कोई एकाकी युग्म नहीं, इसलिए सभी आबंध युग्म बराबर दूरी पर हैं: आदर्श आकृति और आदर्श कोण
नियंत्रण
उदाहरण चुनें
मापन
- स्टेरिक संख्या
- 4
- AXE संकेतन
- AX₄
- इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति
- चतुष्फलकीय
- अणु की आकृति
- चतुष्फलकीय
- आबंध कोण (आदर्श → वास्तविक)
- 109.5° → 109.5°
- संकरण
- sp³
- चिह्नित कोण अभी
- 109.5°
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- सिमुलेशन खुलते ही मीथेन CH₄ धीरे-धीरे घूम रहा होता है। माउस या उँगली से खींचकर खुद घुमाएँ, या कैनवास फ़ोकस में हो तो तीर वाली कुंजियाँ दबाएँ। "रोकें" दबाने पर घूमना रुक जाता है। बड़ा गोला केंद्रीय परमाणु है, छोटे गोले उससे जुड़े परमाणु हैं, और लाल चाप आबंध कोण को उसके मान के साथ दिखाता है।
- "उदाहरण चुनें" पंक्ति से कोई अणु लें, या दो स्लाइडरों से अपना अणु बनाएँ: आबंध युग्म 2 से 6 और एकाकी युग्म 0 से 3। हर संख्या-जोड़ी मान्य नहीं है, क्योंकि स्टेरिक संख्या 6 से ऊपर नहीं जाती, इसलिए जगह न बचे तो एकाकी युग्म स्लाइडर की सीमा अपने-आप घट जाती है।
- एकाकी युग्म अर्ध-पारदर्शी एम्बर रंग की पालियों के रूप में दिखते हैं, जिनके भीतर दो बिंदु यानी दो इलेक्ट्रॉन हैं। "एकाकी युग्म दिखाएँ" का निशान हटाने पर केवल परमाणु बचते हैं, यही अणु की आकृति है। निशान लगाने पर इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति भी दिखती है। मापन पैनल में स्टेरिक संख्या, AXE संकेतन, दोनों आकृतियों के नाम, आदर्श से वास्तविक कोण और संकरण लिखे रहते हैं।
- आख़िरी टॉगल है "एकाकी युग्म आबंध कोण को दबाएँ"। यह आबंधों को आदर्श कोण और पाठ्यपुस्तक के घटे हुए कोण के बीच सरकाता है। NH₃ या H₂O पर इसे एक बार चालू और बंद करें, लाल चाप को घटते-बढ़ते देखेंगे। फिर नीचे दिए प्रयोग करें।
जल मुड़ा हुआ और कार्बन डाइऑक्साइड सीधा क्यों है?
दोनों तीन परमाणुओं के अणु हैं। फिर भी CO₂ बिल्कुल सीधी रेखा है और H₂O एक मुड़ा हुआ बूमरैंग। परमाणुओं की संख्या बराबर, आकृतियाँ बिल्कुल अलग। अगर आकृति सिर्फ़ जुड़े परमाणुओं की संख्या पर निर्भर होती तो दोनों एक जैसे दिखते। ऐसा नहीं है, और इसका कारण आँखों से नहीं दिखता: इलेक्ट्रॉन।
केंद्रीय परमाणु के चारों ओर गुब्बारों का गुच्छा सोचिए। हर गुब्बारा वह जगह है जहाँ इलेक्ट्रॉन रहते हैं: या तो किसी दूसरे परमाणु से आबंध, या केंद्रीय परमाणु का अपना एकाकी युग्म। कुछ गुब्बारे एक साथ बाँधें तो वे एक-दूसरे को धकेलकर जितनी जगह मिले उतनी ले लेते हैं। गुब्बारों की यही व्यवस्था आकृति है। जल के ऑक्सीजन के चारों ओर 4 गुब्बारे हैं, दो हाइड्रोजन से जुड़े और दो खाली, इसलिए हाइड्रोजन मुड़े हुए V में आ जाते हैं। CO₂ के कार्बन के चारों ओर केवल 2 गुब्बारे हैं, दो द्विआबंध, और दो गुब्बारों को सबसे दूर रखने का तरीक़ा सीधी रेखा है।
इस विचार का नाम है संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण सिद्धांत, संक्षेप में VSEPR। इसे 1957 में रोनाल्ड गिलेस्पी और रोनाल्ड न्यूहोम ने प्रस्तावित किया था, और आज भी आकृति का अनुमान लगाने के लिए रसायनज्ञ सबसे पहले यही उठाते हैं। इसमें कोई जटिल गणना नहीं, केवल गिनती और थोड़ी ज्यामिति चाहिए।
इस पन्ने पर एक ऐसा मॉडल है जिसे आप हाथ में घुमा सकते हैं। अणु बनाइए, घुमाइए, एकाकी युग्म चालू-बंद कीजिए, तब नीचे के नियम रटने की चीज़ नहीं रहेंगे, अपनी आँखों से होते देखी हुई बातें बन जाएँगे। सिमुलेशन ही पाठ्यपुस्तक है, आसपास का पाठ बस रास्ता दिखाता है।
शुरू से: इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए फैल जाते हैं
हर इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश होता है, और ऋणात्मक आवेश एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं। पूरा सिद्धांत एक पंक्ति में ख़त्म। बाकी हिसाब-किताब है: कौन-से इलेक्ट्रॉन गिने जाएँगे, और सब एक साथ धकेलें तो वे कैसे सजेंगे।
अणु के केंद्रीय परमाणु को देखिए। उसके चारों ओर इलेक्ट्रॉनों के कुछ समूह होते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन डोमेन कहते हैं। एक डोमेन का मतलब इनमें से कोई एक: एकल आबंध, द्वि-आबंध, त्रि-आबंध या एकाकी युग्म। बहु-आबंध फिर भी एक ही डोमेन है, क्योंकि उसके सारे इलेक्ट्रॉन उन्हीं दो परमाणुओं के बीच एक ही जगह रहते हैं। एकाकी युग्म वे दो इलेक्ट्रॉन हैं जिन्हें केंद्रीय परमाणु अपने पास ही रखता है।
डोमेन गिनते ही स्टेरिक संख्या मिल जाती है। स्टेरिक संख्या 2 में दो डोमेन आमने-सामने। 3 में समतल त्रिभुज, 4 में चतुष्फलक, 5 में त्रिकोणीय द्विपिरामिडी और 6 में अष्टफलक। ये पाँच मूल आकृतियाँ हैं, और इस विषय का हर अणु या तो इनमें से एक है या इनमें एक-दो कोने ख़ाली छोड़ा हुआ रूप।
यहीं असली मज़ा है। एकाकी युग्म जगह घेरता है पर वह परमाणु नहीं है, इसलिए कैमरे या परमाणुओं की स्थिति के एक्स-रे चित्र में वह कभी नहीं दिखता। अणु की जो आकृति हम बताते हैं उसमें केवल परमाणु गिने जाते हैं। इसीलिए चार डोमेन वाले अमोनिया को पिरामिड कहा जाता है, चतुष्फलक नहीं: चतुष्फलक के एक कोने पर एकाकी युग्म बैठा है और बाकी तीन पर तीन हाइड्रोजन।
ज़रूरी शब्द, एक तालिका में
परीक्षा में अस्पष्ट शब्दों पर अंक कटते हैं। नीचे हर शब्द का एक सटीक अर्थ है।
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| VSEPR सिद्धांत | केंद्रीय परमाणु के चारों ओर के इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षित होकर जितना हो सके दूर स्थिति लेते हैं | इस पन्ने की हर आकृति इससे समझ आती है |
| आबंध युग्म | दो परमाणुओं के बीच साझा किया गया इलेक्ट्रॉन युग्म | CH₄ का हर C–H आबंध |
| एकाकी युग्म | केंद्रीय परमाणु का वह संयोजकता इलेक्ट्रॉन युग्म जो आबंधन में भाग नहीं लेता | H₂O के ऑक्सीजन पर दो |
| इलेक्ट्रॉन डोमेन | इलेक्ट्रॉन घनत्व का एक क्षेत्र: एकल, द्वि या त्रि-आबंध, या एकाकी युग्म | CO₂ में 2 डोमेन |
| स्टेरिक संख्या | केंद्रीय परमाणु पर आबंध युग्म और एकाकी युग्म का योग, यानी डोमेनों की संख्या | NH₃: 3 + 1 = 4 |
| इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति | सभी डोमेनों की व्यवस्था | NH₃ के लिए चतुष्फलकीय |
| अणु की आकृति | केवल परमाणुओं की व्यवस्था | NH₃ के लिए त्रिकोणीय पिरामिडी |
| आबंध कोण | केंद्रीय परमाणु पर दो आबंधों के बीच का कोण | H₂O में 104.5° |
| संकरण | परमाणु कक्षकों का मिलकर समान संकर कक्षक बनाना, प्रत्येक डोमेन के लिए एक | CH₄ में sp³ |
| अक्षीय और विषुवतीय | त्रिकोणीय द्विपिरामिड की दो प्रकार की स्थितियाँ | PCl₅ |
| AXE संकेतन | A केंद्रीय परमाणु, X आबंध युग्म, E एकाकी युग्म | NH₃ के लिए AX₃E |
सब युग्म बराबर ज़ोर से नहीं धकेलते: एकाकी युग्म दबंग हैं
आबंध युग्म को दो नाभिक थामे रहते हैं, इसलिए उसका इलेक्ट्रॉन बादल दो परमाणुओं के बीच खिंचा हुआ और पतला रहता है। एकाकी युग्म को केवल एक नाभिक थामता है। उसका बादल मोटा होता है, केंद्रीय परमाणु के क़रीब रहता है और पड़ोसियों पर ज़्यादा दबाव डालता है।
यहीं से वह क्रम आता है जो परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है। एकाकी युग्म–एकाकी युग्म प्रतिकर्षण सबसे प्रबल, फिर एकाकी युग्म–आबंध युग्म, और सबसे कमज़ोर आबंध युग्म–आबंध युग्म। बहु-आबंध में इलेक्ट्रॉन अधिक होते हैं, इसलिए वह भी एकल आबंध से थोड़ा ज़्यादा ज़ोर लगाता है।
एकाकी–एकाकी > एकाकी–आबंध > आबंध–आबंधप्रतिकर्षण का क्रम, सबसे प्रबल पहले
स्टेरिक संख्या = आबंध युग्म + एकाकी युग्मइलेक्ट्रॉन डोमेनों की संख्या
cos θ = −1/3 → θ = 109.47°चार समान दिशाओं की ज्यामिति से मिला सटीक चतुष्फलकीय कोण
मीथेन, अमोनिया, जल: कोणों की सीढ़ी
तीनों में 4 डोमेन हैं, इसलिए तीनों 109.5° वाले चतुष्फलक से शुरू होते हैं। मीथेन में एकाकी युग्म नहीं, कोण 109.5° रहता है। अमोनिया में एक एकाकी युग्म, कोण घटकर 107°, यानी 2.5° कम। जल में दो, कोण 104.5°, यानी 5.0° कम।
हर एकाकी युग्म लगभग 2.5° घटाता है। उत्तर में यही पैटर्न लिखना चाहिए: एकाकी युग्म जितने ज़्यादा, दबाव उतना ज़्यादा, कोण उतना छोटा। सिमुलेशन में तीनों अणु बारी-बारी चलाइए और लाल चाप को सीढ़ी उतरते देखिए।
कोण घटता क्यों है, बढ़ता क्यों नहीं
मोटा एकाकी युग्म केंद्रीय परमाणु के चारों ओर के गोले का बड़ा हिस्सा घेर लेता है। जो बचता है, आबंध युग्मों को उसी में बँटना पड़ता है, इसलिए वे पास आ जाते हैं। आबंध कोण छोटा होता है, बड़ा नहीं।
त्रिकोणीय परिवार में भी यही होता है। तीन आबंध युग्मों वाले त्रिभुज का कोण 120° है। एक को एकाकी युग्म से बदलें तो बचे दो आबंध पास आकर 119° हो जाते हैं, जैसे SO₂ में।
समूह में नीचे जाने पर प्रभाव घटता है
जल का कोण 104.5° है, पर हाइड्रोजन सल्फ़ाइड H₂S का केवल लगभग 92°, और फ़ॉस्फ़ीन PH₃ का लगभग 93.5°, जबकि अमोनिया का 107°। बड़े केंद्रीय परमाणु के आबंध लंबे होते हैं, आबंध युग्म और दूर होते हैं, इसलिए एकाकी युग्म कहीं ज़्यादा दबा पाता है। परीक्षा का नियम वही रहता है, बस संख्याएँ अलग हैं।
| अणु | एकाकी युग्म | आदर्श कोण | वास्तविक कोण | कितना घटा |
|---|---|---|---|---|
| CH₄ | 0 | 109.5° | 109.5° | 0.0° |
| NH₃ | 1 | 109.5° | 107° | 2.5° |
| H₂O | 2 | 109.5° | 104.5° | 5.0° |
| BF₃ | 0 | 120° | 120° | 0.0° |
| SO₂ | 1 | 120° | 119° | 1.0° |
आकृतियों की सूची: स्टेरिक संख्या 2 से 6
सिमुलेशन में जो कुछ बन सकता है, इस तालिका में सब है, कुल 14। हर पंक्ति एक नुस्ख़ा है: स्टेरिक संख्या की मूल आकृति लीजिए, जो परमाणु नहीं हैं उन्हें हटाइए, और जो बचे उसे उसके आणविक नाम से पुकारिए।
स्टेरिक संख्या 2: रैखिक, sp
दो डोमेन दो विपरीत दिशाओं में, 180° के अंतर पर। BeCl₂ और CO₂ रैखिक हैं। CO₂ के दोनों द्विआबंध एक-एक डोमेन गिने जाते हैं, इसलिए गिनती 2 है, 4 नहीं।
स्टेरिक संख्या 3: त्रिकोणीय समतलीय और बंकित, sp²
तीन डोमेन एक ही तल में, 120° के अंतर पर। BF₃ में तीन आबंध युग्म हैं, इसलिए त्रिकोणीय समतलीय, कोण 120°। SO₂ में दो आबंध युग्म और एक एकाकी युग्म है, इसलिए परमाणु लगभग 119° कोण का बंकित V बनाते हैं।
स्टेरिक संख्या 4: चतुष्फलकीय, त्रिकोणीय पिरामिडी और बंकित, sp³
चार डोमेन चतुष्फलक के चार कोनों की ओर। चारों परमाणु हों (CH₄) तो आकृति चतुष्फलकीय। एक परमाणु की जगह एकाकी युग्म हो तो त्रिकोणीय पिरामिडी (NH₃), दो की जगह हो तो बंकित (H₂O)। कोण क्रमशः 109.5°, 107° और 104.5°।
स्टेरिक संख्या 5: त्रिकोणीय द्विपिरामिडी और उसकी तीन संतानें, sp³d
पाँच डोमेन की दो प्रकार की स्थितियाँ हैं: ऊर्ध्वाधर अक्ष पर दो अक्षीय, और एक तल में तीन विषुवतीय। कोण 90°, 120°। विषुवतीय जगहें एक-एक करके एकाकी युग्मों को देते जाएँ तो मिलती हैं सी-सॉ आकृति (SF₄), T-आकार (ClF₃) और अंत में फिर रैखिक (XeF₂)।
स्टेरिक संख्या 6: अष्टफलकीय और उसकी संतानें, sp³d²
छह डोमेन तीन परस्पर लंब अक्षों पर, सब 90° के अंतर पर। SF₆ पूरा अष्टफलक है। एक एकाकी युग्म हो तो वर्ग पिरामिडी (BrF₅, कोण लगभग 84.8°), दो एकाकी युग्म विपरीत पक्षों पर हों तो वर्ग समतलीय (XeF₄)।
| प्रकार | स्टेरिक संख्या | इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति | अणु की आकृति | आबंध कोण (आदर्श → वास्तविक) | संकरण | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|---|---|
| AX₂ | 2 | रैखिक | रैखिक | 180° → 180° | sp | BeCl₂, CO₂ |
| AX₃ | 3 | त्रिकोणीय समतलीय | त्रिकोणीय समतलीय | 120° → 120° | sp² | BF₃ |
| AX₂E | 3 | त्रिकोणीय समतलीय | बंकित (V-आकार) | 120° → 119° | sp² | SO₂ |
| AX₄ | 4 | चतुष्फलकीय | चतुष्फलकीय | 109.5° → 109.5° | sp³ | CH₄ |
| AX₃E | 4 | चतुष्फलकीय | त्रिकोणीय पिरामिडी | 109.5° → 107° | sp³ | NH₃ |
| AX₂E₂ | 4 | चतुष्फलकीय | बंकित (V-आकार) | 109.5° → 104.5° | sp³ | H₂O |
| AX₅ | 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | 90°, 120° → 90°, 120° | sp³d | PCl₅ |
| AX₄E | 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | सी-सॉ (झूला) आकार | 90°, 120° → 87°, 102° | sp³d | SF₄ |
| AX₃E₂ | 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | T-आकार | 90° → 87.5° | sp³d | ClF₃ |
| AX₂E₃ | 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | रैखिक | 180° → 180° | sp³d | XeF₂ |
| AX₆ | 6 | अष्टफलकीय | अष्टफलकीय | 90° → 90° | sp³d² | SF₆ |
| AX₅E | 6 | अष्टफलकीय | वर्ग पिरामिडी | 90° → 84.8° | sp³d² | BrF₅ |
| AX₄E₂ | 6 | अष्टफलकीय | वर्ग समतलीय | 90° → 90° | sp³d² | XeF₄ |
| AX₃E₃ | 6 | अष्टफलकीय | T-आकार | 90° → 90° | sp³d² | — |
संकरण, सीधे स्टेरिक संख्या से पढ़ें
संकरण अलग से निकालना नहीं पड़ता। वह स्टेरिक संख्या के पीछे-पीछे चलता है: हर इलेक्ट्रॉन डोमेन के लिए एक संकर कक्षक, चाहे वह आबंध हो या एकाकी युग्म। नुस्ख़ा है s के साथ ज़रूरत भर p और d कक्षक मिलाना।
| स्टेरिक संख्या | कौन-से कक्षक मिलते हैं | संकरण | संकर कक्षकों की संख्या | मूल ज्यामिति | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|---|
| 2 | 1 s + 1 p | sp | 2 | रैखिक | BeCl₂, CO₂ |
| 3 | 1 s + 2 p | sp² | 3 | त्रिकोणीय समतलीय | BF₃ |
| 4 | 1 s + 3 p | sp³ | 4 | चतुष्फलकीय | CH₄ |
| 5 | 1 s + 3 p + 1 d | sp³d | 5 | त्रिकोणीय द्विपिरामिडी | PCl₅ |
| 6 | 1 s + 3 p + 2 d | sp³d² | 6 | अष्टफलकीय | SF₆ |
त्रिकोणीय द्विपिरामिड में एकाकी युग्म कहाँ बैठता है?
त्रिकोणीय द्विपिरामिड की पाँचों जगहें बराबर नहीं हैं। अक्षीय जगह के 3 पड़ोसी 90° पर हैं। विषुवतीय जगह के 90° पर केवल 2 पड़ोसी हैं, बाकी दो 120° दूर हैं। पास के पड़ोसी कम, तो प्रतिकर्षण भी कम।
एकाकी युग्म सबसे ज़ोर से धकेलते हैं, इसलिए वे ज़्यादा खुली विषुवतीय जगहें लेते हैं। इसीलिए SF₄ (एक एकाकी युग्म) सी-सॉ आकृति का है, ClF₃ (दो) T-आकार का, और XeF₂ (तीन) रैखिक: तीनों एकाकी युग्म विषुवत पर और दोनों परमाणु अक्ष पर।
अष्टफलक में सभी जगहें समान हैं, इसलिए पहला एकाकी युग्म कहीं भी बैठ सकता है। दूसरा ठीक उसके विपरीत, 180° दूर बैठता है। इसीलिए XeF₄ समतलीय है: दोनों एकाकी युग्म चार परमाणुओं के तल के ऊपर और नीचे हैं।
सिमुलेशन में खुद करके देखें
पढ़ना एक बात है, देखना दूसरी। ये पाँच प्रयोग क्रम से करें, हर प्रयोग से पहले "फिर से शुरू" दबा लें।
प्रयोग 1: आदर्श चतुष्फलक बनाएँ
CH₄ से शुरू करें। मॉडल घुमाकर ऐसा कोण खोजें जहाँ चौथा आबंध ऊपर या आपसे दूर जाता दिखे। किन्हीं भी दो आबंधों के बीच लाल चाप 109.5° दिखाएगा। अब एकाकी युग्म स्लाइडर को 1 पर खींचें, फिर वापस 0 पर: 3 आबंध युग्म और 1 एकाकी युग्म पर आकृति त्रिकोणीय पिरामिडी है, और खोए हुए कोने की जगह पाली बैठ जाती है।
प्रयोग 2: एक-एक करके एकाकी युग्म जोड़ें
CH₄, फिर NH₃, फिर H₂O दबाएँ। कोण 109.5°, 107° और 104.5° दिखेंगे। अब जल पर "एकाकी युग्म आबंध कोण को दबाएँ" का निशान हटाएँ: आबंध उछलकर 109.5° तक खुल जाते हैं। निशान लगाएँ तो फिर बंद हो जाते हैं। यही है एकाकी युग्म का प्रतिकर्षण, आँखों के सामने।
प्रयोग 3: एक स्टेरिक संख्या, चार आकृतियाँ
PCl₅, SF₄, ClF₃ और XeF₂ दबाएँ। चारों की स्टेरिक संख्या 5 है, फिर भी आकृति त्रिकोणीय द्विपिरामिडी, सी-सॉ (झूला) आकार, T-आकार और रैखिक में बदलती है। हर बार देखें कि पालियाँ कहाँ आती हैं: हमेशा बीच के विषुवतीय तल में।
प्रयोग 4: अष्टफलक का परिवार
SF₆, BrF₅ और XeF₄ दबाएँ। दूसरा एकाकी युग्म पहले के विपरीत आता है, इसलिए XeF₄ के चारों परमाणु एक ही समतल वर्ग में रहते हैं। मॉडल घुमाकर ऊपर-नीचे की पालियाँ देखें।
प्रयोग 5: एकाकी युग्म छिपाएँ
H₂O पर "एकाकी युग्म दिखाएँ" का निशान हटाएँ। जो बचता है वह अणु की आकृति है, बंकित (V-आकार)। निशान वापस लगाएँ तो समझ आता है कि कोण 180° क्यों नहीं है: अदृश्य पालियाँ रास्ता रोके खड़ी हैं। XeF₂ पर भी करें: पालियों के बिना वह बिल्कुल CO₂ जैसा दिखता है, पर मापन पैनल बताता है कि उसकी स्टेरिक संख्या 5 है, 2 नहीं।
हल किए गए प्रश्न
एक ही विधि से सब हल होते हैं। चरण 1: केंद्रीय परमाणु के संयोजकता इलेक्ट्रॉन, साथ में हर एकसंयोजी परमाणु के लिए 1, आवेश के अनुसार समायोजित करके 2 से भाग देने पर स्टेरिक संख्या। चरण 2: आबंध युग्म घटाने पर एकाकी युग्म। चरण 3: ऊपर की तालिका से आकृति, कोण और संकरण पढ़ें।
प्रश्न 1: NH₃
नाइट्रोजन के संयोजकता इलेक्ट्रॉन 5, तीन हाइड्रोजन जोड़ते हैं 3। स्टेरिक संख्या = (5 + 3) ÷ 2 = 4। आबंध युग्म 3, इसलिए एकाकी युग्म = 4 − 3 = 1। प्रकार AX₃E: डोमेन ज्यामिति चतुष्फलकीय, आकृति त्रिकोणीय पिरामिडी, कोण 107°, संकरण sp³।
प्रश्न 2: H₂O
ऑक्सीजन के 6, दो हाइड्रोजन जोड़ते हैं 2। स्टेरिक संख्या = (6 + 2) ÷ 2 = 4, एकाकी युग्म = 4 − 2 = 2। प्रकार AX₂E₂, डोमेन ज्यामिति चतुष्फलकीय, आकृति बंकित (V-आकार), कोण 104.5°, संकरण sp³। जल का कोण अमोनिया से 2.5° कम है, क्योंकि जल में दो एकाकी युग्म हैं और अमोनिया में एक।
प्रश्न 3: ClF₃
क्लोरीन के 7, तीन फ़्लोरीन जोड़ते हैं 3। स्टेरिक संख्या = (7 + 3) ÷ 2 = 5, मूल ज्यामिति त्रिकोणीय द्विपिरामिडी। आबंध युग्म 3, एकाकी युग्म 2। दोनों एकाकी युग्म दो विषुवतीय जगहें लेते हैं, तो अणु की आकृति T-आकार, कोण लगभग 87.5°, संकरण sp³d।
प्रश्न 4: XeF₄
ज़ीनॉन के 8, चार फ़्लोरीन जोड़ते हैं 4। स्टेरिक संख्या = (8 + 4) ÷ 2 = 6, मूल ज्यामिति अष्टफलकीय। एकाकी युग्म = 6 − 4 = 2। वे आमने-सामने बैठते हैं, इसलिए आकृति वर्ग समतलीय, कोण 90°, संकरण sp³d²।
प्रश्न 5: आयन ICl₄⁻
आयन होने पर इलेक्ट्रॉन गिनती बदलती है। आयोडीन के 7, चार क्लोरीन जोड़ते हैं 4, और ऋणात्मक आवेश एक और जोड़ता है। स्टेरिक संख्या = (7 + 4 + 1) ÷ 2 = 6। एकाकी युग्म = 6 − 4 = 2, इसलिए आकृति वर्ग समतलीय, ठीक XeF₄ जैसी, संकरण sp³d²।
प्रश्न 6: NH₄⁺ और H₃O⁺
अमोनियम: (5 + 4 − 1) ÷ 2 = 4, एकाकी युग्म 0, इसलिए चतुष्फलकीय, कोण 109.5°। हाइड्रोनियम: (6 + 3 − 1) ÷ 2 = 4, एकाकी युग्म 1, इसलिए त्रिकोणीय पिरामिडी, कोण लगभग 107°। दोनों आयनों में अंतर केवल एक एकाकी युग्म का है।
प्रश्न 7: CO₂ और SO₂ एक जैसे दिखते हैं पर नहीं हैं
द्विआबंध वाले ऑक्सीजन को केंद्रीय परमाणु से अतिरिक्त कुछ नहीं चाहिए, इसलिए वह जोड़ता है 0। कार्बन: (4 + 0) ÷ 2 = 2, एकाकी युग्म नहीं, रैखिक। सल्फ़र: (6 + 0) ÷ 2 = 3, एक एकाकी युग्म, बंकित (V-आकार), कोण लगभग 119°। परमाणु उतने ही, एकाकी युग्म अलग, इसलिए आकृतियाँ भी अलग।
प्रश्न 8: कोण कितना दबता है
आदर्श कोण 109.5°। अमोनिया में वास्तविक कोण 107°, घटा 2.5°। जल में 104.5°, घटा 5.0°, अमोनिया का दुगुना, क्योंकि एकाकी युग्म भी दुगुने हैं। हाइड्रोजन सल्फ़ाइड के 92° से तुलना करें: जल से -12.5° छोटा, क्योंकि केंद्रीय परमाणु बड़ा है और आबंध लंबा।
वे ग़लतियाँ जो सब करते हैं
इन्हें टालें तो आकृति के प्रश्नों में अंक नहीं कटेंगे।
- इलेक्ट्रॉन डोमेन की जगह परमाणु गिनना। संकरण और मूल ज्यामिति डोमेन से चलते हैं, परमाणु से नहीं।
- द्वि-आबंध या त्रि-आबंध को दो या तीन डोमेन मानना। बहु-आबंध एक ही डोमेन है।
- यह भूल जाना कि एकाकी युग्म अदृश्य हैं। अणु की आकृति केवल परमाणुओं का नाम बताती है, मूल ज्यामिति सभी डोमेनों का।
- जल या अमोनिया को "चतुष्फलकीय" लिख देना। उनकी डोमेन ज्यामिति चतुष्फलकीय है, पर आकृतियाँ बंकित और त्रिकोणीय पिरामिडी हैं।
- त्रिकोणीय द्विपिरामिड में एकाकी युग्म को अक्षीय जगह देना। वह पहले विषुवतीय जगह लेता है।
- जल का कोण आदर्श चतुष्फलकीय कोण बताना। दो एकाकी युग्म उसे उससे नीचे उतार देते हैं।
- आयनों में गड़बड़ी करना। ऋणात्मक आवेश पर एक इलेक्ट्रॉन जोड़ें, धनात्मक पर एक घटाएँ, फिर दो से भाग दें।
- "रैखिक" देखकर स्टेरिक संख्या 2 मान लेना। XeF₂ रैखिक है, पर उसकी स्टेरिक संख्या 5 है।
वास्तविक जीवन में आणविक आकृति
आकृति केवल चित्र बनाने की चीज़ नहीं है। कोई पदार्थ क्या करेगा, यह उसकी आकृति तय करती है।
- जल बंकित है, इसलिए उसके आबंध द्विध्रुव एक-दूसरे को नहीं काटते। वह ध्रुवीय है, इसीलिए नमक और चीनी घुल जाते हैं और बर्फ़ तैरती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड रैखिक है, इसलिए उसके दोनों ध्रुवीय आबंध एक-दूसरे को काट देते हैं। अणु अध्रुवीय है और सामान्य ताप पर गैस।
- अमोनिया त्रिकोणीय पिरामिडी है, और उसका एकाकी युग्म ही उसे प्रोटॉन पकड़कर अमोनियम बनने देता है, जो उर्वरकों में काम आता है।
- मीथेन चतुष्फलकीय और सममित है, इसलिए अध्रुवीय। प्राकृतिक गैस आसानी से जलती है, पर पानी में नहीं घुलती।
- सल्फ़र हेक्साफ़्लोराइड पूरा अष्टफलक है, भारी और निष्क्रिय गैस, जो उच्च वोल्टता स्विचगियर में विद्युतरोधी के रूप में उपयोग होती है।
- ओज़ोन O₃ बंकित है, इसलिए उसमें द्विध्रुव है, जो समझाने में मदद करता है कि वह ऊपरी वायुमंडल में पराबैंगनी किरणें कैसे सोखता है।
- दवाएँ और एंज़ाइम ताले-चाबी की तरह काम करते हैं। ग़लत आकृति का अणु ग्राही में फ़िट नहीं होता।
- स्वाद और गंध भी आकृति पर निर्भर हैं: वही परमाणु अलग त्रिविमीय व्यवस्था में हों तो गंध बिल्कुल अलग हो सकती है।
परीक्षा कोना: CBSE, NCERT और प्रवेश परीक्षाएँ
कक्षा 11 की NCERT रसायन विज्ञान (भाग 1) में अध्याय "रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना" में VSEPR सिद्धांत, आणविक आकृतियाँ, आबंध कोण और संकरण आते हैं। CBSE में प्रायः CH₄, NH₃ और H₂O की आकृतियाँ और कोणों का क्रम पूछा जाता है। JEE और NEET में ClF₃, SF₄, XeF₄ और आयनों जैसे ICl₄⁻ की आकृतियाँ भी आती हैं। अपने बोर्ड का नवीनतम पाठ्यक्रम देखकर मिला लें कि कहाँ तक पढ़ना है।
बहुविकल्पीय प्रश्नों में पसंदीदा विषय हैं NH₃ या H₂O की आकृति, CH₄, NH₃ और H₂O के कोणों का क्रम, और केंद्रीय परमाणु का संकरण। दीर्घ उत्तर में VSEPR की परिकल्पनाएँ और यह कारण पूछा जाता है कि एकाकी युग्म कोण क्यों घटाते हैं।
एक नमूना दीर्घ प्रश्न
(क) इलेक्ट्रॉन युग्मों के प्रतिकर्षण का क्रम लिखिए। (ख) समझाइए कि जल का आबंध कोण अमोनिया से छोटा क्यों है। (ग) SF₄ की स्टेरिक संख्या और आकृति ज्ञात कीजिए।
उत्तर। (क) एकाकी–एकाकी > एकाकी–आबंध > आबंध–आबंध। (ख) जल में एकाकी युग्म 2 हैं, अमोनिया में 1। एकाकी युग्म जितने ज़्यादा, आबंध उतने पास आते हैं, इसलिए 104.5° और 107°। (ग) (6 + 4) ÷ 2 = 5, मूल ज्यामिति त्रिकोणीय द्विपिरामिडी; 1 एकाकी युग्म पर आकृति सी-सॉ (झूला) आकार, संकरण sp³d।
पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहली रात की सूची
यह सूची एक बार पढ़ लें, फिर सिमुलेशन में चौदहों आकृतियाँ एक बार घुमाकर देख लें।
- इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षित होकर जितना हो सके दूर हो जाते हैं: यही VSEPR है।
- स्टेरिक संख्या = आबंध युग्म + एकाकी युग्म; बहु-आबंध एक ही बार गिना जाता है।
- मूल आकृतियाँ: रैखिक (2), त्रिकोणीय समतलीय (3), चतुष्फलकीय (4), त्रिकोणीय द्विपिरामिडी (5), अष्टफलकीय (6)।
- प्रतिकर्षण का क्रम: एकाकी–एकाकी > एकाकी–आबंध > आबंध–आबंध।
- कोण: CH₄ 109.5°, NH₃ 107°, H₂O 104.5°।
- स्टेरिक संख्या के अनुसार संकरण: 2, 3, 4, 5, 6 के लिए sp, sp², sp³, sp³d, sp³d²।
- त्रिकोणीय द्विपिरामिड में एकाकी युग्म विषुवतीय जगह पर, अष्टफलक में विपरीत जगहों पर।
- हर अणु के दो नाम: सभी डोमेनों के लिए डोमेन ज्यामिति, केवल परमाणुओं के लिए अणु की आकृति।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
VSEPR सिद्धांत क्या है?
VSEPR (संयोजकता कोश इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण) सिद्धांत के अनुसार केंद्रीय परमाणु के चारों ओर के इलेक्ट्रॉन युग्म एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करके जितना हो सके दूर स्थिति लेते हैं, और इसी से अणु की आकृति का अनुमान लगता है। आबंध युग्म और एकाकी युग्म गिनने पर स्टेरिक संख्या मिलती है, जो मूल ज्यामिति तय करती है। एकाकी युग्म फिर अंतिम आकृति और कोण बदल देते हैं।
किसी अणु की आकृति कैसे ज्ञात करें?
पहले स्टेरिक संख्या निकालें: केंद्रीय परमाणु के संयोजकता इलेक्ट्रॉन और एकसंयोजी परमाणुओं की संख्या जोड़ें, आवेश के अनुसार समायोजित करें, 2 से भाग दें। आबंध युग्म घटाने पर एकाकी युग्म मिलते हैं। स्टेरिक संख्या से मूल ज्यामिति लें, फिर केवल परमाणुओं की बनी आकृति का नाम बताएँ। इस पन्ने की तालिका में सभी 14 स्थितियाँ हैं।
जल का आबंध कोण मीथेन से कम क्यों है?
जल के ऑक्सीजन पर दो एकाकी युग्म हैं। एकाकी युग्म आबंध युग्म से ज़्यादा ज़ोर से धकेलता है, इसलिए दोनों O–H आबंध चतुष्फलकीय 109.5° से दबकर 104.5° रह जाते हैं। मीथेन में एकाकी युग्म नहीं है, इसलिए पूरा 109.5° बना रहता है।
इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति और अणु की आकृति में अंतर क्या है?
इलेक्ट्रॉन-डोमेन ज्यामिति सभी डोमेनों, यानी आबंध और एकाकी युग्मों की व्यवस्था बताती है। अणु की आकृति केवल परमाणुओं की व्यवस्था बताती है। एकाकी युग्म न हो तो दोनों एक, हो तो अलग।
द्वि-आबंध एक डोमेन गिना जाता है या दो?
एक। द्वि या त्रि-आबंध के सारे इलेक्ट्रॉन उन्हीं दो परमाणुओं के बीच एक ही क्षेत्र में रहते हैं और एक इकाई की तरह धकेलते हैं। इसीलिए CO₂ की स्टेरिक संख्या 2 है और वह रैखिक है।
एकाकी युग्म विषुवतीय स्थिति में क्यों बैठते हैं?
त्रिकोणीय द्विपिरामिड की विषुवतीय जगह के 90° पर 2 पड़ोसी हैं, अक्षीय जगह के 3। एकाकी युग्म सबसे ज़्यादा प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए वे कम पास-पड़ोसी वाली जगह यानी विषुवतीय जगह लेते हैं। अष्टफलक में सभी जगहें समान हैं, इसलिए दूसरा एकाकी युग्म पहले के विपरीत बैठता है।
संकरण का VSEPR से क्या संबंध है?
प्रत्येक इलेक्ट्रॉन डोमेन के लिए एक संकर कक्षक चाहिए, इसलिए संकरण स्टेरिक संख्या के अनुसार चलता है: 2 पर sp, 3 पर sp², 4 पर sp³, 5 पर sp³d और 6 पर sp³d²। एकाकी युग्म भी संकर कक्षक घेरते हैं।
अमोनिया समतल की जगह पिरामिडी क्यों है?
नाइट्रोजन के 4 डोमेन हैं, तीन आबंध और एक एकाकी युग्म, जो चतुष्फलक के चार कोनों की ओर हैं। तीन हाइड्रोजन तीन कोनों पर और एकाकी युग्म चौथे पर, इसलिए परमाणु पिरामिड बनाते हैं, कोण 107°।
क्या स्टेरिक संख्या 5 होने पर भी अणु रैखिक हो सकता है?
हाँ। XeF₂ में 2 आबंध युग्म और 3 एकाकी युग्म हैं। तीनों एकाकी युग्म त्रिकोणीय द्विपिरामिड के विषुवत पर बैठते हैं और दोनों फ़्लोरीन अक्षीय स्थितियों में, 180° के अंतर पर।
क्या VSEPR हमेशा सही होता है?
मुख्य समूह के अणुओं के लिए यह बहुत अच्छा पहला अनुमान है, पर इसमें कक्षक का बारीक ब्योरा नहीं है। संक्रमण धातु यौगिकों में और उन भारी परमाणुओं में, जहाँ एकाकी युग्म कोण पर कम असर डालता है, यह कमज़ोर पड़ता है। स्कूल और विश्वविद्यालय के प्रथम वर्ष की रसायन में यही मान्य विधि है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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SSC Chemistry: syllabus and preparation
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रसायन विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 9 · 11
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कक्षा 9 · 11
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कक्षा 11
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बॉयल का नियम, चार्ल्स का नियम, गे-लुसाक और आवोगाद्रो नियम, आदर्श गैस समीकरण PV = nRT: पिस्टन खींचकर खुद देखें, ग्राफ़, R के मान, व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 10 · 11
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कक्षा 10 · 12
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कक्षा 9 · 11
आवर्त सारणी की आवर्तिता
आवर्त सारणी में आवर्तिता क्या है: परमाणु त्रिज्या, आयनन ऊर्जा, इलेक्ट्रोनगेटिविटी और धात्विक गुण आवर्त व समूह में कैसे बदलते हैं। पहले 36 तत्वों के हीट मैप में खुद जाँचें, अपवादों के साथ।
कक्षा 10 · 12
अभिक्रिया की दर और संघट्ट सिद्धांत
अभिक्रिया की दर किन बातों पर निर्भर करती है? संघट्ट सिद्धांत के सिमुलेशन में तापमान, सांद्रता और उत्प्रेरक बदलकर सक्रियण ऊर्जा का ग्राफ़ और उत्पाद का वक्र खुद देखें।
कक्षा 9
द्रव्य की अवस्थाएँ: ठोस, द्रव, गैस और तापन वक्र
ठोस में कंपन, द्रव में फिसलन और गैस में मुक्त दौड़: कणों का व्यवहार खुद देखें। पानी का तापन वक्र, गलनांक, क्वथनांक, गुप्त ऊष्मा, ऊर्ध्वपातन और Q = mcΔT, Q = mL के हल सहित।
कक्षा 11
परमाणु कक्षक: s, p, d के आकार, क्वांटम संख्याएँ और नोड
1s, 2s, 2p और 3d कक्षक को 3D में घुमाकर देखें। कक्षा और कक्षक का अंतर, चार क्वांटम संख्याएँ, त्रिज्य व कोणीय नोड गिनना, उपकोश की क्षमता, हल सहित उदाहरण।
कक्षा 9 · 11
मोल अवधारणा: मोलर द्रव्यमान, आवोगाद्रो संख्या और मोलर आयतन
मोल किसे कहते हैं, आवोगाद्रो संख्या कितनी है, मोलर द्रव्यमान और STP पर मोलर आयतन (22.4 लीटर) क्या है? आभासी तराज़ू पर तौलकर मोल और अणुओं की संख्या खुद निकालें; प्रतिशत संघटन और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 11
विसरण और निःस्राव: ग्राहम का नियम
नली में NH₃ और HCl से सफ़ेद छल्ला बनते देखें, फिर सूक्ष्म छिद्र से गैसों के निःस्राव की दौड़ देखें। ग्राहम के विसरण नियम की व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 9 · 10
रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास
रासायनिक समीकरण कैसे संतुलित करें? गुणांक बदलकर दोनों ओर के परमाणु गिनें। जल, मीथेन, जंग, अम्ल और रसोई गैस के पाँच हल किए उदाहरण, कक्षा 10 की परीक्षा के लिए।
कक्षा 11
रासायनिक साम्य: साम्य स्थिरांक Kc और ले शातेलिए का सिद्धांत
रासायनिक साम्य क्या है, साम्य स्थिरांक Kc कैसे निकालें, और सांद्रता, ताप या दाब बदलने पर अभिक्रिया किस ओर खिसकती है? हैबर प्रक्रिया की दर-रेखाओं से ले शातेलिए का सिद्धांत समझें।
कक्षा 9 · 12
अनुमापन: ब्यूरेट और सूचक से अज्ञात सांद्रता निकालना
अनुमापन क्या है, ब्यूरेट और सूचक कैसे काम करते हैं, अंत बिंदु और तुल्यता बिंदु में क्या फ़र्क़ है, और V₁M₁ = V₂M₂ से सांद्रता कैसे निकालें? pH वक्र के साथ सिमुलेशन में खुद करके सीखो।
कक्षा 11 · 12
गैल्वेनिक सेल: डेनियल सेल, EMF और नर्स्ट समीकरण
गैल्वेनिक सेल बिजली कैसे बनाता है? डेनियल सेल में इलेक्ट्रॉन और लवण सेतु के आयन किस ओर जाते हैं, छड़ों का द्रव्यमान कैसे बदलता है, मानक और नर्स्ट EMF क्या है? सांद्रता बदलकर खुद देखो।
कक्षा 10 · 11
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ: ऑक्सीकरण संख्या, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और अर्ध-अभिक्रिया
ऑक्सीकरण और अपचयन क्या हैं, ऑक्सीकरण संख्या कैसे निकालते हैं, और ऑक्सीकारक कौन है? पाँच रेडॉक्स अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन का चलना देखो, अर्ध-अभिक्रियाओं और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 11 · 12
हाइड्रोकार्बन: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और संरचनात्मक समावयवी 3D में
ऐल्केन, ऐल्कीन और ऐल्काइन को घूमते बॉल-स्टिक मॉडल में देखो। कार्बन की संख्या बदलो, सामान्य सूत्र और IUPAC नाम पढ़ो, और ब्यूटेन, पेंटेन, हेक्सेन के सभी संरचनात्मक समावयवी देखो।
कक्षा 11 · 12
प्रकार्यात्मक समूह: ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन
प्रकार्यात्मक समूह क्या है, ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन को कैसे पहचानें? आठ परिवारों की संरचना, IUPAC नाम, परीक्षण और हल किए गए सवाल देखो।
कक्षा 12
बहुलकीकरण: योगात्मक और संघनन बहुलक, पॉलिथीन और नायलॉन
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कक्षा 9 · 11
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निस्यंदन, सरल व प्रभाजी आसवन, पेपर क्रोमैटोग्राफी और क्रिस्टलन को चलते देखो। Rf की गणना, क्वथनांक के समतल भाग और क्रिस्टल की प्राप्ति खुद निकालो।
कक्षा 12
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सरल, अंतःकेंद्रित और फलक-केंद्रित घनीय कोष्ठिका घुमाकर देखो। प्रति कोष्ठिका परमाणु, समन्वय संख्या, संकुलन क्षमता (52.4%, 68%, 74%) और घनत्व की गणना।
कक्षा 11 · 12
रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु
देखिए अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय में A और Z कैसे बदलते हैं, नाभिकीय समीकरण संतुलित कीजिए और 100 परमाणुओं का यादृच्छिक क्षय अर्ध-आयु वक्र पर चलता देखिए। कार्बन-14 आयु निर्धारण सहित मुफ़्त सिमुलेशन।
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अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
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सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल
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