की कोशिका में द्विसंयोजक
यदि 2n = 4, तो समजात जोड़ों की संख्या n = 4/2 = 2। हर जोड़ा एक द्विसंयोजक बनाता है, इसलिए मध्यावस्था I में द्विसंयोजकों की संख्या = 2।
प्रश्न 2: मध्यावस्था I में कुल क्रोमैटिड
हर गुणसूत्र के दो सिस्टर क्रोमैटिड होते हैं, और कोशिका में 4 गुणसूत्र हैं, इसलिए कुल क्रोमैटिड = 4 × 2 = 8। ये 8 क्रोमैटिड 2 द्विसंयोजकों में बँटे हैं, हर एक में 4।
प्रश्न 3: अंत्यावस्था I के बाद हर कोशिका में
पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र अलग होकर हर भविष्य की कोशिका में n = 2 गुणसूत्र भेजते हैं, पर उनके सिस्टर क्रोमैटिड अभी जुड़े हैं। इसलिए हर कोशिका में क्रोमैटिड संख्या = 2 × 2 = 4।
प्रश्न 4: अंत्यावस्था II के बाद हर कोशिका में
पश्चावस्था II में सिस्टर क्रोमैटिड अलग हो जाते हैं, इसलिए हर अंतिम कोशिका में गुणसूत्र संख्या = n = 2, हर एक एक-क्रोमैटिड वाला। चार अंतिम कोशिकाओं में मिलकर 2 × 4 = 4 गुणसूत्र-समतुल्य, जो जनक कोशिका की मूल संख्या से मेल खाता है।
प्रश्न 5: सिमुलेशन की कोशिका में संभावित युग्मक संयोजन
स्वतंत्र अपव्यूहन के सूत्र 2ⁿ का उपयोग करते हुए, n = 2 जोड़ों के लिए संभावित भिन्न गुणसूत्र संयोजन = 2^2 = 4। क्रॉसिंग ओवर जुड़ने से यह संख्या और भी बढ़ जाएगी।
प्रश्न 6: मानव कोशिका में द्विसंयोजक और संयोजन
मनुष्य में 2n = 46, इसलिए n = 23 और द्विसंयोजकों की संख्या = 23। केवल स्वतंत्र अपव्यूहन से संभावित युग्मक संयोजन = 2^23 = 83,88,608 — अस्सी लाख से भी अधिक, क्रॉसिंग ओवर अलग से।
प्रश्न 7: फल मक्खी (ड्रोसोफिला) की कोशिका में
फल मक्खी ड्रोसोफिला में 2n = 8, इसलिए n = 4 और संभावित युग्मक संयोजन = 2^4 = 16। मनुष्य से कम जोड़े होने से संयोजन भी कम हैं — पर फिर भी एक से कहीं अधिक।
प्रश्न 8: मटर के पौधे में (मेंडल का पौधा)
मेंडल के मटर के पौधे में 2n = 14, इसलिए n = 7 और संभावित युग्मक संयोजन = 2^7 = 128। यह विशाल संख्या एक कारण है कि एक ही मटर के पौधे की संतानें इतनी विविध हो सकती हैं।
प्रश्न 9: एक शुक्राणुकोशिका और एक अंडकोशिका से
एक प्राथमिक शुक्राणुकोशिका (स्पर्मेटोसाइट) अर्धसूत्री विभाजन पूरा करके 4 कार्यशील शुक्राणु देती है, सभी उपयोगी। एक प्राथमिक अंडकोशिका (ओओसाइट) उसी विभाजन से कुल 4 कोशिकाएँ देती है, पर उनमें से केवल 1 बड़ी कार्यशील अंडकोशिका और 3 छोटी ध्रुवीय काय (पोलर बॉडी) होती हैं, जो कभी युग्मक नहीं बनतीं। कोशिकाद्रव्य का असमान बँटवारा ही इस अंतर का कारण है।
वे गलतियाँ जो लगभग सभी करते हैं
इन गलतियों से बचकर अर्धसूत्री विभाजन के प्रश्नों में नंबर कटने से बचाया जा सकता है।
- मध्यावस्था I में एकल गुणसूत्र पंक्ति में लगते हैं मानना। वहाँ जोड़े (द्विसंयोजक) पंक्ति में लगते हैं; एकल गुणसूत्र केवल मध्यावस्था II में पंक्ति में लगते हैं।
- पश्चावस्था I को पश्चावस्था II जैसा मान लेना। पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं (सेंट्रोमियर बरकरार); पश्चावस्था II में सिस्टर क्रोमैटिड अलग होते हैं (सेंट्रोमियर टूटता है)।
- क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन को एक ही घटना समझना। पहला एक द्विसंयोजक के भीतर क्रोमैटिड के खंड बदलना है, दूसरा अलग-अलग द्विसंयोजकों के किस ध्रुव पर जाने का संयोगवश निर्णय है।
- अर्धसूत्री विभाजन से बनी चार कोशिकाएँ हमेशा बराबर आकार की मानना। शुक्राणु में यह सच है, पर अंडकोशिका बनने में कोशिकाद्रव्य असमान बँटता है, जिससे एक बड़ी अंडकोशिका और कुछ छोटी ध्रुवीय काय बनती हैं।
- अर्धसूत्री I और II के बीच नया DNA प्रतिकृतियन होने की धारणा। अर्धसूत्री विभाजन में DNA केवल एक बार प्रतिकृतियन होता है, अर्धसूत्री I शुरू होने से पहले, S प्रावस्था में।
असल ज़िंदगी में अर्धसूत्री विभाजन
अर्धसूत्री विभाजन केवल किताब का एक अध्याय नहीं है; हर नई पीढ़ी थोड़ी अलग क्यों दिखती है, इसका नियम यहीं लिखा है।
- मानव प्रजनन: वृषण और अंडाशय में अर्धसूत्री विभाजन से ही शुक्राणु और अंडाणु बनते हैं, और निषेचन पर उनका मिलन नए व्यक्ति की शुरुआत करता है।
- नई फसल किस्में: पादप प्रजनक अर्धसूत्री विभाजन के दौरान होने वाले क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन का लाभ लेकर संकरण से उपयोगी गुणों वाली नई किस्में बनाते हैं।
- आनुवंशिक जाँच: अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्र ठीक से अलग न हों (नॉनडिसजंक्शन) तो डाउन सिंड्रोम जैसी स्थितियाँ हो सकती हैं; गर्भस्थ शिशु की गुणसूत्र जाँच इस समझ पर आधारित है।
- संरक्षण प्रजनन: लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन कार्यक्रम आनुवंशिक विविधता बचाने के लिए स्वतंत्र अपव्यूहन के इसी सिद्धांत का उपयोग करते हैं।
- आनुवंशिक परामर्श: संतान में किसी विशेष आनुवंशिक गुण की संभावना पर डॉक्टरों की सलाह अर्धसूत्री विभाजन और मेंडल के नियमों पर ही टिकी है।
परीक्षा कोना: CBSE और NEET/JEE
CBSE कक्षा 11 जीव विज्ञान की कोशिका विभाजन इकाई में अर्धसूत्री विभाजन नियमित आता है, और NEET/JEE में यह आनुवंशिकी के प्रश्नों की नींव है। परिभाषा प्रश्नों में सूत्रयुग्मन और क्रॉसिंग ओवर, लघु-उत्तरीय प्रश्नों में समसूत्री-अर्धसूत्री तुलना, और संख्यात्मक प्रश्नों में द्विसंयोजक या संभावित संयोजन गिनना आता है।
एक हल किया गया परीक्षा-जैसा प्रश्न
परिदृश्य: एक कोशिका में 2n = 4 गुणसूत्र हैं, और यह अर्धसूत्री विभाजन से जनन कोशिकाएँ बनाती है।
(क) सूत्रयुग्मन की परिभाषा दें। (ख) क्रॉसिंग ओवर किस अवस्था में होता है, और यह क्यों महत्वपूर्ण है? (ग) मध्यावस्था I में द्विसंयोजकों की संख्या ज्ञात करें। (घ) कथन का मूल्यांकन करें: "अर्धसूत्री विभाजन से बनी चार जनन कोशिकाएँ आनुवंशिक रूप से एक-दूसरे से भिन्न होती हैं।"
(ग) का उत्तर: n = 4/2 = 2, इसलिए द्विसंयोजकों की संख्या = 2। (घ) का मूल कथन: क्रॉसिंग ओवर (नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड के बीच खंड बदलना) और स्वतंत्र अपव्यूहन (द्विसंयोजक का संयोगवश ध्रुव चुनना) मिलकर हर जनन कोशिका को अलग जीन संयोजन देते हैं, इसलिए कथन सही है।
दोहराव: अंतिम समय का सारांश
परीक्षा से पहले केवल यह सूची और समसूत्री-अर्धसूत्री सारणी एक बार देख लेना पर्याप्त है।
- अर्धसूत्री विभाजन: एक द्विगुणित (2n) कोशिका दो बार विभाजित होकर चार अर्धगुणित (n) जनन कोशिकाएँ बनाती है; सिमुलेशन में 4 → 2।
- अर्धसूत्री I = न्यूनकारी विभाजन: पूर्वावस्था I में सूत्रयुग्मन और क्रॉसिंग ओवर, मध्यावस्था I में जोड़े पंक्ति में, पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र अलग।
- अर्धसूत्री II = सम विभाजन: एकल गुणसूत्र पंक्ति में (मध्यावस्था II), सिस्टर क्रोमैटिड अलग (पश्चावस्था II)।
- क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन मिलकर विविधता बनाते हैं; n जोड़ों के लिए संभावित संयोजन = 2ⁿ।
- समसूत्री विभाजन: एक विभाजन, दो समान द्विगुणित कोशिकाएँ। अर्धसूत्री विभाजन: दो विभाजन, चार भिन्न अर्धगुणित कोशिकाएँ।
- अर्धसूत्री विभाजन में DNA केवल एक बार प्रतिकृतियन होता है, अर्धसूत्री I से पहले।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अर्धसूत्री विभाजन किसे कहते हैं?
अर्धसूत्री विभाजन वह कोशिका विभाजन है जिसमें एक द्विगुणित (2n) जनक कोशिका लगातार दो बार विभाजित होकर चार अर्धगुणित (n) जनन कोशिकाएँ बनाती है। सिमुलेशन में 4 से 2 हो जाता है।
अर्धसूत्री विभाजन कितनी अवस्थाओं में पूरा होता है?
दो मुख्य विभाजनों में: अर्धसूत्री I (पूर्वावस्था I, मध्यावस्था I, पश्चावस्था I, अंत्यावस्था I) और अर्धसूत्री II (पूर्वावस्था II, मध्यावस्था II, पश्चावस्था II, अंत्यावस्था II) — कुल आठ नामित अवस्थाएँ, साथ में शुरुआती अंतरावस्था।
समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन में मुख्य अंतर क्या है?
समसूत्री विभाजन एक बार होकर दो समान द्विगुणित कोशिकाएँ देता है; अर्धसूत्री विभाजन दो बार होकर चार आनुवंशिक रूप से भिन्न अर्धगुणित कोशिकाएँ देता है, और बीच में क्रॉसिंग ओवर होता है।
क्रॉसिंग ओवर क्या है और कब होता है?
समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड के बीच DNA खंडों के बदलने को क्रॉसिंग ओवर कहते हैं, जो पूर्वावस्था I में होता है। यह बनने वाली जनन कोशिकाओं में नए जीन संयोजन बनाता है।
गुणसूत्र संख्या किस अवस्था में आधी होती है?
पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र अलग होते हैं, और अंत्यावस्था I में विभाजन पूरा होकर दो कोशिकाएँ बनती हैं, तभी संख्या 2n से n हो जाती है। अर्धसूत्री II में यह फिर नहीं बदलती।
सूत्रयुग्मन और द्विसंयोजक क्या हैं?
पूर्वावस्था I में दो समजात गुणसूत्रों के कसकर जुड़ने को सूत्रयुग्मन कहते हैं। जुड़ी संरचना को द्विसंयोजक या टेट्रैड कहा जाता है, जिसमें कुल चार क्रोमैटिड होते हैं।
अर्धसूत्री विभाजन से बनी चार कोशिकाएँ क्या एक जैसी होती हैं?
नहीं। क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र अपव्यूहन के कारण चार कोशिकाओं में से हर एक का जीन संयोजन अलग होता है, भले ही सभी में गुणसूत्र संख्या n बराबर हो।
मानव शरीर में अर्धसूत्री विभाजन कहाँ होता है?
वृषण में, जहाँ यह शुक्राणु बनाता है, और अंडाशय में, जहाँ यह अंडाणु बनाता है। पादपों में यही प्रक्रिया परागकोश और अंडाशय में होती है।
अर्धसूत्री विभाजन न होता तो क्या समस्या होती?
अगर जनन कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन से बनतीं, तो गुणसूत्र संख्या आधी नहीं होती, और निषेचन के बाद हर पीढ़ी में गुणसूत्र संख्या दोगुनी होती जाती, जिससे कोशिका के काम में गड़बड़ी आती।
नॉनडिसजंक्शन क्या है?
पश्चावस्था में गुणसूत्र या क्रोमैटिड ठीक से अलग न होकर एक ही ध्रुव पर चले जाना नॉनडिसजंक्शन कहलाता है, जिससे जनन कोशिका में गुणसूत्र संख्या ज़्यादा या कम हो जाती है — जैसे डाउन सिंड्रोम में गुणसूत्र 21 की एक अतिरिक्त प्रति होती है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
HSC
HSC Biology: syllabus and preparation
Admission
Medical admission 2026-27
SSC
SSC Biology: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Biology textbook
Admission
Medical admission test preparation
Admission
GST cluster science unit admission 2026-27
English
Composition: Climate Change
Bangla
রচনা: জলবায়ু পরিবর্তন (बांग्ला में)
SSC
SSC suggestions
HSC
HSC suggestions
Admission
University admission guide
SSC
SSC syllabus
HSC
HSC syllabus
Study abroad
Study in the USA
Scholarship
CSC scholarship (China)
IELTS
IELTS Writing Task 1: process diagrams
IELTS
IELTS preparation guide
Study abroad
Academic CV for study abroad
Career
Dental hygienist resume example
जीव विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 9 · 11
समसूत्री कोशिका विभाजन
समसूत्री विभाजन किसे कहते हैं? पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था और कोशिकाद्रव्य विभाजन को चलते एनिमेशन में देखें, गुणसूत्र गिनने के नियम और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 9 · 11
विसरण और परासरण
विसरण और परासरण क्या है, इनमें अंतर, जीवद्रव्यकुंचन, स्फीति और अंतःशोषण: कणों के लाइव सिमुलेशन से आसान भाषा में समझें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 7 · 10 · 11
प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं, इसका समीकरण, प्रकाश और अप्रकाशी अभिक्रिया, केल्विन चक्र और प्रभावित करने वाले कारक: पत्ती और हाइड्रिला के सिमुलेशन में खुद देखें।
कक्षा 10 · 11
मानव हृदय की संरचना और कार्य
हृदय के चार कक्ष, कपाट, लब-डब ध्वनि और चलता ईसीजी एक साथ देखें। दोहरा परिसंचरण, हृद चक्र और हृद निकास हल किए गए प्रश्नों के साथ समझें (कक्षा 10, 11, NEET)।
कक्षा 10 · 12
मेंडल के आनुवंशिकता नियम
मेंडल के नियम, एकसंकर व द्विसंकर संकरण, परीक्षार्थ संकरण, अपूर्ण प्रभाविता, रक्त समूह सहप्रभाविता और लिंग निर्धारण — खुद पनेट वर्ग बनाकर हर अनुपात लाइव देखें।
कक्षा 12
डीएनए प्रतिकृति
डीएनए प्रतिकृति क्या है, अर्धसंरक्षी सिद्धांत, प्रतिकृति एंज़ाइमों का काम और मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग को सिमुलेशन में स्वयं देखें और हिसाब लगाएँ।
कक्षा 10 · 11
कोशिकीय श्वसन
कोशिकीय श्वसन क्या है, वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर, ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र, इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र और ATP की गणना: सूत्रकणिका के सिमुलेशन में स्वयं देखें और गिनें।
कक्षा 10 · 11
एंजाइम क्रिया
एंजाइम क्या है, सक्रिय स्थल, ताला-चाबी व प्रेरित संग्रहण मॉडल, तापमान-pH का प्रभाव, मिकेलिस-मेंटन समीकरण और संदमक — लाइव सिमुलेशन में खुद बदलकर देखें।
कक्षा 10 · 11
तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
देहली मान (-55 mV) पार करते ही एक्शन पोटेंशियल बनता है और अक्षतंतु में दौड़ता है — सतत या साल्टेटरी — फिर सिनेप्स पर न्यूरोट्रांसमीटर मुक्त होता है, सूत्रों सहित।
कक्षा 10 · 11
नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
वृक्क रोज़ाना लगभग 180 लीटर तरल छानकर भी मूत्र सिर्फ़ लगभग 1.50 लीटर क्यों बनाता है? छानना, पुनः अवशोषण और ग्लूकोज़ की देहली मात्रा — सिमुलेशन में खुद आज़माएँ, सूत्रों सहित।
कक्षा 10 · 11
पाचन तंत्र
पाचन तंत्र क्या है, कौन-सा एंजाइम कहाँ काम करता है, विलाई कैसे अवशोषित करती हैं — मुँह से बड़ी आँत तक भोजन की यात्रा स्वयं चलाकर देखें।
कक्षा 10 · 11
श्वसन क्रियाविधि: अंतःश्वसन और उच्छ्वसन
डायाफ्राम, पसलियाँ और अंतरापर्शुक पेशियाँ फुफ्फुस में हवा कैसे भरती और निकालती हैं, एनिमेशन में देखें। दाब मापक, स्पाइरोमीटर आलेख, बेल जार मॉडल और कूपिका में गैसों का विनिमय, हल प्रश्नों सहित।
कक्षा 12
प्रोटीन संश्लेषण
आरएनए पोलीमरेज़ जीन से mRNA कैसे बनाता है और राइबोसोम कोडोन पढ़कर प्रोटीन कैसे जोड़ता है, एनिमेशन में खुद देखें। जीन बदलें, उत्परिवर्तन करें, कोडोन सारणी मिलाएँ।
कक्षा 10 · 11
रक्त परिसंचरण: दोहरा परिसंचरण और हृदय निर्गम
देखिए रक्त हृदय से फेफड़ों, फिर पूरे शरीर और वापस हृदय तक कैसे जाता है। फुफ्फुसीय व दैहिक परिसंचरण, धमनी-शिरा-केशिका का अंतर और हृदय निर्गम के हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 9
कोशिका की संरचना और कोशिकांग: पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका
पादप कोशिका और जंतु कोशिका को साथ-साथ देखिए। केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवक, गॉल्जी उपकरण, राइबोसोम पर क्लिक करके हर भाग का कार्य जानिए। अंतर की तालिका, आवर्धन के प्रश्न और परीक्षा के सवाल सहित।
कक्षा 10
प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप
गर्म चीज़ छूने पर संकेत ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु, प्रेरक तंत्रिका से होकर पेशी तक कैसे पहुँचता है, खुद चलाकर देखें। प्रतिवर्त का समय (24.33 ms) निकालें और जानें कि दर्द बाद में क्यों होता है।
कक्षा 10 · 11
मानव नेत्र: संरचना, प्रतिबिंब और समंजन
स्वच्छमंडल, परितारिका, लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ, दृष्टिपटल, पीत बिंदु और अंध बिंदु कैसे काम करते हैं, चलते चित्र में देखें। समंजन, निकट-दृष्टि और दीर्घ-दृष्टि दोष, लेंस क्षमता के हल सहित।
कक्षा 11 · 12
पेशी संकुचन और स्लाइडिंग-फ़िलामेंट मॉडल
सार्कोमियर में एक्टिन और मायोसिन को सरकते देखें। ए बैंड 1.6 µm ही रहता है, जबकि आई बैंड और एच क्षेत्र घटते हैं। क्रॉस-ब्रिज चक्र, कैल्शियम और एटीपी चरण-दर-चरण समझें।
कक्षा 10 · 11
पौधों में परिवहन: जाइलम, फ्लोएम और वाष्पोत्सर्जन
देखें कि जाइलम में पानी कैसे ऊपर चढ़ता है और फ्लोएम में शर्करा कैसे नीचे जाती है। प्रकाश, आर्द्रता और हवा बदलकर वाष्पोत्सर्जन की दर (54.8 g/m²/h) निकालें।
कक्षा 10 · 12
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल: ऊर्जा प्रवाह और 10 % नियम
खाद्य जाल बनाएँ, एक प्रजाति हटाकर असर देखें और ऊर्जा पिरामिड पर 10% नियम चलाएँ (उत्पादकों की 10,000 kJ से शीर्ष पर बचती है केवल 1 kJ)।
कक्षा 11 · 12
जनसंख्या वृद्धि: चरघातांकी और लॉजिस्टिक वक्र
r और वहन क्षमता K खींचें और चरघातांकी व लॉजिस्टिक वक्रों को अलग होते देखें। r = 0.40 प्रति घंटा और K = 1,000 पर कल्चर हर 1.73 घंटे में दोगुना होता है और K के पास रुक जाता है।
कक्षा 11 · 12
प्राकृतिक चयन: पेप्पर्ड मॉथ और कालिख वाला पेड़
कालिख का स्तर बदलकर देखिए कि पक्षी कौन-सा मॉथ पकड़ते हैं। 80% कालिख और 40% चयन पर गहरे मॉथ 10% से 15 पीढ़ियों में 90% से ऊपर पहुँच जाते हैं।
कक्षा 10 · 12
प्रतिरक्षा अनुक्रिया: प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिपिंड अनुक्रिया
टीका लगे और बिना टीके वाले व्यक्ति के प्रतिपिंड स्तर एक ग्राफ़ पर मिलाइए। इस मॉडल में स्मृति से सुरक्षा पाने का समय 8.1 से घटकर 2.5 दिन रह जाता है और शिखर 5.1 गुना ऊँचा होता है।
कक्षा 12
परागण और निषेचन
परागकोश से वर्तिकाग्र, परागनलिका से होकर बीजांड तक पराग की यात्रा देखें। द्विनिषेचन में 14 गुणसूत्र का युग्मनज और 21 गुणसूत्र का भ्रूणपोष कैसे बनता है, फिर बीज और फल।
अन्य विषयों के एनिमेशन
भौतिकी
प्रकाश का अपवर्तन
भौतिकी
ओम का नियम
भौतिकी
प्रक्षेप्य गति
भौतिकी
सरल लोलक
भौतिकी
विद्युत क्षेत्र
भौतिकी
तरंगों का व्यतिकरण
भौतिकी
मुक्त पतन
भौतिकी
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
भौतिकी
न्यूटन के गति के नियम
भौतिकी
गोलीय दर्पण किरण आरेख
भौतिकी
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
भौतिकी
संवेग संरक्षण और संघट्ट
भौतिकी
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
भौतिकी
आनत तल
भौतिकी
एकसमान वृत्तीय गति
भौतिकी
अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंग
भौतिकी
उत्तोलक और आघूर्ण
भौतिकी
द्रव्यमान केंद्र
भौतिकी
कमानी-द्रव्यमान की सरल आवर्त गति
भौतिकी
सदिशों का योग: त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम
भौतिकी
सापेक्ष वेग: रेलगाड़ियाँ और नदी पार करना
भौतिकी
केपलर के नियम और दीर्घवृत्ताकार कक्षा
भौतिकी
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, g और उपग्रह
भौतिकी
तार और नलियों में अप्रगामी तरंगें
भौतिकी
अनुनाद नली और ध्वनि की चाल
भौतिकी
विस्पंद: दो पास-पास के सुरों की धड़कन
भौतिकी
डॉप्लर प्रभाव: चलता स्रोत, चलता श्रोता और सोनिक बूम
भौतिकी
प्रिज़्म, प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण और इंद्रधनुष
भौतिकी
किरख़ोफ़ के नियम: संधि नियम और लूप नियम
भौतिकी
व्हीटस्टोन सेतु और मीटर सेतु
भौतिकी
एकल झिरी से विवर्तन
भौतिकी
आँख के दोष और उनका निवारण
भौतिकी
प्रकाश का ध्रुवण: मैलस का नियम और ब्रूस्टर का नियम
भौतिकी
संधारित्र का आवेशन और विसर्जन: RC समय स्थिरांक
भौतिकी
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: छड़ चुंबक, धारावाही तार और परिनालिका
भौतिकी
एसी जनित्र
भौतिकी
ट्रांसफ़ॉर्मर
भौतिकी
ऊष्मा का स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण
भौतिकी
प्रकाश-विद्युत प्रभाव: आइंस्टाइन का समीकरण और निरोधी विभव
भौतिकी
मोटर प्रभाव: धारावाही तार पर बल और डीसी मोटर
भौतिकी
गैस के अणु और अणुगति सिद्धांत: दाब, तापमान और चाल
भौतिकी
अर्धचालक डायोड: p–n संधि, I–V वक्र और दिष्टकारी
भौतिकी
रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता
भौतिकी
बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
रसायन विज्ञान
परमाणु की संरचना
रसायन विज्ञान
अम्ल, क्षारक और pH मान
रसायन विज्ञान
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
रसायन विज्ञान
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
रसायन विज्ञान
आयनिक बंध कैसे बनता है
रसायन विज्ञान
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
रसायन विज्ञान
सहसंयोजक बंध
रसायन विज्ञान
आवर्त सारणी की आवर्तिता
रसायन विज्ञान
अभिक्रिया की दर और संघट्ट सिद्धांत
रसायन विज्ञान
द्रव्य की अवस्थाएँ: ठोस, द्रव, गैस और तापन वक्र
रसायन विज्ञान
परमाणु कक्षक: s, p, d के आकार, क्वांटम संख्याएँ और नोड
रसायन विज्ञान
आणविक आकृतियाँ और VSEPR सिद्धांत: आबंध युग्म, एकाकी युग्म और कोण
रसायन विज्ञान
मोल अवधारणा: मोलर द्रव्यमान, आवोगाद्रो संख्या और मोलर आयतन
रसायन विज्ञान
विसरण और निःस्राव: ग्राहम का नियम
रसायन विज्ञान
रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास
रसायन विज्ञान
रासायनिक साम्य: साम्य स्थिरांक Kc और ले शातेलिए का सिद्धांत
रसायन विज्ञान
अनुमापन: ब्यूरेट और सूचक से अज्ञात सांद्रता निकालना
रसायन विज्ञान
गैल्वेनिक सेल: डेनियल सेल, EMF और नर्स्ट समीकरण
रसायन विज्ञान
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ: ऑक्सीकरण संख्या, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और अर्ध-अभिक्रिया
रसायन विज्ञान
हाइड्रोकार्बन: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और संरचनात्मक समावयवी 3D में
रसायन विज्ञान
प्रकार्यात्मक समूह: ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन
रसायन विज्ञान
बहुलकीकरण: योगात्मक और संघनन बहुलक, पॉलिथीन और नायलॉन
रसायन विज्ञान
मिश्रण अलग करने की विधियाँ: निस्यंदन, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, क्रिस्टलन
रसायन विज्ञान
क्रिस्टल जालक: SC, BCC और FCC एकक कोष्ठिका, संकुलन क्षमता और घनत्व
रसायन विज्ञान
रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित
माध्य, माध्यिका और बहुलक
गणित
समुच्चय और वेन आरेख
गणित
रैखिक समीकरण युग्म और सरल रेखा का आलेख
गणित
sin, cos, tan के आलेख
गणित
पूर्ण वर्ग बनाने की विधि और द्विघात समीकरण
गणित
वृत्त का क्षेत्रफल: सूत्र, उपपत्ति और हल किए प्रश्न
गणित
ठोस का आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल: घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला
गणित
समरूप त्रिभुज: स्केल गुणक, AA, SSS, SAS नियम और छाया से ऊँचाई
गणित
निर्देशांक ज्यामिति: दूरी, मध्य-बिंदु, ढाल, विभाजन सूत्र और बिंदुपथ
गणित
शांकव परिच्छेद: वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय
गणित
फलनों का रूपांतरण: खिसकाना, खींचना और पलटना
गणित
अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
गणित
रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
गणित
सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए
गणित
त्रिविमीय सदिश: योग, डॉट गुणन और क्रॉस गुणन
गणित
आव्यूह रूपांतरण: घूर्णन, परावर्तन, अपरूपण और सारणिक
गणित
सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल
गणित






















