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रक्त किस रास्ते घूमता है: दो चक्र, तीन नलिकाएँ और हृदय का मिनट-भर का हिसाब

रक्त परिसंचरण का अर्थ है हृदय के पंप से रक्त का बंद नलिकाओं में पूरे शरीर में घूमना। मनुष्य में रक्त दो चक्रों में घूमता है, इसलिए इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं: फुफ्फुसीय चक्र में ऑक्सीजन भरती है और दैहिक चक्र में वह ऊतकों तक पहुँचती है। 72 बार/मिनट और 70 mL प्रति धड़कन पर हृदय निर्गम लगभग 5.04 लीटर प्रति मिनट है।

यह योजनात्मक चित्र है, पैमाने के अनुसार नहीं; आँकड़े पाठ्यपुस्तक के अनुमानित मान हैं।

ऑक्सीजन-युक्त रक्तऑक्सीजन-रहित रक्तO₂CO₂शिरा का वाल्व
गति

नियंत्रण

72 बार/मिनट
70 mL

गतिविधि

कौन-सा परिसंचरण दिखाएँ

मापन

हृदय गति
72बार/मिनट
स्ट्रोक आयतन (प्रति धड़कन)
70mL
हृदय निर्गम = गति × स्ट्रोक आयतन
5.04L/min
पूरा रक्त एक बार घूमने में समय
60s
एक दिन में पंप किया रक्त
7,258L
अब तक की धड़कनें
0
अब तक पंप किया रक्त
0.00L

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. चलाकर लाल और नीले कणों का पथ देखिए: दायाँ निलय से फुफ्फुस, फुफ्फुस से बायाँ आलिंद और बायाँ निलय, फिर पूरा शरीर और वापस दायाँ आलिंद। फुफ्फुस की केशिकाओं में नीले कण लाल होते हैं और शरीर की केशिकाओं में लाल कण नीले।
  2. “कौन-सा परिसंचरण दिखाएँ” में फुफ्फुसीय या दैहिक चुनिए। दूसरा चक्र धुँधला हो जाएगा, जिससे एक चक्र को अलग से देखना आसान होगा।
  3. हृदय गति बढ़ाइए। कण तेज़ चलते हैं और हृदय निर्गम बढ़ता है। स्ट्रोक आयतन बढ़ाने पर हर धड़कन में अधिक रक्त जाता है, इसलिए कणों की संख्या बढ़ती है।
  4. “आराम में”, “व्यायाम में” और “प्रशिक्षित खिलाड़ी” बारी-बारी चुनकर तीनों के हृदय निर्गम की तुलना कीजिए। खिलाड़ी की गति कम है, फिर भी निर्गम लगभग बराबर है।
  5. धमनी, शिरा और केशिका वाला विकल्प चालू रखिए: धमनी की दीवार मोटी, शिरा में वाल्व के चिह्न, और केशिका में कण सबसे धीमे चलते हैं।

रक्त आख़िर जाता कहाँ है?

एक सीधा-सा सवाल लेते हैं। क्या रक्त बनता है, खर्च होता है और फिर नया बनता है, या वही रक्त बार-बार घूमता है? हज़ार साल से भी ज़्यादा तक चिकित्सक मानते रहे कि यकृत रक्त बनाता रहता है और ऊतक उसे सोख लेते हैं, यानी रक्त ज्वार-भाटे की तरह आता-जाता है।

सन् 1628 में अंग्रेज़ चिकित्सक विलियम हार्वे ने एक चतुर तर्क दिया। हृदय एक धड़कन में जितना रक्त फेंकता है, उसे एक घंटे की धड़कनों से गुणा कीजिए, तो शरीर के कुल रक्त से कहीं ज़्यादा निकलता है। हमारे एनिमेशन के मानों पर हृदय एक घंटे में लगभग 302.4 लीटर पंप करता है, जबकि शरीर में रक्त केवल 5 लीटर के आसपास है। यानी वही रक्त हर घंटे लगभग 60 बार हृदय से गुज़रता है।

इतना नया रक्त हर घंटे बन ही नहीं सकता, इसलिए रक्त को घूमना ही पड़ता है। हार्वे का निष्कर्ष था कि रक्त एक बंद पथ में चक्कर लगाता है और हृदय उसका पंप है। उनके पास सूक्ष्मदर्शी नहीं था, इसलिए धमनी और शिरा को जोड़ने वाली बारीक नलिकाएँ, यानी केशिकाएँ, वे नहीं देख पाए। उन्हें कुछ दशक बाद मार्सेलो माल्पीघी ने खोजा।

इस पन्ने का एनिमेशन आपको हार्वे का वही पथ अपनी आँखों के सामने चलता दिखाता है।

परिसंचरण क्या है, बिल्कुल शुरू से

शरीर की हर कोशिका को ऑक्सीजन और भोजन चाहिए, और हर कोशिका से अपशिष्ट हटाना भी ज़रूरी है। किसी बड़े शहर की कल्पना कीजिए: हर घर तक राशन पहुँचाना पड़ता है और कचरा बाहर ले जाना पड़ता है। शरीर की इस ढुलाई व्यवस्था को परिसंचरण तंत्र कहते हैं। इसके तीन भाग हैं: रक्त (जो ढोया जाता है), रक्त वाहिकाएँ (रास्ते) और हृदय (पंप)।

वाहिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं। जो वाहिका हृदय से रक्त दूर ले जाती है, वह धमनी है। जो रक्त हृदय में वापस लाती है, वह शिरा है। इन दोनों के बीच अत्यंत बारीक नलिकाओं का जाल है, जिन्हें केशिकाएँ कहते हैं; कोशिकाओं से असली लेन-देन यहीं होता है।

एक नियम जो अंक बचाता है: वाहिका का नाम रक्त की दिशा से तय होता है, इस बात से नहीं कि उसमें कितनी ऑक्सीजन है। हृदय से निकले तो धमनी, हृदय में जाए तो शिरा। यह एक नियम पकड़ लें तो परीक्षा के कई जाल अपने-आप कट जाते हैं।

मनुष्य में हृदय एक ही है, पर रक्त एक पूरे चक्कर में उससे दो बार गुज़रता है: एक बार फेफड़ों के रास्ते और एक बार बाकी शरीर के रास्ते। इसी कारण इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

शब्दावली: परीक्षा से पहले दोहरा लीजिए

ये शब्द चित्र और पाठ में बार-बार आएँगे। एक बार नज़र डाल लेंगे तो आगे का भाग आसान लगेगा।

  • परिसंचरण: हृदय के धक्के से रक्त का बंद वाहिकाओं में घूमना।
  • दोहरा परिसंचरण: एक पूरे चक्कर में रक्त का हृदय से दो बार गुज़रना, एक बार फेफड़ों के लिए और एक बार शरीर के लिए।
  • फुफ्फुसीय परिसंचरण: दायाँ निलय से फुफ्फुस होते हुए बायाँ आलिंद तक का चक्र।
  • दैहिक परिसंचरण: बायाँ निलय से शरीर के ऊतकों होते हुए दायाँ आलिंद तक का चक्र।
  • धमनी: हृदय से रक्त ले जाने वाली वाहिका; दीवार मोटी और लचीली।
  • शिरा: हृदय में रक्त वापस लाने वाली वाहिका; दीवार पतली, भीतर वाल्व होते हैं।
  • केशिका: सूक्ष्म वाहिका जिसकी दीवार एक कोशिका मोटी होती है; गैसों और पोषक पदार्थों का आदान-प्रदान यहीं होता है।
  • महाधमनी: बायाँ निलय से निकलने वाली सबसे बड़ी धमनी।
  • महाशिरा: शरीर से रक्त लाकर दायाँ आलिंद में डालने वाली बड़ी शिराएँ (ऊर्ध्व और निम्न)।
  • स्ट्रोक आयतन: एक धड़कन में एक निलय से निकला रक्त का आयतन।
  • हृदय निर्गम: एक मिनट में एक निलय से निकला रक्त, यानी गति × स्ट्रोक आयतन।

हृदय के चार कक्ष, संक्षेप में

हृदय में चार कक्ष हैं: ऊपर दो आलिंद (ग्रहण करने वाले कक्ष) और नीचे दो निलय (बाहर भेजने वाले कक्ष)। बीच की दीवार, यानी पट, दाएँ और बाएँ भाग को अलग रखती है। एनिमेशन में दाएँ कक्षों में नीला और बाएँ कक्षों में लाल रक्त है, क्योंकि यह पट दोनों प्रकार के रक्त को मिलने नहीं देता।

दायाँ आलिंद शरीर से लौटा ऑक्सीजन-रहित रक्त लेता है और दायाँ निलय उसे फेफड़ों में भेजता है। बायाँ आलिंद फेफड़ों से आया ऑक्सीजन-युक्त रक्त लेता है और बायाँ निलय उसे महाधमनी से पूरे शरीर में धकेलता है। बाएँ निलय की दीवार सबसे मोटी होती है, क्योंकि उसे रक्त को सबसे दूर तक पहुँचाना होता है।

वाल्व कैसे खुलते-बंद होते हैं और एक धड़कन के चरण क्या हैं, यह अलग “मानव हृदय” एनिमेशन में विस्तार से दिखाया गया है। इस पन्ने का ध्यान दूसरी जगह है: हृदय के बाहर रक्त का पूरा पथ, वाहिकाओं के प्रकार और प्रति मिनट कितना रक्त घूमता है।

दो चक्र, चरण-दर-चरण

परिसंचरण समझने का सबसे आसान तरीका है रक्त के एक कण के साथ सफ़र करना। एनिमेशन में ठीक यही कीजिए।

फुफ्फुसीय परिसंचरण: ऑक्सीजन भरने वाला चक्र

दायाँ निलय से शुरू कीजिए। यहाँ रक्त नीला है, क्योंकि शरीर का चक्कर लगाकर आने में उसकी ऑक्सीजन खर्च हुई है और कार्बन डाइऑक्साइड जमा हुई है।

  • दायाँ निलय सिकुड़कर रक्त को फुफ्फुसीय धमनी में धकेलता है।
  • फुफ्फुसीय धमनी दो शाखाओं में बँटकर दाएँ और बाएँ फुफ्फुस तक जाती है। यह वह धमनी है जो ऑक्सीजन-रहित रक्त ले जाती है।
  • फुफ्फुस की केशिकाओं में रक्त वायुकोशों के ठीक पास से गुज़रता है। ऑक्सीजन रक्त में आती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलकर उच्छ्वास में चली जाती है। एनिमेशन में कण नीले से लाल होते हैं।
  • फुफ्फुसीय शिराएँ ऑक्सीजन-युक्त रक्त को बाएँ आलिंद में लाती हैं। ये वे शिराएँ हैं जो ऑक्सीजन-युक्त रक्त ले जाती हैं।

दैहिक परिसंचरण: हर कोने तक पहुँचने वाला चक्र

बाएँ आलिंद से रक्त बाएँ निलय में उतरता है और लंबा सफ़र शुरू होता है।

  • बायाँ निलय ज़ोर से सिकुड़कर रक्त को महाधमनी में धकेलता है।
  • महाधमनी की शाखाएँ सिर, भुजाओं, पेट और टाँगों तक जाती हैं और पतली होते-होते केशिकाएँ बन जाती हैं।
  • ऊतकों की केशिकाओं में ऑक्सीजन और पोषक पदार्थ रक्त से कोशिकाओं में जाते हैं, और कार्बन डाइऑक्साइड व अपशिष्ट कोशिकाओं से रक्त में आते हैं। कण लाल से नीले हो जाते हैं।
  • केशिकाएँ मिलकर छोटी शिराएँ बनाती हैं, वे मिलकर बड़ी शिराएँ, और अंत में ऊर्ध्व व निम्न महाशिरा रक्त को दाएँ आलिंद में डाल देती हैं।

दोनों चक्र कैसे जुड़ते हैं

दाएँ आलिंद से रक्त दाएँ निलय में उतरता है और चक्र फिर शुरू हो जाता है। यानी फुफ्फुसीय और दैहिक दो अलग घेरे नहीं हैं; ये एक लंबी आठ-आकृति के दो फंदे हैं और बीच का संगम हृदय है।

दोनों निलय एक ही समय में बराबर आयतन फेंकते हैं। आराम में एक मिनट में दायाँ निलय फेफड़ों को लगभग 5.04 लीटर भेजता है और बायाँ निलय शरीर को उतना ही। अगर दोनों पक्ष बराबर न रहें तो कहीं रक्त जमा होने लगे।

इन दोनों चक्रों के अलावा एक छोटा तीसरा चक्र भी है, जिसे कोरोनरी परिसंचरण कहते हैं और जो हृदय की पेशी को ही रक्त देता है। कोरोनरी धमनियाँ महाधमनी के बिल्कुल आरंभ से निकलती हैं और हृदय को ऑक्सीजन तथा भोजन पहुँचाती हैं।

धमनी, शिरा और केशिका की तुलना

तीनों वाहिकाओं की बनावट उनके काम के हिसाब से ढली है। धमनी को हृदय का पूरा धक्का सहना पड़ता है, इसलिए वह मोटी और लचीली है। शिरा पर दाब कम है, इसलिए वह पतली है, पर रक्त पीछे न लौटे इसलिए भीतर वाल्व होते हैं। केशिका का काम आदान-प्रदान है, इसलिए उसकी दीवार जितनी पतली हो सकती है उतनी है।

विशेषताधमनीशिराकेशिका
रक्त जाता हैहृदय से दूरहृदय की ओरधमनी से शिरा की ओर
दीवारमोटी, पेशी व लचीले तंतु अधिकपतली, पेशी कमएक कोशिका मोटी
गुहा (भीतरी खाली स्थान)संकरीचौड़ीअत्यंत संकरी, एक बार में एक रक्त कोशिका
वाल्वनहीं (हृदय के निकास को छोड़कर)होते हैंनहीं
रक्त दाबअधिककमधमनी से कम, शिरा से अधिक
प्रवाह की गतितेज़, हर धड़कन के साथ झटकेमध्यम, सहजसबसे धीमी
मुख्य कार्यहृदय का धक्का आगे पहुँचानारक्त वापस लानागैस, पोषक पदार्थ और अपशिष्ट का आदान-प्रदान
रक्त का प्रकारप्रायः ऑक्सीजन-युक्त (फुफ्फुसीय धमनी को छोड़कर)प्रायः ऑक्सीजन-रहित (फुफ्फुसीय शिरा को छोड़कर)लंबाई के साथ बदलता है

एकल बनाम दोहरा परिसंचरण

सभी जंतुओं में परिसंचरण हमारे जैसा नहीं होता। मछली के हृदय में दो कक्ष होते हैं: एक आलिंद और एक निलय। निलय रक्त को क्लोम (गिल) में भेजता है, गिल से रक्त सीधा शरीर में जाता है, फिर हृदय में लौटता है। एक चक्कर में रक्त हृदय में केवल एक बार आता है, इसलिए यह एकल परिसंचरण है।

एकल परिसंचरण की कमज़ोरी यह है कि गिल की बारीक नलिकाओं से गुज़रते हुए रक्त का दाब बहुत गिर जाता है, इसलिए शरीर तक रक्त धीरे पहुँचता है। पक्षी और स्तनधारी गर्म रक्त वाले हैं और बहुत ऊर्जा खर्च करते हैं, उन्हें ऑक्सीजन जल्दी पहुँचानी होती है। इसलिए फेफड़ों के बाद रक्त फिर हृदय में आकर नया धक्का पाता है। यही दोहरे परिसंचरण का बड़ा लाभ है।

जंतुहृदय के कक्षपरिसंचरण का प्रकारऑक्सीजन-युक्त और ऑक्सीजन-रहित रक्त
मछलीदो (एक आलिंद, एक निलय)एकल परिसंचरणहृदय में केवल ऑक्सीजन-रहित रक्त
उभयचर (मेंढक)तीन (दो आलिंद, एक निलय)अपूर्ण दोहरा परिसंचरणनिलय में कुछ मिश्रण
सरीसृप (अधिकांश)तीन, निलय आंशिक रूप से बँटाअपूर्ण दोहरा परिसंचरणथोड़ा मिश्रण; मगरमच्छ में चार कक्ष
पक्षी व स्तनधारी (मनुष्य)चारपूर्ण दोहरा परिसंचरणदोनों प्रकार का रक्त कभी नहीं मिलता

हृदय निर्गम: हृदय का मिनट-भर का हिसाब

स्ट्रोक आयतन वह रक्त है जो एक निलय एक धड़कन में बाहर फेंकता है। हृदय गति प्रति मिनट धड़कनों की संख्या है। दोनों का गुणनफल बताता है कि हर मिनट कितना रक्त निकला, इसे हृदय निर्गम कहते हैं।

हृदय निर्गम = हृदय गति × स्ट्रोक आयतनइकाई: mL/min; 1000 से भाग देने पर L/min

स्ट्रोक आयतन = हृदय निर्गम ÷ हृदय गतिवही संबंध उलटकर

परिसंचरण समय = रक्त का आयतन ÷ हृदय निर्गमपूरा रक्त एक बार पंप होने में लगा समय

आराम करता वयस्क

एनिमेशन 72 बार/मिनट और 70 mL से शुरू होता है। गुणा कीजिए: 72 × 70 = 5,040 mL/min, यानी लगभग 5.04 L/min। पाठ्यपुस्तकों में इसे प्रायः गोल करके 5 लीटर प्रति मिनट कहा जाता है। स्वस्थ वयस्क की आराम की हृदय गति सामान्यतः 60 से 100 बार/मिनट के बीच रहती है।

निर्गम बढ़ाने के दो तरीके

हृदय के पास दो स्विच हैं: तेज़ धड़कना (गति बढ़ाना) या ज़ोर से धड़कना (स्ट्रोक आयतन बढ़ाना)। व्यायाम में दोनों बढ़ते हैं। प्रशिक्षित हृदय आराम में मुख्यतः स्ट्रोक आयतन वाला स्विच इस्तेमाल करता है, इसलिए कम धड़कनों में काम चल जाता है।

एनिमेशन में खुद करके देखिए

पाँच छोटे प्रयोग, हर एक मिनट का। पहले अनुमान लगाइए, फिर स्लाइडर चलाइए।

  • प्रयोग 1 (गति बढ़ाइए): स्ट्रोक आयतन 70 mL रखकर गति 60 से 150 तक ले जाइए। निर्गम कितने गुना हुआ? गति दोगुनी तो निर्गम भी दोगुना, क्योंकि सूत्र सीधा गुणनफल है।
  • प्रयोग 2 (स्ट्रोक आयतन बढ़ाइए): गति 72 पर रखकर स्ट्रोक आयतन 70 से 110 mL कीजिए। कणों की संख्या बढ़ती है, गति नहीं बदलती। निर्गम बढ़ता है, पर हर कण की चाल पहले जैसी रहती है।
  • प्रयोग 3 (तीन अवस्थाएँ): आराम, व्यायाम और प्रशिक्षित खिलाड़ी बारी-बारी चुनिए। व्यायाम में निर्गम लगभग 3.3 गुना हो जाता है। खिलाड़ी की गति सिर्फ़ 50 है, फिर भी निर्गम लगभग 5.0 L/min है।
  • प्रयोग 4 (एक चक्र पर नज़र): फुफ्फुसीय चुनकर एक कण का पीछा कीजिए, वह नीले से लाल कहाँ होता है? फिर दैहिक चुनकर वही कण देखिए। लाल से नीला कहाँ होता है?
  • प्रयोग 5 (गति बनाम वाहिका): धमनी-शिरा-केशिका विकल्प चालू रखकर देखिए कि कण कहाँ धीमे पड़ते हैं। अब उसे बंद कीजिए: हर जगह गति एक-सी हो जाती है, जो असली शरीर में नहीं होता।

हल सहित प्रश्न

हर प्रश्न की संख्याएँ एनिमेशन के अपने मानों से निकली हैं। हल पढ़ने से पहले खुद करके देखिए।

प्रश्न 1: हृदय निर्गम निकालिए

किसी व्यक्ति की हृदय गति 80 बार/मिनट और स्ट्रोक आयतन 65 mL है। हृदय निर्गम कितना है?

80 × 65 = 5,200 mL/min = 5.2 L/min

प्रश्न 2: स्ट्रोक आयतन निकालिए

हृदय निर्गम 4.8 L/min और हृदय गति 60 बार/मिनट हो तो स्ट्रोक आयतन कितना है?

4,800 ÷ 60 = 80 mL

प्रश्न 3: हृदय गति निकालिए

निर्गम 6 L/min और स्ट्रोक आयतन 75 mL हो तो हृदय गति कितनी है?

6,000 ÷ 75 = 80 बार/मिनट

प्रश्न 4: एक दिन में हृदय कितना रक्त पंप करता है?

एनिमेशन के मान लीजिए: 72 बार/मिनट और 70 mL। एक दिन में 1,440 मिनट होते हैं।

5.04 L/min × 1,440 मिनट ≈ 7,258 Lहर दिन लगभग सात हज़ार लीटर

72 × 1,440 = 1,03,680 धड़कनेंउसी दिन की धड़कनों की संख्या

प्रश्न 5: जीवन भर में कितनी धड़कनें?

इसी गति से 70 वर्ष जीने पर कुल धड़कनें कितनी होंगी?

1,03,680 × 365 = 3,78,43,200 धड़कनें/वर्ष

3,78,43,200 × 70 ≈ 2,64,90,24,000लगभग 2.65 अरब बार, बिना रुके

प्रश्न 6: पूरे रक्त को एक बार घूमने में कितना समय लगता है?

शरीर में रक्त 5,000 mL मान लीजिए। आराम में निर्गम 5,040 mL/min है। व्यायाम (150 बार/मिनट, 110 mL) में कितना?

5,000 ÷ 5,040 × 60 ≈ 59.5 सेकंडआराम में लगभग एक मिनट

5,000 ÷ (150 × 110) × 60 ≈ 18.2 सेकंडव्यायाम में केवल कुछ सेकंड

प्रश्न 7: खिलाड़ी का हृदय कितनी धड़कनें बचाता है?

साधारण व्यक्ति की गति 72 है और प्रशिक्षित खिलाड़ी की 50 (स्ट्रोक आयतन 100 mL)। निर्गम और प्रतिदिन की धड़कनों की तुलना कीजिए।

50 × 100 ÷ 1,000 = 5.0 L/minसाधारण व्यक्ति के लगभग बराबर

(72 − 50) × 1,440 = 31,680 धड़कनेंखिलाड़ी के दिन में इतनी कम धड़कनें

वे ग़लतियाँ जो सब करते हैं

ये भूलें उत्तर-पुस्तिका में सबसे ज़्यादा अंक कटवाती हैं। हर एक के साथ सही बात भी लिखी है।

  • ग़लत: धमनी में हमेशा ऑक्सीजन-युक्त रक्त होता है। सही: धमनी का अर्थ है हृदय से दूर ले जाने वाली वाहिका। फुफ्फुसीय धमनी ऑक्सीजन-रहित रक्त ले जाती है!
  • ग़लत: शिरा में हमेशा ऑक्सीजन-रहित रक्त होता है। सही: फुफ्फुसीय शिराएँ ऑक्सीजन-युक्त रक्त बाएँ आलिंद में लाती हैं।
  • ग़लत: दोहरे परिसंचरण का मतलब दो हृदय। सही: हृदय एक ही है, पर रक्त हर चक्कर में उससे दो बार गुज़रता है।
  • ग़लत: शरीर के लिए गैस विनिमय केवल फेफड़ों में होता है। सही: फेफड़ों में विनिमय वायुकोश की केशिकाओं में होता है, और ऊतकों का विनिमय अलग, दैहिक केशिकाओं में।
  • ग़लत: शिराओं का रक्त नीला होता है। सही: ऑक्सीजन-रहित रक्त गहरा लाल होता है। चित्रों में नीला रंग केवल दोनों में भेद दिखाने के लिए है।
  • ग़लत: केशिका की दीवार में पेशी होती है। सही: दीवार चपटी कोशिकाओं की एक परत है, उसमें न पेशी है न वाल्व।
  • ग़लत: हृदय गति बढ़ने से निर्गम हमेशा बढ़ता है। सही: बहुत तेज़ गति पर निलय को भरने का समय नहीं मिलता, स्ट्रोक आयतन घट जाता है और निर्गम बढ़ना रुक जाता है।

वास्तविक जीवन से जुड़ाव

रक्त दाब नापने का अर्थ है धमनी में दाब नापना। दो संख्याएँ लिखी जाती हैं, जैसे 120/80 mm Hg (पाठ्यपुस्तक का अनुमानित मान): पहली निलय के सिकुड़ने के समय का दाब है, दूसरी शिथिल अवस्था का। फुफ्फुसीय धमनी का दाब कहीं कम है, लगभग 25/8 mm Hg, क्योंकि फेफड़े हृदय के पास हैं और उनकी वाहिकाएँ कोमल हैं। इसी कारण दाएँ निलय की दीवार बाएँ से पतली होती है।

कलाई पर जो नाड़ी महसूस होती है, वह धमनी का फूलना और सिकुड़ना है। धमनियाँ लचीली हैं, इसलिए हर धड़कन पर थोड़ी फैलती हैं। शिरा में नाड़ी महसूस नहीं होती, क्योंकि वहाँ तक धड़कन का झटका मंद पड़ चुका होता है। टाँगों की शिराओं में रक्त पेशियों के दबाव और वाल्वों की मदद से ऊपर चढ़ता है; घंटों बिना हिले खड़े रहने पर पैर सूज सकते हैं।

व्यायाम में पेशियों को अधिक ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए हृदय गति और स्ट्रोक आयतन दोनों बढ़ते हैं। नियमित व्यायाम से हृदय की पेशी मज़बूत होती है, स्ट्रोक आयतन बढ़ता है और आराम की गति घटती है। इसीलिए चिकित्सक पैदल चलने और साइकिल चलाने जैसे व्यायाम को प्रोत्साहित करते हैं।

जब वसा जमने से धमनी संकरी हो जाती है तो रक्त प्रवाह घटता है। यह कोरोनरी धमनी में हो तो हृदय की पेशी को ऑक्सीजन कम मिलती है, जिसका चरम रूप हृदयाघात है। उच्च रक्त दाब, धूम्रपान और वसायुक्त भोजन जोखिम बढ़ाते हैं। यह सामान्य जानकारी है, चिकित्सकीय सलाह नहीं; अस्वस्थ लगे तो चिकित्सक से मिलिए।

लाल रक्त कोशिका लगभग 120 दिन जीती है, यानी एक कोशिका अपने जीवन में कई लाख चक्कर लगाती है। हर चक्कर में वह फेफड़ों में ऑक्सीजन भरती है और ऊतकों में उतार देती है।

परीक्षा कोना (CBSE / NCERT)

ये प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। जहाँ संभव हो नामांकित चित्र बनाइए, उससे अंक मिलते हैं। कक्षा 10 के “जैव प्रक्रम” और कक्षा 11 के “शरीर द्रव तथा परिसंचरण” अध्याय में यही विषय आता है।

  • दोहरा परिसंचरण क्या है? लिखिए: वह परिसंचरण जिसमें एक पूरे चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुज़रता है।
  • धमनी और शिरा में पाँच अंतर लिखिए: दीवार, गुहा, वाल्व, प्रवाह की दिशा और रक्त दाब।
  • फुफ्फुसीय और दैहिक परिसंचरण में अंतर कीजिए: आरंभ और अंत, वाहिकाएँ, रक्त का प्रकार, कार्य।
  • चित्र सहित रक्त के पथ का वर्णन कीजिए, दाएँ आलिंद से शुरू करके उसी पर लौटिए।
  • केशिकाओं का कार्य लिखिए और बताइए कि उनकी दीवार इतनी पतली क्यों है।
  • 80 बार/मिनट और 65 mL स्ट्रोक आयतन के लिए हृदय निर्गम निकालिए। (उत्तर: 5.2 L/min)
  • बाएँ निलय की दीवार दाएँ निलय से मोटी क्यों होती है?

एक मिनट का पुनरावर्तन

परीक्षा से पहले की रात बस यह सूची एक बार पढ़ लीजिए।

  • रक्त बंद वाहिकाओं में हृदय के धक्के से घूमता है; इसे परिसंचरण कहते हैं।
  • मनुष्य का परिसंचरण दोहरा है: एक हृदय, दो चक्र, चार कक्ष।
  • फुफ्फुसीय चक्र: दायाँ निलय, फुफ्फुसीय धमनी, फुफ्फुस, फुफ्फुसीय शिराएँ, बायाँ आलिंद।
  • दैहिक चक्र: बायाँ निलय, महाधमनी, शरीर के ऊतक, महाशिरा, दायाँ आलिंद।
  • धमनियाँ रक्त को दूर ले जाती हैं, शिराएँ वापस लाती हैं, और आदान-प्रदान केशिकाओं में होता है।
  • फुफ्फुसीय धमनी ऑक्सीजन-रहित और फुफ्फुसीय शिराएँ ऑक्सीजन-युक्त रक्त ले जाती हैं।
  • हृदय निर्गम = हृदय गति × स्ट्रोक आयतन, आराम में लगभग 5 L/min।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्त परिसंचरण किसे कहते हैं?

हृदय के पंप के दबाव से रक्त का बंद रक्त वाहिकाओं में चक्राकार घूमना, जिससे ऊतकों तक ऑक्सीजन व पोषक पदार्थ पहुँचते हैं और अपशिष्ट हटते हैं, रक्त परिसंचरण कहलाता है।

मनुष्य के परिसंचरण को दोहरा परिसंचरण क्यों कहते हैं?

क्योंकि एक पूरे चक्कर में रक्त हृदय से दो बार गुज़रता है: एक बार दाएँ भाग से होकर फेफड़ों के लिए और एक बार बाएँ भाग से होकर पूरे शरीर के लिए।

फुफ्फुसीय धमनी में कौन-सा रक्त होता है?

ऑक्सीजन-रहित रक्त। यह दाएँ निलय से फेफड़ों तक रक्त ले जाती है और धमनी इसलिए कहलाती है कि हृदय से रक्त को दूर ले जाती है।

फुफ्फुसीय शिरा और महाशिरा में क्या अंतर है?

फुफ्फुसीय शिराएँ फेफड़ों से ऑक्सीजन-युक्त रक्त बाएँ आलिंद में लाती हैं। महाशिरा शरीर से ऑक्सीजन-रहित रक्त दाएँ आलिंद में लाती है।

केशिकाओं की दीवार इतनी पतली क्यों होती है?

क्योंकि गैसों और पोषक पदार्थों का आदान-प्रदान इसी से होता है। एक कोशिका मोटी दीवार से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है, इसलिए विनिमय तेज़ होता है।

हृदय निर्गम का सूत्र क्या है?

हृदय निर्गम = हृदय गति × स्ट्रोक आयतन। जैसे 72 बार/मिनट और 70 mL पर 5,040 mL/min, यानी लगभग 5.04 L/min।

धमनी की दीवार शिरा से मोटी क्यों होती है?

क्योंकि धमनी को हृदय का तेज़ धक्का और उच्च दाब सहना पड़ता है। शिरा में रक्त कम दाब पर बहता है, इसलिए दीवार पतली है और पीछे लौटने से रोकने के लिए वाल्व होते हैं।

बाएँ निलय की दीवार दाएँ निलय से मोटी क्यों है?

बाएँ निलय को पूरे शरीर में रक्त धकेलना पड़ता है, जिसके लिए उच्च दाब चाहिए। दायाँ निलय पास के फेफड़ों तक ही रक्त भेजता है, जहाँ बहुत कम दाब पर्याप्त है।

हृदय के वाल्व और हृदय चक्र कहाँ देखूँ?

वे अलग “मानव हृदय” एनिमेशन में विस्तार से दिए गए हैं। इस पन्ने पर आप हृदय के बाहर का रक्त पथ, दो चक्र और हृदय निर्गम देख रहे हैं।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

जीव विज्ञान के और एनिमेशन

कक्षा 9 · 11

समसूत्री कोशिका विभाजन

समसूत्री विभाजन किसे कहते हैं? पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था और कोशिकाद्रव्य विभाजन को चलते एनिमेशन में देखें, गुणसूत्र गिनने के नियम और हल किए गए प्रश्नों के साथ।

कक्षा 9 · 11

विसरण और परासरण

विसरण और परासरण क्या है, इनमें अंतर, जीवद्रव्यकुंचन, स्फीति और अंतःशोषण: कणों के लाइव सिमुलेशन से आसान भाषा में समझें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ।

कक्षा 7 · 10 · 11

प्रकाश संश्लेषण

प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं, इसका समीकरण, प्रकाश और अप्रकाशी अभिक्रिया, केल्विन चक्र और प्रभावित करने वाले कारक: पत्ती और हाइड्रिला के सिमुलेशन में खुद देखें।

कक्षा 10 · 11

मानव हृदय की संरचना और कार्य

हृदय के चार कक्ष, कपाट, लब-डब ध्वनि और चलता ईसीजी एक साथ देखें। दोहरा परिसंचरण, हृद चक्र और हृद निकास हल किए गए प्रश्नों के साथ समझें (कक्षा 10, 11, NEET)।

कक्षा 10 · 12

मेंडल के आनुवंशिकता नियम

मेंडल के नियम, एकसंकर व द्विसंकर संकरण, परीक्षार्थ संकरण, अपूर्ण प्रभाविता, रक्त समूह सहप्रभाविता और लिंग निर्धारण — खुद पनेट वर्ग बनाकर हर अनुपात लाइव देखें।

कक्षा 12

डीएनए प्रतिकृति

डीएनए प्रतिकृति क्या है, अर्धसंरक्षी सिद्धांत, प्रतिकृति एंज़ाइमों का काम और मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग को सिमुलेशन में स्वयं देखें और हिसाब लगाएँ।

कक्षा 10 · 11

कोशिकीय श्वसन

कोशिकीय श्वसन क्या है, वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर, ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र, इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र और ATP की गणना: सूत्रकणिका के सिमुलेशन में स्वयं देखें और गिनें।

कक्षा 10 · 11

एंजाइम क्रिया

एंजाइम क्या है, सक्रिय स्थल, ताला-चाबी व प्रेरित संग्रहण मॉडल, तापमान-pH का प्रभाव, मिकेलिस-मेंटन समीकरण और संदमक — लाइव सिमुलेशन में खुद बदलकर देखें।

कक्षा 10 · 11

तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल

देहली मान (-55 mV) पार करते ही एक्शन पोटेंशियल बनता है और अक्षतंतु में दौड़ता है — सतत या साल्टेटरी — फिर सिनेप्स पर न्यूरोट्रांसमीटर मुक्त होता है, सूत्रों सहित।

कक्षा 10 · 11

नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया

वृक्क रोज़ाना लगभग 180 लीटर तरल छानकर भी मूत्र सिर्फ़ लगभग 1.50 लीटर क्यों बनाता है? छानना, पुनः अवशोषण और ग्लूकोज़ की देहली मात्रा — सिमुलेशन में खुद आज़माएँ, सूत्रों सहित।

कक्षा 9 · 11

अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)

अर्धसूत्री विभाजन किसे कहते हैं, क्रॉसिंग ओवर क्या है, समसूत्री विभाजन से यह कैसे अलग है — 2n = 4 कोशिका में पूर्वावस्था I से अंत्यावस्था II तक स्वयं चलाकर देखें।

कक्षा 10 · 11

पाचन तंत्र

पाचन तंत्र क्या है, कौन-सा एंजाइम कहाँ काम करता है, विलाई कैसे अवशोषित करती हैं — मुँह से बड़ी आँत तक भोजन की यात्रा स्वयं चलाकर देखें।

कक्षा 10 · 11

श्वसन क्रियाविधि: अंतःश्वसन और उच्छ्वसन

डायाफ्राम, पसलियाँ और अंतरापर्शुक पेशियाँ फुफ्फुस में हवा कैसे भरती और निकालती हैं, एनिमेशन में देखें। दाब मापक, स्पाइरोमीटर आलेख, बेल जार मॉडल और कूपिका में गैसों का विनिमय, हल प्रश्नों सहित।

कक्षा 12

प्रोटीन संश्लेषण

आरएनए पोलीमरेज़ जीन से mRNA कैसे बनाता है और राइबोसोम कोडोन पढ़कर प्रोटीन कैसे जोड़ता है, एनिमेशन में खुद देखें। जीन बदलें, उत्परिवर्तन करें, कोडोन सारणी मिलाएँ।

कक्षा 9

कोशिका की संरचना और कोशिकांग: पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका

पादप कोशिका और जंतु कोशिका को साथ-साथ देखिए। केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवक, गॉल्जी उपकरण, राइबोसोम पर क्लिक करके हर भाग का कार्य जानिए। अंतर की तालिका, आवर्धन के प्रश्न और परीक्षा के सवाल सहित।

कक्षा 10

प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप

गर्म चीज़ छूने पर संकेत ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु, प्रेरक तंत्रिका से होकर पेशी तक कैसे पहुँचता है, खुद चलाकर देखें। प्रतिवर्त का समय (24.33 ms) निकालें और जानें कि दर्द बाद में क्यों होता है।

कक्षा 10 · 11

मानव नेत्र: संरचना, प्रतिबिंब और समंजन

स्वच्छमंडल, परितारिका, लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ, दृष्टिपटल, पीत बिंदु और अंध बिंदु कैसे काम करते हैं, चलते चित्र में देखें। समंजन, निकट-दृष्टि और दीर्घ-दृष्टि दोष, लेंस क्षमता के हल सहित।

कक्षा 11 · 12

पेशी संकुचन और स्लाइडिंग-फ़िलामेंट मॉडल

सार्कोमियर में एक्टिन और मायोसिन को सरकते देखें। ए बैंड 1.6 µm ही रहता है, जबकि आई बैंड और एच क्षेत्र घटते हैं। क्रॉस-ब्रिज चक्र, कैल्शियम और एटीपी चरण-दर-चरण समझें।

कक्षा 10 · 11

पौधों में परिवहन: जाइलम, फ्लोएम और वाष्पोत्सर्जन

देखें कि जाइलम में पानी कैसे ऊपर चढ़ता है और फ्लोएम में शर्करा कैसे नीचे जाती है। प्रकाश, आर्द्रता और हवा बदलकर वाष्पोत्सर्जन की दर (54.8 g/m²/h) निकालें।

कक्षा 10 · 12

खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल: ऊर्जा प्रवाह और 10 % नियम

खाद्य जाल बनाएँ, एक प्रजाति हटाकर असर देखें और ऊर्जा पिरामिड पर 10% नियम चलाएँ (उत्पादकों की 10,000 kJ से शीर्ष पर बचती है केवल 1 kJ)।

कक्षा 11 · 12

जनसंख्या वृद्धि: चरघातांकी और लॉजिस्टिक वक्र

r और वहन क्षमता K खींचें और चरघातांकी व लॉजिस्टिक वक्रों को अलग होते देखें। r = 0.40 प्रति घंटा और K = 1,000 पर कल्चर हर 1.73 घंटे में दोगुना होता है और K के पास रुक जाता है।

कक्षा 11 · 12

प्राकृतिक चयन: पेप्पर्ड मॉथ और कालिख वाला पेड़

कालिख का स्तर बदलकर देखिए कि पक्षी कौन-सा मॉथ पकड़ते हैं। 80% कालिख और 40% चयन पर गहरे मॉथ 10% से 15 पीढ़ियों में 90% से ऊपर पहुँच जाते हैं।

कक्षा 10 · 12

प्रतिरक्षा अनुक्रिया: प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिपिंड अनुक्रिया

टीका लगे और बिना टीके वाले व्यक्ति के प्रतिपिंड स्तर एक ग्राफ़ पर मिलाइए। इस मॉडल में स्मृति से सुरक्षा पाने का समय 8.1 से घटकर 2.5 दिन रह जाता है और शिखर 5.1 गुना ऊँचा होता है।

कक्षा 12

परागण और निषेचन

परागकोश से वर्तिकाग्र, परागनलिका से होकर बीजांड तक पराग की यात्रा देखें। द्विनिषेचन में 14 गुणसूत्र का युग्मनज और 21 गुणसूत्र का भ्रूणपोष कैसे बनता है, फिर बीज और फल।

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भौतिकी

प्रकाश का अपवर्तन

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ओम का नियम

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प्रक्षेप्य गति

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सरल लोलक

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विद्युत क्षेत्र

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तरंगों का व्यतिकरण

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मुक्त पतन

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लेंस द्वारा प्रतिबिंब

भौतिकी

न्यूटन के गति के नियम

भौतिकी

गोलीय दर्पण किरण आरेख

भौतिकी

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

भौतिकी

संवेग संरक्षण और संघट्ट

भौतिकी

कार्य, ऊर्जा और शक्ति

भौतिकी

आनत तल

भौतिकी

एकसमान वृत्तीय गति

भौतिकी

अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंग

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उत्तोलक और आघूर्ण

भौतिकी

द्रव्यमान केंद्र

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कमानी-द्रव्यमान की सरल आवर्त गति

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सदिशों का योग: त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम

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सापेक्ष वेग: रेलगाड़ियाँ और नदी पार करना

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केपलर के नियम और दीर्घवृत्ताकार कक्षा

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न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, g और उपग्रह

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तार और नलियों में अप्रगामी तरंगें

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अनुनाद नली और ध्वनि की चाल

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विस्पंद: दो पास-पास के सुरों की धड़कन

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डॉप्लर प्रभाव: चलता स्रोत, चलता श्रोता और सोनिक बूम

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प्रिज़्म, प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण और इंद्रधनुष

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किरख़ोफ़ के नियम: संधि नियम और लूप नियम

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व्हीटस्टोन सेतु और मीटर सेतु

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एकल झिरी से विवर्तन

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आँख के दोष और उनका निवारण

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प्रकाश का ध्रुवण: मैलस का नियम और ब्रूस्टर का नियम

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संधारित्र का आवेशन और विसर्जन: RC समय स्थिरांक

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चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: छड़ चुंबक, धारावाही तार और परिनालिका

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एसी जनित्र

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ट्रांसफ़ॉर्मर

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ऊष्मा का स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण

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प्रकाश-विद्युत प्रभाव: आइंस्टाइन का समीकरण और निरोधी विभव

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मोटर प्रभाव: धारावाही तार पर बल और डीसी मोटर

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गैस के अणु और अणुगति सिद्धांत: दाब, तापमान और चाल

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अर्धचालक डायोड: p–n संधि, I–V वक्र और दिष्टकारी

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रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता

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बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम

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परमाणु की संरचना

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गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT

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आयनिक बंध कैसे बनता है

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मोल अवधारणा: मोलर द्रव्यमान, आवोगाद्रो संख्या और मोलर आयतन

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रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास

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रासायनिक साम्य: साम्य स्थिरांक Kc और ले शातेलिए का सिद्धांत

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अनुमापन: ब्यूरेट और सूचक से अज्ञात सांद्रता निकालना

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गैल्वेनिक सेल: डेनियल सेल, EMF और नर्स्ट समीकरण

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ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ: ऑक्सीकरण संख्या, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और अर्ध-अभिक्रिया

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हाइड्रोकार्बन: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और संरचनात्मक समावयवी 3D में

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प्रकार्यात्मक समूह: ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन

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बहुलकीकरण: योगात्मक और संघनन बहुलक, पॉलिथीन और नायलॉन

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मिश्रण अलग करने की विधियाँ: निस्यंदन, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, क्रिस्टलन

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क्रिस्टल जालक: SC, BCC और FCC एकक कोष्ठिका, संकुलन क्षमता और घनत्व

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रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु

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पाइथागोरस प्रमेय

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त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त

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द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़

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वृत्त के प्रमेय

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ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण

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प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता

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समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी

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माध्य, माध्यिका और बहुलक

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समुच्चय और वेन आरेख

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रैखिक समीकरण युग्म और सरल रेखा का आलेख

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sin, cos, tan के आलेख

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पूर्ण वर्ग बनाने की विधि और द्विघात समीकरण

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वृत्त का क्षेत्रफल: सूत्र, उपपत्ति और हल किए प्रश्न

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ठोस का आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल: घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला

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समरूप त्रिभुज: स्केल गुणक, AA, SSS, SAS नियम और छाया से ऊँचाई

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निर्देशांक ज्यामिति: दूरी, मध्य-बिंदु, ढाल, विभाजन सूत्र और बिंदुपथ

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शांकव परिच्छेद: वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय

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फलनों का रूपांतरण: खिसकाना, खींचना और पलटना

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अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक

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रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल

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सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए

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त्रिविमीय सदिश: योग, डॉट गुणन और क्रॉस गुणन

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आव्यूह रूपांतरण: घूर्णन, परावर्तन, अपरूपण और सारणिक

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सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल

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बाइनरी संख्या पद्धति: स्थानीय मान, रूपांतरण और जोड़