कैनवास पर खींचकर भार या आयास की जगह बदलें
नियंत्रण
उत्तोलक का वर्ग
मापन
- वामावर्त आघूर्ण
- 120.0N·m
- दक्षिणावर्त आघूर्ण
- 120.0N·m
- परिणामी आघूर्ण
- 0.0N·m
- संतुलन के लिए आयास
- 40.0N
- यांत्रिक लाभ, भार ÷ आयास
- 1.50
- भुजाओं का अनुपात, d₂ ÷ d₁
- 1.50
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- “प्रथम वर्ग” चुने रहने पर शुरुआती मान देखें: 60 N, 2 m पर और 40 N, 3 m पर। दोनों आघूर्ण बराबर हैं, इसलिए छड़ क्षैतिज रहती है।
- आयास भुजा का स्लाइडर खिसकाएँ या कैनवास पर आयास के तीर को खींचें। दो रंगीन पट्टियाँ आघूर्ण दिखाती हैं और छड़ बड़े आघूर्ण की ओर झुकती है।
- आयास का बल बदलकर संतुलन वापस लाएँ, फिर “संतुलन के लिए आयास” के मान से अपना हिसाब मिलाएँ।
- अब द्वितीय और तृतीय वर्ग चुनें। मापन पैनल में देखें कि किसमें यांत्रिक लाभ 1 से अधिक है और किसमें 1 से कम।
खेल के मैदान का एक राज़
आप कभी सी-सॉ पर ज़रूर बैठे होंगे। आप भारी हैं, दोस्त हल्का। आप बैठते हैं तो आपका सिरा ज़मीन से लग जाता है और दोस्त हवा में लटक जाता है। तो दोनों को क्षैतिज कैसे रखें? एक तरीका: आप धुरी की ओर खिसक जाएँ और दोस्त आख़िरी सिरे पर रहे। तब हल्का व्यक्ति भी भारी को उठा लेता है।
यही चाल हर जगह दिखती है: बड़े पत्थर को हटाती उत्तोलक छड़, बोतल खोलने वाला ओपनर, ठेला। कोई यह नहीं कहता, “और ज़ोर लगाओ।” सब कहते हैं, “थोड़ा और दूर से पकड़ो।” असली चाबी दूरी है।
इस पाठ में हम उस चाबी का नाम सीखेंगे: बल का आघूर्ण। सूत्र बस एक है, M = F × d, पर इसी में सी-सॉ, कैंची, ठेला, सरौता और हमारी अपनी भुजा की बनावट तक छिपी है।
शुरुआत से: धक्का कब किसी चीज़ को घुमाता है?
दरवाज़े को कब्ज़े के पास धकेलकर खोलने की कोशिश करें। कितनी मेहनत लगती है! वही दरवाज़ा हैंडल पर, कब्ज़े से सबसे दूर, एक उँगली से खुल जाता है। बल वही है, नतीजा अलग। घुमाने की क्षमता बल पर भी निर्भर करती है और इस पर भी कि बल धुरी से कितनी दूर लगाया गया।
धुरी या आलंब वह बिंदु है जो हिलता नहीं: दरवाज़े का कब्ज़ा, सी-सॉ के बीच का खंभा। बल की रेखा इस बिंदु से जितनी दूर होगी, वस्तु उतनी अधिक घूमेगी। और यदि बल की रेखा ठीक धुरी से गुज़रे तो वह कुछ भी नहीं घुमाती। कब्ज़े पर सीधे धक्का दें तो दरवाज़ा नहीं खुलता।
भौतिक विज्ञानी बल और दूरी की इस साझा क्षमता को एक राशि में बाँधते हैं: बल का आघूर्ण। यह घुमाने की प्रवृत्ति का माप है, ठीक वैसे जैसे बल त्वरित करने की प्रवृत्ति का माप है।
घूर्णन के दो रुख़ होते हैं: घड़ी की दिशा में (दक्षिणावर्त) और उल्टी दिशा में (वामावर्त)। कई आघूर्ण जोड़ने के लिए हर रुख़ को अलग चिह्न देना पड़ता है। सिमुलेशन में हमने दोनों रुख़ दो अलग पट्टियों में दिखाए हैं ताकि तुलना आसान रहे।
वे शब्द जो आपको आने ही चाहिए
उत्तोलक के अध्याय में प्रश्नकर्ता यही शब्द बार-बार उपयोग करते हैं। हर शब्द का अर्थ और एक जाना-पहचाना उदाहरण साथ रखें।
| शब्द | सरल अर्थ | जाना-पहचाना उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्तोलक | स्थिर बिंदु के चारों ओर घूमने वाली दृढ़ छड़ | सी-सॉ, उत्तोलक छड़, ढेंकी |
| आलंब | वह बिंदु जिस पर छड़ घूमती है | सी-सॉ का बीच का खंभा, दरवाज़े का कब्ज़ा |
| भार | जिसे उठाना या हटाना है | चट्टान, ठेले में रेत |
| आयास | भार को सँभालने के लिए हमारा लगाया बल | छड़ पर हाथ का दबाव |
| भार भुजा | आलंब से भार की क्रिया रेखा तक लंबवत दूरी | उत्तोलक छड़ का छोटा सिरा |
| आयास भुजा | आलंब से आयास की क्रिया रेखा तक लंबवत दूरी | उत्तोलक छड़ का लंबा हैंडल |
| बल का आघूर्ण | बल × लंबवत दूरी, मात्रक N·m | रिंच से नट कसना |
| यांत्रिक लाभ | भार ÷ आयास, कोई मात्रक नहीं | 1 से अधिक हो तो छोटे बल से बड़ा भार हिलता है |
| गुरुत्व केंद्र | वह बिंदु जहाँ पूरा भार क्रियाशील माना जाता है | एकसमान तख़्ते का ठीक बीच |
सूत्र कहाँ से आया: आघूर्ण की परिभाषा
एक धुरी O लीजिए। एक बल F इस प्रकार लगता है कि O से उसकी क्रिया रेखा की लंबवत दूरी d है। यही d बल की भुजा है। परिभाषा के अनुसार बल का आघूर्ण बल और भुजा का गुणनफल है।
सी-सॉ में छड़ क्षैतिज है और भार सीधे नीचे खींचता है, इसलिए छड़ के अनुदिश मापी गई दूरी ही लंबवत दूरी है। छड़ झुक जाए तो बल रेखा ऊर्ध्वाधर ही रहती है, पर लंबवत दूरी cosθ गुना घट जाती है। सिमुलेशन में झुकाव छोटा है, इसलिए सरल सूत्र पर्याप्त है।
मात्रक सूत्र से ही मिल जाता है: न्यूटन गुणा मीटर, N·m। यह जूल जैसा दिखता है, पर दोनों अलग हैं। जूल ऊर्जा और कार्य मापता है। आघूर्ण घुमाने की प्रवृत्ति मापता है, इसलिए N·m ही लिखें।
M = F × dआघूर्ण = बल × धुरी से लंबवत दूरी
[M] = N·mमात्रक की जाँच, न्यूटन गुणा मीटर
M′ = F × d × cosθछड़ क्षैतिज से θ झुकी हो तो प्रभावी भुजा
आघूर्णों का सिद्धांत: संतुलन की एक ही शर्त
जब किसी वस्तु पर कई बल लगते हैं तो हर बल उसे अपने ढंग से घुमाना चाहता है, कोई वामावर्त, कोई दक्षिणावर्त। यदि सारे प्रयास कटकर शून्य हो जाएँ तो वस्तु नहीं घूमती। यही आघूर्णों का सिद्धांत है: घूर्णी संतुलन में किसी भी बिंदु के सापेक्ष वामावर्त आघूर्णों का योग दक्षिणावर्त आघूर्णों के योग के बराबर होता है।
सिमुलेशन की शुरुआती स्थिति में एक ओर 60 N का बल आलंब से 2 m दूर है और दूसरी ओर 40 N का बल 3 m दूर। पहला आघूर्ण 60 × 2 = 120 N·m है, दूसरा 40 × 3 = 120 N·m। दोनों बराबर हैं, इसलिए छड़ क्षैतिज है।
ध्यान दें कि सिद्धांत में छड़ के अपने भार की चर्चा नहीं है, क्योंकि हम मानते हैं कि छड़ इतनी हल्की है कि उसे अनदेखा किया जा सकता है। भारी एकसमान छड़ का भार उसके गुरुत्व केंद्र, यानी ठीक बीच, पर लगता है और उसे एक और बल की तरह जोड़ना पड़ता है। नीचे के हल किए गए प्रश्न में यही किया गया है।
एक बात और। छड़ संतुलित हो तो आलंब सभी नीचे वाले बलों के योग के बराबर ऊपर की ओर बल देता है। उस बल की भुजा शून्य है, इसलिए वह आघूर्ण के समीकरण में आता ही नहीं। इसी कारण आलंब को घूर्णन बिंदु चुनने पर हिसाब सबसे सरल होता है।
Σ M(वामावर्त) = Σ M(दक्षिणावर्त)आघूर्णों का सिद्धांत
W × d₁ = F × d₂एक उत्तोलक, दो बल: भार × भार भुजा = आयास × आयास भुजा
F = W × d₁ ÷ d₂संतुलन के लिए आवश्यक आयास
यांत्रिक लाभ: कम आयास में अधिक भार
संतुलन की शर्त को पलटकर लिखें तो भार ÷ आयास = आयास भुजा ÷ भार भुजा मिलता है। बाईं ओर का अनुपात यांत्रिक लाभ है। यह बताता है कि उत्तोलक ने हमारे आयास को कितने गुना बढ़ाया। दाईं ओर केवल ज्यामिति है, यानी दोनों भुजाओं की लंबाई।
मान लें भार 600 N है और उसकी भुजा 0.5 m। आयास भुजा जितनी लंबी करेंगे, आयास उतना घटेगा। नीचे की सारणी कोड में निकाली गई है, इसलिए हर पंक्ति सिमुलेशन में जाँची जा सकती है।
पर कुछ भी मुफ़्त नहीं मिलता। आयास भुजा जितनी लंबी, हाथ को उतनी ज़्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। ऊर्जा संरक्षण कहता है: कम बल, अधिक दूरी। आदर्श उत्तोलक में आयास द्वारा किया गया कार्य भार पर किए कार्य के बराबर होता है।
यांत्रिक लाभ = भार ÷ आयासपरिभाषा, कोई मात्रक नहीं
यांत्रिक लाभ = d₂ ÷ d₁आदर्श उत्तोलक में आयास भुजा ÷ भार भुजा
| आयास भुजा (m) | आवश्यक आयास (N) | यांत्रिक लाभ |
|---|---|---|
| 0.5 | 600 | 1.0 |
| 1.0 | 300 | 2.0 |
| 1.5 | 200 | 3.0 |
| 2.0 | 150 | 4.0 |
| 3.0 | 100 | 6.0 |
उत्तोलक के तीन वर्ग: बीच में कौन?
हर उत्तोलक में तीन चीज़ें होती हैं: आलंब, भार और आयास। बीच में कौन है, इससे वर्ग तय होता है। याद रखने का आसान तरीका: वर्ग 1, 2, 3 में बीच में क्रमशः आलंब, भार और आयास होता है।
प्रथम वर्ग: आलंब बीच में
एक ओर भार, दूसरी ओर आयास और बीच में आलंब। आयास नीचे दबाने पर भार ऊपर उठता है, यानी बल की दिशा पलट जाती है। सी-सॉ इसका जाना-पहचाना उदाहरण है। आलंब खिसकाने पर लाभ बदलता है: भार के पास रखें, जैसे उत्तोलक छड़ में, तो बड़ा लाभ मिलता है; दूर रखें तो लाभ घटता है।
द्वितीय वर्ग: भार बीच में
आलंब एक सिरे पर, भार बीच की ओर और आयास दूसरे सिरे पर। यहाँ आयास भुजा सदैव भार भुजा से लंबी होती है, इसलिए यांत्रिक लाभ हमेशा 1 से अधिक रहता है। ठेले में पहिये की धुरी आलंब है, रेत भार है और हैंडल पकड़े हाथ आयास हैं। हैंडल को ऊपर उठाने से भारी भार आसानी से उठ जाता है।
तृतीय वर्ग: आयास बीच में
आलंब एक सिरे पर, आयास बीच की ओर और भार दूर वाले सिरे पर। यहाँ आयास भुजा छोटी होती है, इसलिए यांत्रिक लाभ हमेशा 1 से कम रहता है: भार के वज़न से अधिक बल लगाना पड़ता है। फिर ऐसा उत्तोलक क्यों? क्योंकि बल में जो घाटा होता है वह गति और परास में मिल जाता है। आलंब के पास की छोटी हरकत भार को बड़े चाप में घुमा देती है। हमारी भुजा की पेशियाँ ठीक ऐसे ही काम करती हैं।
| वर्ग | बीच में | यांत्रिक लाभ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्रथम | आलंब | भुजाओं पर निर्भर: 1 से अधिक, बराबर या कम | सी-सॉ, कैंची, उत्तोलक छड़, तराज़ू |
| द्वितीय | भार | सदैव 1 से अधिक | ठेला, सरौता, बोतल खोलने का ओपनर |
| तृतीय | आयास | सदैव 1 से कम | चिमटी, मछली पकड़ने की छड़, अग्रबाहु |
सिमुलेशन में स्वयं करके देखें
हर प्रयोग में एक मिनट लगता है, पर एक बार स्वयं करने के बाद नियम भूलता नहीं। शुरुआती मानों से चलें।
- प्रयोग 1: प्रथम वर्ग में भार का बल दुगुना करें। छड़ किस ओर झुकी? अब आयास भुजा दुगुनी करके संतुलन लौटाएँ।
- प्रयोग 2: भार भुजा छोटी रखें और आयास भुजा लंबी करें, फिर “संतुलन के लिए आयास” पढ़ें। आयास घटता है और यांत्रिक लाभ बढ़ता है।
- प्रयोग 3: कैनवास पर आयास की जगह खींचकर बदलें। जिस क्षण दोनों पट्टियाँ बराबर होती हैं, छड़ रुक जाती है। वह दूरी मीटर में लिख लें।
- प्रयोग 4: द्वितीय वर्ग चुनें और आयास को भार से पास लाने की कोशिश करें। सिमुलेशन आधा मीटर का अंतर बनाए रखता है, क्योंकि तब वह द्वितीय वर्ग रहेगा ही नहीं।
- प्रयोग 5: तृतीय वर्ग में देखें कि यांत्रिक लाभ 1 से कम है। अपने शब्दों में लिखें कि संतुलन पर आयास का बल भार के बल से अधिक क्यों है।
- प्रयोग 6: “भुजाओं की लंबाई दिखाएँ” बंद करें और छड़ के निशानों से दूरी का अनुमान लगाएँ। फिर चालू करके जाँचें।
सी-सॉ का हिसाब जाँचें
नीचे की सारणी में चार जोड़ियों के आघूर्ण निकालकर रखे गए हैं। हर जोड़ी को सिमुलेशन में लगाकर देखें कि नतीजा मेल खाता है या नहीं।
| बाएँ का बल (N) | बाएँ की दूरी (m) | दाएँ का बल (N) | दाएँ की दूरी (m) | बाएँ का आघूर्ण (N·m) | दाएँ का आघूर्ण (N·m) | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 60 | 2.0 | 40 | 3.0 | 120 | 120 | संतुलित |
| 60 | 2.0 | 40 | 2.0 | 120 | 80 | बायाँ सिरा नीचे |
| 30 | 3.0 | 40 | 3.0 | 90 | 120 | दायाँ सिरा नीचे |
| 50 | 1.5 | 25 | 3.0 | 75 | 75 | संतुलित |
हल किए गए प्रश्न
हर संख्या कोड में निकाली गई है। अगली पंक्ति पढ़ने से पहले हर चरण अपनी कॉपी में लिखें।
प्रश्न 1: दूसरा व्यक्ति कहाँ बैठे?
एक हल्के सी-सॉ पर 300 N भार का व्यक्ति धुरी से 1.5 m दूर बैठा है। संतुलन के लिए 450 N का व्यक्ति दूसरी ओर कहाँ बैठे?
पहला आघूर्ण 300 × 1.5 = 450 N·m है। संतुलन में दूसरी ओर भी 450 N·m चाहिए, इसलिए d = 450 ÷ 450 = 1.00 m। भारी व्यक्ति पास बैठता है।
प्रश्न 2: छड़ किस ओर घूमेगी?
धुरी के बाईं ओर 2 m पर 80 N का बल और दाईं ओर 3.5 m पर 50 N का बल नीचे की ओर लग रहा है। छड़ किस ओर घूमेगी और परिणामी आघूर्ण क्या है?
वामावर्त आघूर्ण: 80 × 2 = 160 N·m। दक्षिणावर्त आघूर्ण: 50 × 3.5 = 175 N·m। दक्षिणावर्त बड़ा है, इसलिए छड़ घड़ी की दिशा में घूमेगी और परिणामी आघूर्ण 175 − 160 = 15 N·m होगा। छोटा बल इसलिए जीता क्योंकि वह अधिक दूर था।
प्रश्न 3: उत्तोलक छड़ (प्रथम वर्ग)
एक उत्तोलक छड़ में भार आलंब से 0.2 m और हाथ 1.2 m दूर है। 1,200 N का भार उठाने के लिए कितना आयास चाहिए और यांत्रिक लाभ क्या है?
आयास = 1,200 × 0.2 ÷ 1.2 = 200 N। यांत्रिक लाभ = 1,200 ÷ 200 = 6। भार के छठे हिस्से के बल से ही काम हो गया।
प्रश्न 4: ठेला (द्वितीय वर्ग)
एक ठेले में 600 N रेत पहिये की धुरी से 0.6 m दूर है। हैंडल धुरी से 1.5 m दूर हैं। इसे उठाने के लिए हैंडल पर कितना ऊपर की ओर बल चाहिए?
धुरी के सापेक्ष आघूर्ण लें: आयास × 1.5 = 600 × 0.6। इसलिए आयास 240 N और यांत्रिक लाभ 2.5 है। 1 से अधिक, जैसा द्वितीय वर्ग में होना चाहिए।
प्रश्न 5: अग्रबाहु (तृतीय वर्ग)
कोहनी आलंब है। हाथ में 5 kg द्रव्यमान की गेंद कोहनी से 0.35 m दूर है और बाइसेप्स कोहनी से केवल 0.04 m दूर जुड़ी है। g = 9.8 m/s² लेकर बाइसेप्स का बल ज्ञात करें।
गेंद का भार 5 × 9.8 = 49 N। आयास = 49 × 0.35 ÷ 0.04 = 429 N। यांत्रिक लाभ 0.114 है, 1 से बहुत कम। पेशी गेंद के भार का 8.75 गुना बल लगाती है। शरीर बल गँवाकर गति और परास खरीदता है।
प्रश्न 6: भार वाला तख़्ता
4 m लंबे एकसमान तख़्ते का भार 120 N है और उसे बाएँ सिरे से 1.5 m पर टिकाया गया है। बाएँ सिरे पर 150 N का भार लटका है। तख़्ता क्षैतिज रखने के लिए दाएँ सिरे पर कितना भार लगाएँ?
तख़्ते का गुरुत्व केंद्र बीच में है, यानी धुरी से 0.5 m दाएँ। वामावर्त आघूर्ण: 150 × 1.5 = 225 N·m। तख़्ते का अपना दक्षिणावर्त आघूर्ण: 120 × 0.5 = 60 N·m। दायाँ सिरा धुरी से 2.5 m दूर है, इसलिए 225 = 60 + X × 2.5 से X = 66 N।
वे गलतियाँ जिनसे अंक कटते हैं
उत्तर-पुस्तिकाओं में हर साल वही कुछ गलतियाँ दिखती हैं। सूची पढ़कर अपनी गलतियाँ पहचान लें।
- दूरी का अर्थ धुरी से बल की क्रिया रेखा तक की लंबवत दूरी है, बल लगने के बिंदु तक की सीधी दूरी नहीं। तिरछा बल हो तो अंतर दिखता है।
- आघूर्ण का मात्रक N·m है, J नहीं। दोनों एक जैसे दिखते हैं पर अर्थ अलग हैं।
- सारी दूरियाँ एक ही धुरी से मापें। एक प्रश्न में दो धुरियाँ मिला देना सबसे आम चूक है।
- द्वितीय और तृतीय वर्ग को गड्डमड्ड करना। देखें कि बीच में कौन है: भार या आयास।
- यह सोचना कि यांत्रिक लाभ 1 से कम होना बुरा उत्तोलक है। तृतीय वर्ग में यह सामान्य है और बदले में गति मिलती है।
- एकसमान छड़ का अपना भार भूल जाना। उसे गुरुत्व केंद्र पर रखकर उसका आघूर्ण जोड़ें।
- रुख़ देखे बिना आघूर्ण जोड़ देना। वामावर्त और दक्षिणावर्त के चिह्न उलटे रखें।
रोज़मर्रा में छिपे उत्तोलक
एक बार पहचानना सीख लें तो उत्तोलक हर जगह मिलते हैं। कुछ नमूने:
- कैंची: दो प्रथम वर्ग के उत्तोलक जुड़े हुए, पेंच आलंब है।
- तराज़ू: बराबर भुजाओं वाला प्रथम वर्ग का उत्तोलक, दोनों पलड़ों के आघूर्ण बराबर होने पर संतुलित।
- बोतल खोलने का ओपनर: किनारा आलंब, ढक्कन भार और हाथ आयास, द्वितीय वर्ग।
- चिमटी: तृतीय वर्ग, नाज़ुक चीज़ों को हल्के से पकड़ने के लिए उपयुक्त।
- मछली पकड़ने की छड़: तृतीय वर्ग, हाथ की छोटी हरकत से सिरा बहुत दूर तक घूमता है।
- ढेंकी: चावल कूटने का पुराना प्रथम वर्ग का उत्तोलक, पैर से दबाने पर दूसरा सिरा उठता है।
- हमारा शरीर: सिर झुकाना प्रथम वर्ग, पंजों पर उठना द्वितीय वर्ग, बाँह मोड़ना तृतीय वर्ग।
परीक्षा कोना: CBSE और NCERT शैली
बोर्ड परीक्षा में परिभाषाएँ, संक्षिप्त व्युत्पत्ति और संख्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। एक विशिष्ट सेट देखें।
विशिष्ट प्रश्न
1 अंक: बल के आघूर्ण की परिभाषा लिखें और उसका SI मात्रक बताएँ।
2 अंक: आघूर्णों का सिद्धांत लिखें और इसका उपयोग करने वाला एक उपकरण बताएँ।
3 अंक: 300 N का भार आलंब से 1.5 m पर है। संतुलन के लिए 450 N का भार दूसरी ओर कितनी दूरी पर रखें? उत्तर: 450 ÷ 450 = 1.00 m।
5 अंक: नामांकित चित्र सहित उत्तोलकों को तीन वर्गों में बाँटें और प्रत्येक का एक उदाहरण दें। उनके यांत्रिक लाभ की तुलना करें।
पूरे अंक कैसे पाएँ
हर संख्यात्मक प्रश्न समीकरण से शुरू करें, मात्रक सहित मान रखें और उत्तर को चौखट में लिखें। गणना में चूक हो तब भी समीकरण के अंक मिलते हैं।
वर्गीकरण के प्रश्न में तीनों उत्तोलक साथ-साथ बनाएँ और F, L, E अंकित करें। साफ़ चित्र आधा उत्तर होता है।
त्वरित पुनरावृत्ति
परीक्षा से पहली रात इन कुछ पंक्तियों पर नज़र डाल लें।
- आघूर्ण M = F × d, मात्रक N·m, घुमाने की प्रवृत्ति का माप है।
- संतुलन में वामावर्त आघूर्णों का योग दक्षिणावर्त आघूर्णों के योग के बराबर होता है।
- उत्तोलक में W × d₁ = F × d₂ और यांत्रिक लाभ = भार ÷ आयास = d₂ ÷ d₁।
- वर्ग 1 में बीच में आलंब, वर्ग 2 में भार, वर्ग 3 में आयास।
- द्वितीय वर्ग में लाभ सदैव 1 से अधिक, तृतीय में सदैव 1 से कम, प्रथम में कुछ भी।
- अधिक लाभ का अर्थ है आयास को अधिक दूरी तय करना। ऊर्जा नहीं बचती।
- एकसमान छड़ का भार उसके गुरुत्व केंद्र पर लगता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या बल का आघूर्ण और बल आघूर्ण (टॉर्क) एक ही चीज़ हैं?
स्कूली स्तर पर हाँ: दोनों बल और धुरी से लंबवत दूरी का गुणनफल हैं, मात्रक N·m। कुछ किताबें आघूर्ण लिखती हैं, कुछ टॉर्क। उच्च कक्षाओं में टॉर्क एक सदिश है जिसकी दिशा घूर्णन अक्ष के अनुदिश होती है, पर इस पाठ में केवल उसका परिमाण और घूमने का रुख़ चाहिए।
यांत्रिक लाभ 1 से कम हो तो भी वह उत्तोलक क्यों कहलाता है?
क्योंकि उत्तोलक की परिभाषा में बल का लाभ होना कोई शर्त नहीं है। जो भी दृढ़ छड़ आलंब के चारों ओर घूमकर बल को आगे पहुँचाए, वह उत्तोलक है। तृतीय वर्ग बल खोता है पर गति और परास पाता है।
क्या आलंब बीच में न हो तब भी सी-सॉ संतुलित हो सकता है?
हाँ। आलंब कहीं भी हो, संतुलन के लिए केवल दोनों ओर के आघूर्ण बराबर होने चाहिए। बस दूरियाँ अलग होंगी, और छड़ का अपना भार हो तो उसका आघूर्ण भी जोड़ना होगा।
संतुलन में आलंब पर कितना बल लगता है?
आलंब छड़ पर लगे सभी नीचे वाले बलों के योग के बराबर ऊपर की ओर बल देता है। प्रथम वर्ग में यह दोनों भारों का योग है। इसीलिए भारी वस्तु उठाते समय आधार मज़बूत होना चाहिए।
आघूर्ण का मात्रक जूल क्यों नहीं है?
जूल ऊर्जा या कार्य मापता है, जहाँ बल विस्थापन की दिशा में लगता है। आघूर्ण में बल और दूरी परस्पर लंबवत हैं और राशि घुमाने की प्रवृत्ति मापती है, ऊर्जा का स्थानांतरण नहीं। इसलिए मात्रक N·m लिखा जाता है।
क्या उत्तोलक ऊर्जा बचाता है?
नहीं। आदर्श उत्तोलक में आयास द्वारा किया गया कार्य भार पर किए गए कार्य के बराबर होता है। कम बल का अर्थ है कि हाथ को अधिक दूरी चलनी पड़ती है। उत्तोलक बल को बढ़ाता है या उसकी दिशा बदलता है, कुल ऊर्जा वही रहती है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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उत्तल लेंस और अवतल लेंस के किरण आरेख इंटरैक्टिव: बिंब खिसकाकर सभी छह स्थितियाँ देखें, लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन और लेंस की क्षमता तुरंत पढ़ें।
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न्यूटन के गति के नियम
न्यूटन के गति के तीनों नियम, जड़त्व, संवेग, F = ma, आवेग और क्रिया-प्रतिक्रिया: ट्रॉली धकेलकर खुद देखें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ (कक्षा 9, 11)।
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गोलीय दर्पण किरण आरेख
अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण
विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 11
संवेग संरक्षण और संघट्ट
संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 11
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
कार्य किसे कहते हैं, गतिज व स्थितिज ऊर्जा और शक्ति के सूत्र क्या हैं: घुमावदार पथ पर लुढ़कती कार्ट की सिमुलेशन में ऊर्जा का रूपांतरण देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 11 · JEE
आनत तल
ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 9 · 11
एकसमान वृत्तीय गति
डोरी से बँधी गेंद घुमाकर कोणीय वेग, आवर्तकाल, a=v²/r और अभिकेंद्र बल F=mv²/r देखें। डोरी कटने पर गेंद कहाँ जाती है? बैंकिंग व हल किए उदाहरणों सहित।
कक्षा 9
अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंग
एक ही स्रोत से रस्सी की अनुप्रस्थ तरंग और स्प्रिंग या ध्वनि की अनुदैर्घ्य तरंग साथ-साथ देखें। शृंग, गर्त, संपीडन, विरलन, तरंगदैर्घ्य, v = fλ और कण तरंग के साथ क्यों नहीं चलते, हल सहित।
कक्षा 11
द्रव्यमान केंद्र
छड़ और पट्टिका पर द्रव्यमान खिसकाकर द्रव्यमान केंद्र x = Σmx/Σm देखें। आधार कहाँ रखें कि छड़ संतुलित रहे, बस कब उलटती है, स्थायी, अस्थायी और उदासीन संतुलन: सिमुलेशन और हल उदाहरणों सहित।
कक्षा 11
कमानी-द्रव्यमान की सरल आवर्त गति
कमानी से लटके द्रव्यमान की सरल आवर्त गति खुद चलाकर देखें। हुक का नियम, T = 2π√(m/k), ऊर्जा रूपांतरण, श्रेणी व समानांतर कमानी, हल किए गए प्रश्न और CBSE अभ्यास।
कक्षा 11
सदिशों का योग: त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम
दो सदिशों का परिणामी, त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम, घटक, नदी में नाव और बारिश में छाते का आपेक्षिक वेग खुद करके देखें। हल किए प्रश्न और NCERT अभ्यास सहित।
कक्षा 11
सापेक्ष वेग: रेलगाड़ियाँ और नदी पार करना
दो रेलगाड़ियों और नदी पार करते तैराक को खुद चलाकर देखो। सापेक्ष चाल, रेलगाड़ी के पार होने का समय, कोण, बहाव, सबसे कम समय बनाम सबसे छोटा रास्ता, हल के साथ।
कक्षा 11
केपलर के नियम और दीर्घवृत्ताकार कक्षा
उत्केंद्रता स्लाइडर खींचकर कक्षा को लंबा होते देखो। बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल के सेक्टर, आवर्तकाल का नियम T² ∝ a³ और पलायन वेग, हल के साथ।
कक्षा 11
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, g और उपग्रह
दो पिंडों का खिंचाव, व्युत्क्रम वर्ग ग्राफ़, पृथ्वी के ऊपर-नीचे g और उपग्रह की कक्षा खुद चलाकर देखें। कक्षीय चाल, आवर्तकाल, पलायन वेग और हल किए गए सवाल।
कक्षा 11
तार और नलियों में अप्रगामी तरंगें
सिमुलेशन में तार छेड़ें और खुली-बंद नलियों में फूँकें। निस्पंद, प्रस्पंद, हार्मोनिक देखें और जानें कि लंबाई, तनाव व तापमान सुर कैसे तय करते हैं, हल किए गए सवालों सहित।
कक्षा 11
अनुनाद नली और ध्वनि की चाल
अनुनाद नली में पानी का स्तर खिसकाकर तेज़ आवाज़ की जगहें खुद खोजें। L1 = λ/4 − e और L2 = 3λ/4 − e देखें, v = 2f(L2 − L1) से ध्वनि की चाल निकालें और हल किए गए सवाल करें।
कक्षा 11
विस्पंद: दो पास-पास के सुरों की धड़कन
लगभग बराबर आवृत्ति की दो तरंगें जोड़कर तीव्रता की धड़कन देखें। आवरण देखें, विस्पंद आवृत्ति |f₁ − f₂| पढ़ें, आवाज़ सुनें और गिटार को विस्पंद से मिलाना सीखें, हल किए गए सवालों के साथ।
कक्षा 11 · 12
डॉप्लर प्रभाव: चलता स्रोत, चलता श्रोता और सोनिक बूम
ध्वनि के स्रोत को तेज़-धीमा चलाइए और देखिए तरंगाग्र आगे कैसे सिकुड़ते और पीछे कैसे फैलते हैं। डॉप्लर सूत्र, एम्बुलेंस और ट्रेन के हल किए सवाल और सोनिक बूम सीखिए।
कक्षा 10 · 12
प्रिज़्म, प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण और इंद्रधनुष
सफ़ेद प्रकाश को प्रिज़्म से गुज़ारिए, प्रिज़्म कोण और आपतन कोण बदलिए और स्पेक्ट्रम बनते देखिए। विचलन, न्यूनतम विचलन, विक्षेपण क्षमता और वर्षा की बूँद में इंद्रधनुष बनना हल किए सवालों के साथ सीखिए।
कक्षा 12
किरख़ोफ़ के नियम: संधि नियम और लूप नियम
दो बैटरियों और तीन प्रतिरोधों वाला दो-लूप परिपथ खुद बनाओ। संधि पर धारा को बँटते देखो, विभव के योग को शून्य बनते देखो और किरख़ोफ़ के नियमों के सवाल कदम-दर-कदम हल करना सीखो।
कक्षा 12
व्हीटस्टोन सेतु और मीटर सेतु
व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन बिगाड़कर गैल्वेनोमीटर की सुई को हिलते देखो। P/Q = R/S होने पर सुई शून्य पर आती है। मीटर सेतु में जॉकी खिसकाकर अज्ञात प्रतिरोध मापो, हल किए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 12
एकल झिरी से विवर्तन
झिरी की चौड़ाई और तरंगदैर्घ्य बदलकर देखें कि प्रकाश कैसे फैलता है। तीव्रता का सूत्र I = I₀(sin β/β)², निम्निष्ठ की शर्त a sin θ = mλ और केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई 2λD/a, हल सहित।
कक्षा 10 · 12
आँख के दोष और उनका निवारण
सामान्य, निकट-दृष्टि, दूर-दृष्टि और बढ़ती उम्र वाली आँख बदलकर देखें। प्रतिबिंब रेटिना के आगे या पीछे क्यों बनता है, और कौन-सा लेंस कितनी डायोप्टर से इसे ठीक करता है, सिमुलेशन में समझें।
कक्षा 12
प्रकाश का ध्रुवण: मैलस का नियम और ब्रूस्टर का नियम
ध्रुवक के पीछे विश्लेषक घुमाकर ग्राफ़ में I = I₀cos²θ देखें, फिर काँच पर प्रकाश डालकर ब्रूस्टर कोण खोजें। पोलरॉइड धूप का चश्मा, तीन फ़िल्टर की पहेली और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
संधारित्र का आवेशन और विसर्जन: RC समय स्थिरांक
प्रतिरोध के सहारे संधारित्र को आवेशित और विसर्जित करो। E, R और C बदलकर V = E(1 − e^(−t/RC)) और धारा का वक्र बनते देखो, 63% वाला समय स्थिरांक और संचित ऊर्जा निकालो।
कक्षा 10 · 12
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: छड़ चुंबक, धारावाही तार और परिनालिका
छड़ चुंबक, सीधे धारावाही तार और परिनालिका की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ देखो। कंपास खींचो, धारा पलटो और B = μ₀I/2πr, B = μ₀nI व दाएँ हाथ का नियम सीखो।
कक्षा 12
एसी जनित्र
चुंबक के ध्रुवों के बीच कुंडली घुमाकर एसी जनित्र की साइन तरंग बनते देखिए। N, A, B और rpm बदलकर E₀ = NBAω और आरएमएस मान निकालिए, और जानिए मेन्स 50 Hz क्यों है।
कक्षा 10 · 12
ट्रांसफ़ॉर्मर
ट्रांसफ़ॉर्मर के प्राथमिक और द्वितीयक फेरे बदलकर देखिए वोल्टता कैसे बढ़ती-घटती है। Vs = Vp·Ns/Np, शक्ति संरक्षण, वास्तविक दक्षता और उच्च वोल्टता पर बिजली भेजने का कारण समझिए।
कक्षा 9 · 12
ऊष्मा का स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण
ताँबे, ऐलुमिनियम, काँच या लकड़ी की छड़ गरम करके Q/t = kAΔT/L देखें, बीकर में संवहन धाराओं को घूमते देखें, और T⁴ के अनुसार विकिरित शक्ति का बढ़ना जाँचें। सारणियों और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
प्रकाश-विद्युत प्रभाव: आइंस्टाइन का समीकरण और निरोधी विभव
निर्वात नली में सोडियम, जस्ते या ताँबे की पट्टिका पर किसी भी तरंगदैर्घ्य का प्रकाश डालें। देखें कि देहली आवृत्ति के नीचे इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं निकलते, K = hf − φ निरोधी विभव कैसे तय करता है, और चमक सिर्फ़ धारा क्यों बदलती है।
कक्षा 10 · 12
मोटर प्रभाव: धारावाही तार पर बल और डीसी मोटर
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही तार रखने पर वह कैसे धक्का खाता है, खुद देखिए। B, I, L और कोण बदलिए, फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम की जाँच कीजिए, फिर विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक वाली डीसी मोटर घुमाकर बल-आघूर्ण का ग्राफ़ देखिए।
कक्षा 11 · 12
गैस के अणु और अणुगति सिद्धांत: दाब, तापमान और चाल
डिब्बे में गैस के अणुओं की भागदौड़ देखिए। तापमान बढ़ाइए, गैस बदलिए, आयतन दबाइए और देखिए कि दीवारों पर टक्करों से मिला दाब PV = NkT से मेल खाता है। चाल की तुलना मैक्सवेल-बोल्ट्ज़मान वक्र से कीजिए और वर्ग-माध्य-मूल चाल निकालिए।
कक्षा 12
अर्धचालक डायोड: p–n संधि, I–V वक्र और दिष्टकारी
p–n संधि पर बायस लगाकर देखिए कि अवक्षय परत कैसे सिकुड़ती या फैलती है, आवेश वाहक कैसे पार होते हैं और शॉकली I–V वक्र कैसा बनता है। सिलिकन और जर्मेनियम की तुलना, भंजन और अर्धतरंग दिष्टकारी।
कक्षा 10 · 12
रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता
240 नाभिकों को अनियमित ढंग से क्षय होते देखो, गिनती को N = N₀e^(−λt) पर चलते पाओ, ग्राफ़ से अर्द्ध-आयु निकालो और परखो कि α, β, γ कागज़, एल्युमिनियम और सीसे में कितना घुस पाते हैं।
कक्षा 12
बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉन को n = 1 से 6 कक्षाओं में कूदते देखो, 1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²) से फोटॉन का रंग निकालो, और ऊर्जा आरेख व स्पेक्ट्रम पट्टी पर लाइमन, बामर और पाशन श्रेणी समझो।
अन्य विषयों के एनिमेशन
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रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास
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ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ: ऑक्सीकरण संख्या, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और अर्ध-अभिक्रिया
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रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु
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समसूत्री कोशिका विभाजन
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विसरण और परासरण
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प्रकाश संश्लेषण
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मानव हृदय की संरचना और कार्य
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मेंडल के आनुवंशिकता नियम
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डीएनए प्रतिकृति
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पेशी संकुचन और स्लाइडिंग-फ़िलामेंट मॉडल
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पौधों में परिवहन: जाइलम, फ्लोएम और वाष्पोत्सर्जन
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प्राकृतिक चयन: पेप्पर्ड मॉथ और कालिख वाला पेड़
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प्रतिरक्षा अनुक्रिया: प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिपिंड अनुक्रिया
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परागण और निषेचन
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पाइथागोरस प्रमेय
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त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
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द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
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वृत्त के प्रमेय
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ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
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प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
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समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
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माध्य, माध्यिका और बहुलक
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समुच्चय और वेन आरेख
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sin, cos, tan के आलेख
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पूर्ण वर्ग बनाने की विधि और द्विघात समीकरण
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वृत्त का क्षेत्रफल: सूत्र, उपपत्ति और हल किए प्रश्न
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ठोस का आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल: घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला
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समरूप त्रिभुज: स्केल गुणक, AA, SSS, SAS नियम और छाया से ऊँचाई
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निर्देशांक ज्यामिति: दूरी, मध्य-बिंदु, ढाल, विभाजन सूत्र और बिंदुपथ
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शांकव परिच्छेद: वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय
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फलनों का रूपांतरण: खिसकाना, खींचना और पलटना
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अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
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रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
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सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए
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त्रिविमीय सदिश: योग, डॉट गुणन और क्रॉस गुणन
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आव्यूह रूपांतरण: घूर्णन, परावर्तन, अपरूपण और सारणिक
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सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल
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