हवा वाली पंक्ति में कणों का विस्थापन असली से बड़ा बनाया गया है, ताकि संपीडन आसानी से दिखें
नियंत्रण
मापन
- आवृत्ति, f
- 1.0Hz
- आवर्तकाल, T = 1/f
- 1.00s
- तरंगदैर्घ्य, λ = v/f
- 3.00m
- तरंग की चाल (माध्यम), v
- 3.00m/s
- रस्सी के कण का विस्थापन, y
- 0.0cm
- हवा के कण का विस्थापन, s
- 0.0cm
- समय, t
- 0.0s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- चलाएँ और दोनों पंक्तियाँ एक साथ देखें। ऊपर की रस्सी और नीचे का वायु स्तंभ एक ही स्रोत से चलते हैं, इसलिए दोनों की आवृत्ति, आयाम और तरंग की चाल एक जैसी है। फ़र्क़ सिर्फ़ कणों के कंपन की दिशा का है।
- हर पंक्ति में नारंगी कण ढूँढें। उसकी बिंदीदार रेखा उसकी साम्य स्थिति बताती है। कुछ सेकंड देखें: रस्सी में कण ऊपर-नीचे होता है, हवा में दाएँ-बाएँ सरकता है, और दोनों में बार-बार बिंदीदार रेखा पर लौट आता है। वह तरंग के साथ दाईं ओर कभी नहीं बहता।
- हर पंक्ति के दाईं ओर का छोटा ग्राफ़ पढ़ें। यह नारंगी कण का विस्थापन बनाम समय पिछले 4 सेकंड के लिए दिखाता है, और यह एक ज्या वक्र है जिसका आवर्तकाल T = 1/f है।
- आवृत्ति स्लाइडर बढ़ाएँ। लहरें पास-पास आ जाती हैं, मापन पैनल में तरंगदैर्घ्य λ घटता है, पर f × λ हमेशा तरंग की चाल के बराबर रहता है। f या v बदलते ही तरंग स्रोत से फिर शुरू होती है, इसलिए आप उसके अग्र भाग को फैलते देख सकते हैं।
- आवृत्ति स्थिर रखकर तरंग की चाल बढ़ाएँ। तरंगदैर्घ्य लंबा हो जाता है और लहरें फैल जाती हैं। फिर केवल आयाम बदलें: रस्सी की लहर ऊँची होती है, हवा में संपीडन सघन होता है, पर λ नहीं बदलता।
- ग्राफ़ वाले बॉक्स पर टिक करें। तीसरी पंक्ति में हवा के हर कण का साम्य स्थिति से विस्थापन उसकी स्थिति के सापेक्ष बनता है। लाल और हरे बिंदु दिखाते हैं कि वक्र जहाँ नीचे की ओर शून्य पार करता है वहाँ संपीडन है, और जहाँ ऊपर की ओर शून्य पार करता है वहाँ विरलन।
स्टेडियम की लहर, रस्सी और स्पीकर
क्रिकेट स्टेडियम में दर्शकों की “मैक्सिकन वेव” याद करें। एक लहर पूरी दीर्घा का चक्कर लगा आती है, फिर भी कोई अपनी जगह छोड़कर दौड़ता नहीं। हर आदमी अपनी सीट पर बस खड़ा होता है और बैठ जाता है, और खड़े लोगों का पैटर्न घूमता रहता है। इस पूरे अध्याय की सबसे ज़रूरी बात इसी तस्वीर में है: तरंग चलती है, लेकिन जिन कणों से वह बनी है वे उसके साथ नहीं चलते।
अब एक लंबी रस्सी का एक सिरा दरवाज़े के हैंडल से बाँधें और दूसरे सिरे को ऊपर-नीचे हिलाएँ। रस्सी पर एक उभार दरवाज़े की ओर दौड़ता है। रस्सी पर बँधी गाँठ को देखें तो वह ऊपर जाती है, नीचे आती है, और रस्सी की लंबाई में उसी जगह रहती है। उभार ने कई मीटर तय किए, गाँठ कुछ सेंटीमीटर हिलकर घर लौट आई।
ध्वनि में भी यही होता है, बस एक मोड़ के साथ। स्पीकर का कोन आगे धकेलता है तो उसके पास की हवा दब जाती है। वह दबा हुआ हिस्सा अगली परत को धकेलता है, वह उसके अगली को, और दबी हुई हवा का एक स्पंद कमरे में दौड़ जाता है। फिर भी आपके कान के पास की हवा स्पीकर से आपके पास नहीं आई; हवा का हर छोटा हिस्सा बस आगे-पीछे थोड़ा-सा डोला। मोड़ यह है कि डोलने की दिशा वही है जिस ओर ध्वनि चलती है, आड़ी नहीं।
डोलने की दिशा का यही अंतर तरंगों के दोनों परिवारों को अलग करता है। सिमुलेशन में दोनों एक ही स्रोत से साथ-साथ बनाई गई हैं, ताकि आप सीधे तुलना कर सकें।
पहले समझें, तरंग क्या है
तरंग एक ऐसा विक्षोभ है जो किसी माध्यम में चलता है और माध्यम को साथ ले जाए बिना ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है। पानी, रस्सी, हवा और धातु का स्प्रिंग सब माध्यम के उदाहरण हैं: ऐसे पदार्थ जिनके कण अपने पड़ोसी कणों को खींच और धकेल सकते हैं।
तरीका हमेशा एक-सा रहता है। कोई स्रोत एक कण को हिलाता है। पड़ोसियों के बीच के बलों से वह कण अगले कण को खींचता या धकेलता है। अगला कण अपने पड़ोसी के साथ वही करता है, और यह क्रम चलता रहता है। हर कण स्रोत की ही गति दोहराता है, बस अपने से पहले वाले कण से थोड़ी देर बाद। कतार में आगे बढ़ती यही छोटी-सी देरी हमें तरंग के चलने के रूप में दिखती है।
इसीलिए तरंगें इतनी काम की हैं। एक बाल्टी पदार्थ भी यहाँ से वहाँ ले जाए बिना कमरे, सागर या पूरे ग्रह में ऊर्जा और सूचना भेजी जा सकती है। फ़ोन की आवाज़, गिटार का तार, भूकंप और शिक्षक की आवाज़ सब ऐसे ही काम करते हैं।
जिन तरंगों को चलने के लिए पदार्थ का माध्यम चाहिए, जैसी इस सिमुलेशन की दो तरंगें, उन्हें यांत्रिक तरंगें कहते हैं। प्रकाश अलग है, क्योंकि उसे माध्यम नहीं चाहिए, पर इस पृष्ठ में केवल यांत्रिक तरंगों की बात है।
अनुप्रस्थ तरंग: कण आड़े दिशा में हिलते हैं
अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण तरंग के चलने की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। सिमुलेशन की ऊपरी पंक्ति में तरंग बाएँ से दाएँ चल रही है, जबकि रस्सी का हर मनका ऊपर-नीचे हो रहा है।
अनुप्रस्थ तरंग का आकार बिल्कुल साफ़ होता है। सबसे ऊँचे बिंदु शृंग कहलाते हैं, सबसे नीचे बिंदु गर्त, और जिस रेखा पर रस्सी विरामावस्था में रहती है वह साम्य रेखा है। इस रेखा से सबसे बड़े पार्श्व विस्थापन को आयाम कहते हैं। सिमुलेशन में आप देखेंगे कि शृंग और गर्त चल रहे हैं, पर नारंगी मनका सिर्फ़ ऊपर-नीचे हो रहा है।
कोई माध्यम अनुप्रस्थ तरंग तभी ले जा सकता है जब एक परत को दूसरी परत पर खिसकाने का प्रयास करने पर वह प्रतिरोध करे। खिसकने के विरुद्ध इस प्रत्यास्थ प्रतिरोध को अपरूपण दृढ़ता कहते हैं और यह ठोसों में होती है। द्रवों और गैसों में नहीं होती, इसलिए द्रव या गैस के भीतर अनुप्रस्थ तरंग नहीं चल सकती। रस्सी, गिटार का तार और ढोल की खाल इसलिए काम करते हैं कि वे तनी हुई होती हैं।
प्रकाश और रेडियो तरंगें भी अनुप्रस्थ होती हैं, पर वह अलग कहानी है: उन्हें माध्यम नहीं चाहिए, और जो दोलन करते हैं वे कण नहीं बल्कि विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र हैं। इस अध्याय में रस्सी की तस्वीर याद रखें।
अनुदैर्घ्य तरंग: कण उसी रेखा में आगे-पीछे डोलते हैं
अनुदैर्घ्य तरंग में कण तरंग के चलने की उसी रेखा में आगे-पीछे कंपन करते हैं। दूसरी पंक्ति में हर बिंदु केवल दाएँ-बाएँ खिसक रहा है, फिर भी भीड़ और खाली जगह का पैटर्न दाईं ओर बढ़ रहा है।
जहाँ कण सटे हुए हैं, वहाँ दाब और घनत्व सामान्य से अधिक होता है। उस क्षेत्र को संपीडन कहते हैं। जहाँ कण दूर-दूर हैं, वहाँ दाब और घनत्व सामान्य से कम होता है। उस क्षेत्र को विरलन कहते हैं। अनुदैर्घ्य तरंग संपीडनों और विरलनों की एक के बाद एक आती कतार है।
मेज़ पर रखी स्लिंकी (स्प्रिंग) से आप इसे खुद बना सकते हैं: कुछ फेरों को धकेलकर एक साथ दबाएँ और छोड़ दें। दबे हुए फेरों का एक गुच्छा स्प्रिंग पर दौड़ता है, उसके पीछे एक खिंचा हुआ हिस्सा। हवा में ध्वनि भी यही है, बस फेरों की जगह हवा के अणु हैं। स्पीकर या स्वरित्र द्विभुज दबे और फैले क्षेत्र बनाता है।
अनुदैर्घ्य तरंग दबाने और छोड़ने से काम करती है, इसलिए यह ठोस, द्रव और गैस तीनों में चल सकती है। हर पदार्थ दबाए जाने का प्रतिरोध करता है। इसीलिए दीवार के पार, पानी के नीचे और खुली हवा में आवाज़ सुनाई देती है।
मुख्य बात: तरंग चलती है, कण नहीं
लगभग हर कोई पहले सोचता है कि नारंगी कण शृंग या संपीडन के साथ दाईं ओर बह जाएगा। इस गलत तस्वीर को सुधारने के लिए ही यह सिमुलेशन है।
नारंगी कण से गुज़रती बिंदीदार रेखा देखें। कोई विक्षोभ न हो तो कण जहाँ रहता, वह वही जगह है। कण हमेशा इसी रेखा पर लौट आता है। रस्सी में वह आयाम के बराबर ऊपर जाता है, आयाम के बराबर नीचे आता है, फिर ऊपर जाता है। हवा में वह आगे जाता है, पीछे आता है, फिर आगे जाता है। किसी भी स्थिति में वह दाईं ओर बहकर नहीं जाता।
जो दाईं ओर चलता है वह पैटर्न है: शृंग की स्थिति, संपीडन की स्थिति। पैटर्न तरंग की चाल v से आगे बढ़ता है, इसलिए एक शृंग पूरी स्क्रीन पार कर सकता है जबकि हर कण अपनी जगह से केवल कुछ सेंटीमीटर हिलता है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसका बड़ा मतलब है। मैदान के उस पार से ध्वनि आप तक पहुँचे तो स्पीकर से आपके कान तक हवा बहकर नहीं आई। स्पीकर के पास रखी मोमबत्ती की लौ हल्की काँपती है, पर बुझती नहीं। तरंग ने आपके कान के पर्दे तक ऊर्जा पहुँचाई, और जिस हवा ने उसे ढोया वह अब भी लगभग अपनी जगह पर है।
ज़रूरी शब्द, आसान भाषा में
प्रश्नपत्र में आने वाले शब्द प्रतीक और मात्रक के साथ नीचे हैं।
| शब्द | प्रतीक | आसान भाषा में अर्थ | मात्रक |
|---|---|---|---|
| आयाम | A | कण का साम्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन | m |
| तरंगदैर्घ्य | λ | दो क्रमागत समान कला वाले बिंदुओं की दूरी, जैसे शृंग से शृंग | m |
| आवृत्ति | f | प्रति सेकंड पूरे कंपनों (या किसी बिंदु से गुज़रती तरंगों) की संख्या | Hz |
| आवर्तकाल | T | एक पूरे कंपन का समय, T = 1/f | s |
| तरंग की चाल | v | माध्यम में पैटर्न कितनी तेज़ी से आगे बढ़ता है | m/s |
| शृंग | – | अनुप्रस्थ तरंग का सबसे ऊँचा बिंदु | – |
| गर्त | – | अनुप्रस्थ तरंग का सबसे नीचा बिंदु | – |
| संपीडन | – | वह क्षेत्र जहाँ कण सघन हैं, दाब अधिक | – |
| विरलन | – | वह क्षेत्र जहाँ कण दूर-दूर हैं, दाब कम | – |
एक तरंगदैर्घ्य कैसे मापें
तरंगदैर्घ्य एक पूरी तरंग की लंबाई है। अनुप्रस्थ तरंग में इसे एक शृंग से अगले शृंग तक, या एक गर्त से अगले गर्त तक मापा जा सकता है। अनुदैर्घ्य तरंग में एक संपीडन के केंद्र से अगले संपीडन के केंद्र तक, या एक विरलन से अगले विरलन तक मापते हैं।
नियम यह है कि आप जो दो बिंदु चुनें वे समान कला वाले हों, यानी एक ही क्षण दोनों बिंदुओं के कण ठीक एक जैसा कर रहे हों। एक शृंग और उसके बाद का गर्त समान कला वाले नहीं हैं, और एक संपीडन व उसके बाद का विरलन भी नहीं। उनकी दूरी आधा तरंगदैर्घ्य है। सिमुलेशन में λ लिखे तीर हमेशा समान कला वाले बिंदुओं को जोड़ते हैं।
डिफ़ॉल्ट मानों पर तरंगदैर्घ्य 3 m है, इसलिए एक संपीडन और उसके बाद का विरलन 1.5 m दूर हैं, जो आधा तरंगदैर्घ्य है।
आवृत्ति, आवर्तकाल और सूत्र v = fλ
आवृत्ति बताती है कि हर कण एक सेकंड में कितनी बार पूरा कंपन करता है। इसका मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है। 1 Hz का मतलब है प्रति सेकंड एक पूरा ऊपर-नीचे (या आगे-पीछे) कंपन। आवर्तकाल एक कंपन का समय है, इसलिए दोनों एक-दूसरे के व्युत्क्रम हैं।
अब स्रोत के एक पूरे कंपन के बारे में सोचें। उस समय T में पहला शृंग स्रोत से निकलकर ठीक एक तरंगदैर्घ्य आगे बढ़ चुका होता है, तभी अगला शृंग जन्म लेता है। यानी तरंग समय T में दूरी λ तय करती है। चाल दूरी भाग समय होती है, और इसी से तरंग समीकरण मिलता है।
T = 1/fआवर्तकाल आवृत्ति का व्युत्क्रम है
v = λ/Tएक आवर्तकाल में एक तरंगदैर्घ्य
v = fλतरंग समीकरण
λ = v/fसिमुलेशन के मापन में यही रूप इस्तेमाल हुआ है
आपके स्लाइडरों के लिए सूत्र क्या कहता है
चाल स्थिर रखकर आवृत्ति बदलें तो तरंगदैर्घ्य उलटी दिशा में बदलता है। आवृत्ति दोगुनी करें तो तरंगदैर्घ्य आधा हो जाता है। ऐसा इसलिए है कि चाल माध्यम तय करता है, स्रोत नहीं।
चाल माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है: रस्सी कितनी तनी है और प्रति मीटर कितनी भारी है, या हवा कितनी कठोर और कितनी सघन है। तेज़ हिलाने से तरंग तेज़ नहीं चलती, बस उतनी ही लंबाई में ज़्यादा लहरें समा जाती हैं। सिमुलेशन में चाल का स्लाइडर अलग माध्यम चुनने जैसा है (ज़्यादा तनी रस्सी, या गर्म दिन)।
तरंग एक माध्यम से दूसरे में जाती है तो आवृत्ति वही रहती है, क्योंकि उसे स्रोत तय करता है। चाल बदलती है, इसलिए v = fλ सही रखने के लिए तरंगदैर्घ्य को बदलना पड़ता है। नीचे प्रश्न 9 में हवा से पानी में जाती ध्वनि के लिए यह दिखाया गया है।
ध्वनि की चाल और वह किस पर निर्भर है
हवा में ध्वनि की चाल 0 °C पर लगभग 331 m/s होती है और हर डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर लगभग 0.6 m/s बढ़ती है। मोटा नियम है v ≈ 331 + 0.6θ, जहाँ θ °C में है। 20 °C पर यह लगभग 343 m/s देता है। पाठ्यपुस्तकों में तापमान के अनुसार लगभग 330 से 345 m/s के बीच मान मिलते हैं, इसलिए इन्हें अनुमानित मानें।
गैसों की तुलना में द्रवों में ध्वनि तेज़ चलती है और ठोसों में और भी तेज़, क्योंकि कण पास-पास होते हैं और जल्दी अपनी जगह लौट आते हैं। मान अनुमानित हैं और तापमान पर निर्भर करते हैं, पर पानी में लगभग 1480 m/s और इस्पात में कई हज़ार मीटर प्रति सेकंड होती है।
ध्वनि तरंग को ज्या वक्र की तरह क्यों बनाते हैं
अनुदैर्घ्य तरंग देखने में ज्या वक्र जैसी नहीं होती। वह बिंदुओं की एक कतार है, कहीं सघन, कहीं विरल। फिर भी किताबों और ऑसिलोस्कोप में ध्वनि हमेशा चिकनी लहर की तरह बनाई जाती है। क्यों?
क्योंकि वह लहर एक ग्राफ़ है, चित्र नहीं। हर कण के लिए, साम्य अवस्था में उसकी स्थिति के सापेक्ष यह बनाएँ कि वह साम्य स्थिति से कितना खिसका (दाएँ खिसके तो ऊपर, बाएँ खिसके तो नीचे)। हर कण स्रोत की चिकनी आगे-पीछे गति अपने पड़ोसी से थोड़ी देर बाद दोहराता है, इसलिए ग्राफ़ ज्या वक्र बनता है।
सिमुलेशन में ग्राफ़ वाले बॉक्स पर टिक करके पंक्तियों का मिलान करें। वक्र जहाँ नीचे की ओर शून्य पार करता है, वहाँ बाईं ओर के कण दाएँ और दाईं ओर के कण बाएँ खिसके होते हैं, इसलिए सब उस बिंदु की ओर दब जाते हैं: संपीडन (लाल बिंदु)। वक्र ऊपर की ओर शून्य पार करे तो पड़ोसी उस बिंदु से दूर हटते हैं: विरलन (हरा बिंदु)। वक्र के शिखर और गर्त सबसे बड़े विस्थापन के स्थान हैं, जहाँ घनत्व सामान्य रहता है।
इसलिए संपीडन विस्थापन ग्राफ़ के शिखर पर नहीं होता। वह वहाँ होता है जहाँ विस्थापन शून्य है और ढलान सबसे तीखी है। इसे गड़बड़ा देना परीक्षा का पुराना जाल है।
सिमुलेशन में खुद आज़माएँ
पहले अनुमान लगाएँ, फिर चलाकर मिलान करें।
- डिफ़ॉल्ट मान रहने दें (f = 1 Hz, v = 3 m/s, A = 6 cm)। तरंग के नारंगी कण तक पहुँचने का इंतज़ार करें। मापन में λ = 3 m और T = 1 s दिखेगा। जाँचें कि दो पास-पास के शृंग सचमुच 3 m दूर हैं।
- किसी भी क्षण रोककर दोनों पंक्तियों में नारंगी कण की बिंदीदार रेखा देखें। चलाकर और रोककर कुछ फ्रेम आगे बढ़ें। कण कभी अपनी रेखा से बहुत दूर नहीं जाता।
- गति 0.25× करके दाईं ओर का ग्राफ़ देखें। नारंगी बिंदु एक ज्या वक्र पर सरकता है। एक पूरा उभार ठीक T सेकंड लेता है।
- आवृत्ति 2 Hz करें। कुछ दबाने से पहले नया तरंगदैर्घ्य अनुमानित करें। फिर मापन देखें: वह आधा होना चाहिए।
- 0.5 Hz पर तरंग की चाल 4 m/s करें। λ का अनुमान लगाएँ, फिर पढ़ें। उसके बाद 2 Hz पर चाल 1.5 m/s करके सघन लहरें देखें।
- केवल आयाम बदलें। रस्सी की ऊँचाई और संपीडन की तीव्रता बदलेगी, पर λ और T वही रहेंगे। आयाम तरंगदैर्घ्य या चाल को प्रभावित नहीं करता।
- ग्राफ़ चालू करके बिंदुओं वाली पंक्ति और ग्राफ़ वाली पंक्ति, दोनों में एक संपीडन और एक विरलन ढूँढें। ऊपर के भाग का शून्य पार करने वाला नियम मिलाकर देखें।
हल किए गए प्रश्न
हर हल में पहले ज्ञात राशियाँ, फिर सूत्र, फिर मान रखना। परीक्षा में इसी क्रम में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
प्रश्न 1: सिमुलेशन खुलते समय के मान
एक तरंग स्रोत की आवृत्ति 1 Hz है और माध्यम में तरंग की चाल 3 m/s है। आवर्तकाल और तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
T = 1/f = 1 / 1 = 1 s। λ = v/f = 3 / 1 = 3 m। पृष्ठ खुलते समय मापन पैनल में यही मान होते हैं।
प्रश्न 2: रस्सी को दोगुनी तेज़ी से हिलाएँ
उसी रस्सी (v = 3 m/s) को अब 2 Hz पर हिलाया जाता है। नया तरंगदैर्घ्य और आवर्तकाल क्या होंगे?
λ = v/f = 3 / 2 = 1.5 m। T = 1/f = 1 / 2 = 0.5 s। चाल वही रही, इसलिए तरंगदैर्घ्य पहले का आधा है।
प्रश्न 3: सिमुलेशन में सबसे लंबा और सबसे छोटा तरंगदैर्घ्य
स्लाइडर आवृत्ति 0.5 से 2 Hz और चाल 1.5 से 4 m/s तक जाते हैं। सबसे लंबा और सबसे छोटा तरंगदैर्घ्य कितना रखा जा सकता है?
सबसे लंबा: सबसे धीमा कंपन, सबसे तेज़ तरंग। λ = 4 / 0.5 = 8 m। सबसे छोटा: सबसे तेज़ कंपन, सबसे धीमी तरंग। λ = 1.5 / 2 = 0.75 m।
प्रश्न 4: रस्सी पर लहरें गिनकर चाल निकालना
एक छात्र रस्सी हिलाकर 10 s में 15 पूरी तरंगें बनाता है। हर तरंग 2 m लंबी है। आवृत्ति, आवर्तकाल और तरंग की चाल ज्ञात कीजिए।
f = 15 / 10 = 1.5 Hz। T = 10 / 15 = 0.67 s। v = fλ = 1.5 × 2 = 3 m/s।
प्रश्न 5: एक स्वर का तरंगदैर्घ्य
256 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज उस हवा में ध्वनि भेजता है जहाँ ध्वनि की चाल लगभग 343 m/s है। तरंगदैर्घ्य क्या है?
λ = v/f = 343 / 256 = 1.34 m। यानी एक संपीडन से अगले संपीडन की दूरी लगभग 1.34 m है।
प्रश्न 6: श्रव्यता के दोनों सिरों के तरंगदैर्घ्य
मनुष्य मोटे तौर पर 20 Hz से 20,000 Hz तक सुनता है। ध्वनि की चाल लगभग 343 m/s लेकर सबसे नीची और सबसे ऊँची श्रव्य ध्वनि के तरंगदैर्घ्य निकालिए।
सबसे नीची: λ = 343 / 20 = 17.15 m। सबसे ऊँची: λ = 343 / 20,000, लगभग 1.71 cm। नीचे स्वर की तरंगें बस से भी लंबी हैं, ऊँचे स्वर की तरंगें उँगली की नोक जितनी छोटी।
प्रश्न 7: कण असल में कितना रास्ता तय करता है?
डिफ़ॉल्ट सिमुलेशन में आयाम 6 cm और λ = 3 m है। एक पूरे आवर्तकाल में तरंग का पैटर्न कितना आगे बढ़ता है, और नारंगी कण कुल कितना पथ तय करता है?
पैटर्न एक तरंगदैर्घ्य, 300 cm, आगे बढ़ता है। कण साम्य रेखा से A तक ऊपर जाता है, रेखा पर लौटता है, −A तक नीचे जाता है और फिर लौटता है: कुल पथ 4A = 4 × 6 = 24 cm। आवर्तकाल पूरा होने पर कण का नेट विस्थापन शून्य है। तरंग का पैटर्न कण के पथ से 12.5 गुना ज़्यादा आगे बढ़ता है।
प्रश्न 8: बिजली की चमक और बादल की गरज
आप चमक देखने के 4 s बाद बादल की गरज सुनते हैं। ध्वनि की चाल लगभग 343 m/s मानकर और प्रकाश को तात्क्षणिक मानकर बताइए कि बिजली कितनी दूर गिरी।
d = v × t = 343 × 4 = 1,372 m, यानी एक किलोमीटर से थोड़ी ज़्यादा दूर। प्रकाश लगभग तुरंत पहुँच जाता है; ध्वनि संपीडनों का अनुदैर्घ्य स्पंद है, जिसे यह दूरी पार करने में ये कुछ सेकंड लगते हैं।
प्रश्न 9: हवा और पानी में वही स्वर
एक स्पीकर 440 Hz का स्वर बजाता है। ध्वनि की चाल हवा में लगभग 343 m/s और पानी में लगभग 1,480 m/s है। तरंगदैर्घ्यों की तुलना कीजिए।
आवृत्ति 440 Hz ही रहती है, क्योंकि उसे स्रोत तय करता है। हवा में λ = 343 / 440 = 0.78 m। पानी में λ = 1,480 / 440 = 3.36 m। पानी में ध्वनि लगभग 4.3 गुना तेज़ है, इसलिए तरंगदैर्घ्य भी उतना ही गुना लंबा है।
प्रश्न 10: नारंगी कण कब हिलना शुरू करता है?
सिमुलेशन में नारंगी कण स्रोत से 6 m दूर है और तरंग की चाल 3 m/s है। वह कब हिलना शुरू करता है, और उस क्षण वह क्या कर रहा होता है?
विक्षोभ उस तक t = x/v = 6 / 3 = 2 s बाद पहुँचता है। उससे पहले कण बिल्कुल स्थिर है, भले ही स्रोत t = 0 से हिल रहा हो। अग्र भाग पहुँचने पर कण स्रोत की गति 2 s देर से दोहराने लगता है, जो ठीक 2 आवर्तकाल पीछे है।
अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य आमने-सामने
कौन-सी है, इसका संदेह हो तो यह तालिका देखें।
| विशेषता | अनुप्रस्थ तरंग | अनुदैर्घ्य तरंग |
|---|---|---|
| कण का कंपन | तरंग की दिशा के लंबवत | तरंग की दिशा में |
| तरंग का आकार | शृंग और गर्त | संपीडन और विरलन |
| अपरूपण दृढ़ता चाहिए? | हाँ, इसलिए ठोसों में (और द्रव की सतह पर) | नहीं, ठोस, द्रव और गैस में चलती है |
| एक तरंगदैर्घ्य | शृंग से शृंग या गर्त से गर्त | संपीडन से संपीडन या विरलन से विरलन |
| रोज़मर्रा के उदाहरण | रस्सी या तार की लहर, गिटार का तार, भूकंप की S-तरंग | हवा में ध्वनि, धकेली गई स्लिंकी, भूकंप की P-तरंग |
वे गलतियाँ जो लगभग सब करते हैं
परीक्षा से पहले इन्हें जाँच लें, अंक बचेंगे।
- कणों को तरंग के साथ चलता मान लेना। वे केवल एक निश्चित साम्य स्थिति के आसपास दोलन करते हैं। पैटर्न और ऊर्जा चलते हैं, पदार्थ नहीं।
- शृंग और गर्त के बीच, या संपीडन और विरलन के बीच तरंगदैर्घ्य मापना। यह केवल आधा तरंगदैर्घ्य है। हमेशा समान कला वाले बिंदु लें।
- ऊँची आवृत्ति से तरंग तेज़ चलती है कहना। किसी दिए माध्यम में चाल निश्चित है। आवृत्ति बढ़ने पर तरंगदैर्घ्य घटता है, चाल नहीं बढ़ती।
- हवा के चित्र में ध्वनि को अनुप्रस्थ तरंग की तरह बनाना। वक्र विस्थापन का ग्राफ़ है; हवा स्वयं चलने की दिशा में ही कंपन करती है।
- संपीडन को विस्थापन ग्राफ़ के शिखर पर रखना। संपीडन वहाँ है जहाँ विस्थापन शून्य है और वक्र नीचे की ओर ढलान लिए है।
- आयाम और तरंगदैर्घ्य को मिला देना। आयाम बताता है कंपन कितना बड़ा है, तरंगदैर्घ्य बताता है एक तरंग कितनी लंबी है। दोनों स्वतंत्र हैं।
- नए माध्यम में जाने पर आवृत्ति बदलने की बात सोचना। आवृत्ति नहीं बदलती; चाल और तरंगदैर्घ्य बदलते हैं।
- आवृत्ति का मात्रक सेकंड लिखना। आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज़ है, आवर्तकाल का मात्रक सेकंड।
असल ज़िंदगी में ये तरंगें कहाँ हैं
दोनों तरह की तरंगें आपके चारों ओर हैं।
- बातचीत और संगीत: आपकी आवाज़ हवा में संपीडन-विरलन बनाती है, यह अनुदैर्घ्य तरंग है जो कान के पर्दे में कंपन पैदा करती है।
- भूकंप: तेज़ P-तरंग अनुदैर्घ्य है और पहले पहुँचती है। धीमी S-तरंग अनुप्रस्थ है और बाद में आती है। दोनों के पहुँचने के अंतर से भूकंप कितनी दूर आया, यह पता चलता है।
- वाद्य यंत्र: गिटार के तार में अनुप्रस्थ तरंगें चलती हैं, पर उससे हवा में बनने वाली ध्वनि अनुदैर्घ्य होती है।
- अल्ट्रासाउंड: श्रव्य सीमा से बहुत ऊँची आवृत्ति की ध्वनि शरीर में जाकर प्रतिध्वनि बनकर लौटती है, जिससे शिशु या अंग की तस्वीर बनती है।
- सोनार: जहाज़ पानी के नीचे ध्वनि भेजकर प्रतिध्वनि का समय नापते हैं और पानी में ध्वनि की चाल से समुद्र तल का नक्शा बनाते हैं।
- स्टेडियम की लहर और झंडे की लहरें: अनुप्रस्थ पैटर्न, जिनमें हर आदमी या कपड़े का हर टुकड़ा बस ऊपर-नीचे हिलता है।
परीक्षा कोना: CBSE और NCERT
इस विषय पर आम तौर पर परिभाषाएँ (अनुप्रस्थ, अनुदैर्घ्य, तरंगदैर्घ्य), अंतर की तालिका, v = fλ से संख्यात्मक प्रश्न, और हवा में ध्वनि अनुप्रस्थ क्यों नहीं हो सकती इसका स्पष्टीकरण पूछा जाता है। जब भी संभव हो, नामांकित चित्र बनाएँ: एक चित्र में शृंग, गर्त, तरंगदैर्घ्य और आयाम, दूसरे में संपीडन और विरलन।
एक नमूना प्रश्न
एक स्लिंकी को 1 Hz आवृत्ति पर धकेला और खींचा जाता है और संपीडन उसके साथ 3 m/s की चाल से आगे बढ़ते हैं।
(क) अनुदैर्घ्य तरंग किसे कहते हैं? (ख) गैस में अनुदैर्घ्य तरंग चल सकती है पर अनुप्रस्थ क्यों नहीं? (ग) क्रमागत दो संपीडनों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए। (घ) एक छात्रा कहती है कि फेरे तरंग के साथ स्लिंकी पर आगे बढ़ते हैं। क्या वह सही है? समझाइए।
उत्तर की रूपरेखा: (क) कण तरंग की दिशा में कंपन करते हैं। (ख) गैस दबाव का प्रतिरोध करती है पर खिसकने का नहीं। (ग) λ = v/f = 3 / 1 = 3 m। (घ) नहीं: हर फेरा अपनी साम्य स्थिति के आसपास दोलन करता है; पैटर्न चलता है, फेरे नहीं।
रिविज़न: आख़िरी पल का सार
पाँच मिनट हों तो बस यह सूची पढ़ लें।
- तरंग ऊर्जा और पैटर्न को आगे ले जाती है। माध्यम के कण केवल अपनी साम्य स्थितियों के आसपास दोलन करते हैं।
- अनुप्रस्थ: कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। भाग: शृंग, गर्त। उदाहरण: रस्सी, S-तरंग।
- अनुदैर्घ्य: कण तरंग की दिशा में कंपन करते हैं। भाग: संपीडन, विरलन। उदाहरण: ध्वनि, P-तरंग।
- तरंगदैर्घ्य λ: दो समान कला वाले बिंदुओं की दूरी। आवृत्ति f हर्ट्ज़ में। आवर्तकाल T = 1/f सेकंड में।
- तरंग समीकरण: v = fλ। किसी दिए माध्यम में v निश्चित है, इसलिए f बढ़ने पर λ घटता है।
- नए माध्यम में जाने पर f वही रहती है, v और λ साथ-साथ बदलते हैं।
- विस्थापन-स्थिति ग्राफ़ में हर अनुदैर्घ्य तरंग ज्या वक्र जैसी दिखती है; संपीडन शून्य पार करने के बिंदु पर होता है, शिखर पर नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुप्रस्थ और अनुदैर्घ्य तरंग में क्या अंतर है?
अनुप्रस्थ तरंग में माध्यम के कण तरंग की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जिससे शृंग और गर्त बनते हैं। अनुदैर्घ्य तरंग में कण तरंग की दिशा में कंपन करते हैं, जिससे संपीडन और विरलन बनते हैं। रस्सी की लहर अनुप्रस्थ है; हवा में ध्वनि अनुदैर्घ्य है।
क्या कण तरंग के साथ चलते हैं?
नहीं। हर कण केवल अपनी साम्य स्थिति के आसपास दोलन करता है। तरंग का पैटर्न और उसकी ऊर्जा चलते हैं, पर कण वहीं लौट आते हैं जहाँ से शुरू हुए थे। सिमुलेशन की बिंदीदार रेखा और नारंगी कण यह सीधे दिखाते हैं।
ध्वनि अनुप्रस्थ तरंग है या अनुदैर्घ्य?
हवा में ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है। हवा के कण ध्वनि के चलने की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं और संपीडन व विरलन बनाते हैं। गैस में खिसकने का प्रतिरोध नहीं होता, इसलिए उसमें अनुप्रस्थ तरंग नहीं चल सकती।
संपीडन और विरलन क्या हैं?
अनुदैर्घ्य तरंग का वह क्षेत्र जहाँ कण सघन होते हैं और दाब सामान्य से अधिक होता है, संपीडन कहलाता है। जहाँ कण दूर-दूर होते हैं और दाब सामान्य से कम होता है, वह विरलन कहलाता है।
दोनों प्रकार की तरंगों का तरंगदैर्घ्य कैसे मापते हैं?
अनुप्रस्थ तरंग में एक शृंग से अगले शृंग (या गर्त से गर्त) तक मापें। अनुदैर्घ्य तरंग में एक संपीडन से अगले संपीडन तक मापें। हमेशा समान कला वाले बिंदु लें, वरना केवल आधा तरंगदैर्घ्य मिलेगा।
चाल, आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य को जोड़ने वाला सूत्र क्या है?
v = fλ, जहाँ v तरंग की चाल m/s में, f आवृत्ति Hz में और λ तरंगदैर्घ्य m में है। यह इसलिए बनता है कि तरंग एक आवर्तकाल T = 1/f में एक तरंगदैर्घ्य चलती है।
आवृत्ति बढ़ने पर तरंगदैर्घ्य क्यों घटता है?
चाल माध्यम तय करता है। v वही रहे और f बढ़े तो λ = v/f घटेगा ही। स्रोत तरंगें जल्दी-जल्दी छोड़ता है, इसलिए हर तरंग छोटी लंबाई में समा जाती है।
अनुदैर्घ्य तरंग को ज्या वक्र की तरह क्यों बनाते हैं?
वक्र माध्यम का चित्र नहीं, बल्कि हर कण के साम्य स्थिति से विस्थापन का उसकी स्थिति के सापेक्ष ग्राफ़ है। हर कण स्रोत का चिकना दोलन दोहराता है, इसलिए ग्राफ़ ज्या वक्र जैसा बनता है।
क्या नए माध्यम में जाने पर तरंग की आवृत्ति बदल जाती है?
नहीं। आवृत्ति स्रोत तय करता है, इसलिए वह वही रहती है। माध्यम बदलने पर चाल बदलती है और उसी अनुपात में तरंगदैर्घ्य बदलता है, जिससे v = fλ सही रहता है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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भौतिकी के और एनिमेशन
कक्षा 10 · 12
प्रकाश का अपवर्तन
प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते हैं, अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, क्रांतिक कोण व पूर्ण आंतरिक परावर्तन — आसान भाषा में, इंटरैक्टिव एनिमेशन और हल उदाहरण सहित।
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ओम का नियम क्या है, सूत्र V=IR, V-I ग्राफ और श्रेणी-पार्श्व क्रम — विभवांतर व प्रतिरोध बदलकर धारा देखें। कक्षा 10 व 12 के हल प्रश्न।
कक्षा 11 · JEE
प्रक्षेप्य गति
प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं? कोण व वेग बदलकर पथ देखें — उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई, क्षैतिज परास के सूत्र व हल उदाहरण। कक्षा 11, JEE/NEET।
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सरल लोलक किसे कहते हैं, आवर्तकाल का सूत्र T=2π√(l/g), सरल आवर्त गति — लंबाई बदलकर देखें। g ज्ञात करने के हल उदाहरण।
कक्षा 12
विद्युत क्षेत्र
विद्युत क्षेत्र किसे कहते हैं, तीव्रता का सूत्र व SI मात्रक, क्षेत्र रेखाओं के गुण — आवेश रखकर रेखाएँ देखें। कूलॉम के नियम के हल उदाहरण।
कक्षा 11 · 12
तरंगों का व्यतिकरण
अध्यारोपण का सिद्धांत, संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की शर्तें, फ्रिंज चौड़ाई β=λD/d — दो स्रोत खिसकाकर देखें। कक्षा 11-12 के हल उदाहरण।
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मुक्त पतन किसे कहते हैं, मुक्त पतन का त्वरण और सूत्र क्या है: सिक्का और पंख गिराकर खुद देखें, हवा के साथ और बिना हवा के। हल किए गए उदाहरणों सहित।
कक्षा 10 · 12
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
उत्तल लेंस और अवतल लेंस के किरण आरेख इंटरैक्टिव: बिंब खिसकाकर सभी छह स्थितियाँ देखें, लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन और लेंस की क्षमता तुरंत पढ़ें।
कक्षा 9 · 11
न्यूटन के गति के नियम
न्यूटन के गति के तीनों नियम, जड़त्व, संवेग, F = ma, आवेग और क्रिया-प्रतिक्रिया: ट्रॉली धकेलकर खुद देखें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ (कक्षा 9, 11)।
कक्षा 10 · 12
गोलीय दर्पण किरण आरेख
अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।
कक्षा 10 · 12
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।
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संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
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सी-सॉ पर भार खिसकाकर बल आघूर्ण M = F × d देखें। आघूर्णों का सिद्धांत, उत्तोलक के तीन वर्ग और यांत्रिक लाभ हल किए गए प्रश्नों के साथ सीखें।
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छड़ और पट्टिका पर द्रव्यमान खिसकाकर द्रव्यमान केंद्र x = Σmx/Σm देखें। आधार कहाँ रखें कि छड़ संतुलित रहे, बस कब उलटती है, स्थायी, अस्थायी और उदासीन संतुलन: सिमुलेशन और हल उदाहरणों सहित।
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कमानी-द्रव्यमान की सरल आवर्त गति
कमानी से लटके द्रव्यमान की सरल आवर्त गति खुद चलाकर देखें। हुक का नियम, T = 2π√(m/k), ऊर्जा रूपांतरण, श्रेणी व समानांतर कमानी, हल किए गए प्रश्न और CBSE अभ्यास।
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सदिशों का योग: त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम
दो सदिशों का परिणामी, त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम, घटक, नदी में नाव और बारिश में छाते का आपेक्षिक वेग खुद करके देखें। हल किए प्रश्न और NCERT अभ्यास सहित।
कक्षा 11
सापेक्ष वेग: रेलगाड़ियाँ और नदी पार करना
दो रेलगाड़ियों और नदी पार करते तैराक को खुद चलाकर देखो। सापेक्ष चाल, रेलगाड़ी के पार होने का समय, कोण, बहाव, सबसे कम समय बनाम सबसे छोटा रास्ता, हल के साथ।
कक्षा 11
केपलर के नियम और दीर्घवृत्ताकार कक्षा
उत्केंद्रता स्लाइडर खींचकर कक्षा को लंबा होते देखो। बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल के सेक्टर, आवर्तकाल का नियम T² ∝ a³ और पलायन वेग, हल के साथ।
कक्षा 11
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, g और उपग्रह
दो पिंडों का खिंचाव, व्युत्क्रम वर्ग ग्राफ़, पृथ्वी के ऊपर-नीचे g और उपग्रह की कक्षा खुद चलाकर देखें। कक्षीय चाल, आवर्तकाल, पलायन वेग और हल किए गए सवाल।
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तार और नलियों में अप्रगामी तरंगें
सिमुलेशन में तार छेड़ें और खुली-बंद नलियों में फूँकें। निस्पंद, प्रस्पंद, हार्मोनिक देखें और जानें कि लंबाई, तनाव व तापमान सुर कैसे तय करते हैं, हल किए गए सवालों सहित।
कक्षा 11
अनुनाद नली और ध्वनि की चाल
अनुनाद नली में पानी का स्तर खिसकाकर तेज़ आवाज़ की जगहें खुद खोजें। L1 = λ/4 − e और L2 = 3λ/4 − e देखें, v = 2f(L2 − L1) से ध्वनि की चाल निकालें और हल किए गए सवाल करें।
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विस्पंद: दो पास-पास के सुरों की धड़कन
लगभग बराबर आवृत्ति की दो तरंगें जोड़कर तीव्रता की धड़कन देखें। आवरण देखें, विस्पंद आवृत्ति |f₁ − f₂| पढ़ें, आवाज़ सुनें और गिटार को विस्पंद से मिलाना सीखें, हल किए गए सवालों के साथ।
कक्षा 11 · 12
डॉप्लर प्रभाव: चलता स्रोत, चलता श्रोता और सोनिक बूम
ध्वनि के स्रोत को तेज़-धीमा चलाइए और देखिए तरंगाग्र आगे कैसे सिकुड़ते और पीछे कैसे फैलते हैं। डॉप्लर सूत्र, एम्बुलेंस और ट्रेन के हल किए सवाल और सोनिक बूम सीखिए।
कक्षा 10 · 12
प्रिज़्म, प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण और इंद्रधनुष
सफ़ेद प्रकाश को प्रिज़्म से गुज़ारिए, प्रिज़्म कोण और आपतन कोण बदलिए और स्पेक्ट्रम बनते देखिए। विचलन, न्यूनतम विचलन, विक्षेपण क्षमता और वर्षा की बूँद में इंद्रधनुष बनना हल किए सवालों के साथ सीखिए।
कक्षा 12
किरख़ोफ़ के नियम: संधि नियम और लूप नियम
दो बैटरियों और तीन प्रतिरोधों वाला दो-लूप परिपथ खुद बनाओ। संधि पर धारा को बँटते देखो, विभव के योग को शून्य बनते देखो और किरख़ोफ़ के नियमों के सवाल कदम-दर-कदम हल करना सीखो।
कक्षा 12
व्हीटस्टोन सेतु और मीटर सेतु
व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन बिगाड़कर गैल्वेनोमीटर की सुई को हिलते देखो। P/Q = R/S होने पर सुई शून्य पर आती है। मीटर सेतु में जॉकी खिसकाकर अज्ञात प्रतिरोध मापो, हल किए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 12
एकल झिरी से विवर्तन
झिरी की चौड़ाई और तरंगदैर्घ्य बदलकर देखें कि प्रकाश कैसे फैलता है। तीव्रता का सूत्र I = I₀(sin β/β)², निम्निष्ठ की शर्त a sin θ = mλ और केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई 2λD/a, हल सहित।
कक्षा 10 · 12
आँख के दोष और उनका निवारण
सामान्य, निकट-दृष्टि, दूर-दृष्टि और बढ़ती उम्र वाली आँख बदलकर देखें। प्रतिबिंब रेटिना के आगे या पीछे क्यों बनता है, और कौन-सा लेंस कितनी डायोप्टर से इसे ठीक करता है, सिमुलेशन में समझें।
कक्षा 12
प्रकाश का ध्रुवण: मैलस का नियम और ब्रूस्टर का नियम
ध्रुवक के पीछे विश्लेषक घुमाकर ग्राफ़ में I = I₀cos²θ देखें, फिर काँच पर प्रकाश डालकर ब्रूस्टर कोण खोजें। पोलरॉइड धूप का चश्मा, तीन फ़िल्टर की पहेली और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
संधारित्र का आवेशन और विसर्जन: RC समय स्थिरांक
प्रतिरोध के सहारे संधारित्र को आवेशित और विसर्जित करो। E, R और C बदलकर V = E(1 − e^(−t/RC)) और धारा का वक्र बनते देखो, 63% वाला समय स्थिरांक और संचित ऊर्जा निकालो।
कक्षा 10 · 12
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: छड़ चुंबक, धारावाही तार और परिनालिका
छड़ चुंबक, सीधे धारावाही तार और परिनालिका की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ देखो। कंपास खींचो, धारा पलटो और B = μ₀I/2πr, B = μ₀nI व दाएँ हाथ का नियम सीखो।
कक्षा 12
एसी जनित्र
चुंबक के ध्रुवों के बीच कुंडली घुमाकर एसी जनित्र की साइन तरंग बनते देखिए। N, A, B और rpm बदलकर E₀ = NBAω और आरएमएस मान निकालिए, और जानिए मेन्स 50 Hz क्यों है।
कक्षा 10 · 12
ट्रांसफ़ॉर्मर
ट्रांसफ़ॉर्मर के प्राथमिक और द्वितीयक फेरे बदलकर देखिए वोल्टता कैसे बढ़ती-घटती है। Vs = Vp·Ns/Np, शक्ति संरक्षण, वास्तविक दक्षता और उच्च वोल्टता पर बिजली भेजने का कारण समझिए।
कक्षा 9 · 12
ऊष्मा का स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण
ताँबे, ऐलुमिनियम, काँच या लकड़ी की छड़ गरम करके Q/t = kAΔT/L देखें, बीकर में संवहन धाराओं को घूमते देखें, और T⁴ के अनुसार विकिरित शक्ति का बढ़ना जाँचें। सारणियों और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
प्रकाश-विद्युत प्रभाव: आइंस्टाइन का समीकरण और निरोधी विभव
निर्वात नली में सोडियम, जस्ते या ताँबे की पट्टिका पर किसी भी तरंगदैर्घ्य का प्रकाश डालें। देखें कि देहली आवृत्ति के नीचे इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं निकलते, K = hf − φ निरोधी विभव कैसे तय करता है, और चमक सिर्फ़ धारा क्यों बदलती है।
कक्षा 10 · 12
मोटर प्रभाव: धारावाही तार पर बल और डीसी मोटर
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही तार रखने पर वह कैसे धक्का खाता है, खुद देखिए। B, I, L और कोण बदलिए, फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम की जाँच कीजिए, फिर विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक वाली डीसी मोटर घुमाकर बल-आघूर्ण का ग्राफ़ देखिए।
कक्षा 11 · 12
गैस के अणु और अणुगति सिद्धांत: दाब, तापमान और चाल
डिब्बे में गैस के अणुओं की भागदौड़ देखिए। तापमान बढ़ाइए, गैस बदलिए, आयतन दबाइए और देखिए कि दीवारों पर टक्करों से मिला दाब PV = NkT से मेल खाता है। चाल की तुलना मैक्सवेल-बोल्ट्ज़मान वक्र से कीजिए और वर्ग-माध्य-मूल चाल निकालिए।
कक्षा 12
अर्धचालक डायोड: p–n संधि, I–V वक्र और दिष्टकारी
p–n संधि पर बायस लगाकर देखिए कि अवक्षय परत कैसे सिकुड़ती या फैलती है, आवेश वाहक कैसे पार होते हैं और शॉकली I–V वक्र कैसा बनता है। सिलिकन और जर्मेनियम की तुलना, भंजन और अर्धतरंग दिष्टकारी।
कक्षा 10 · 12
रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता
240 नाभिकों को अनियमित ढंग से क्षय होते देखो, गिनती को N = N₀e^(−λt) पर चलते पाओ, ग्राफ़ से अर्द्ध-आयु निकालो और परखो कि α, β, γ कागज़, एल्युमिनियम और सीसे में कितना घुस पाते हैं।
कक्षा 12
बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉन को n = 1 से 6 कक्षाओं में कूदते देखो, 1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²) से फोटॉन का रंग निकालो, और ऊर्जा आरेख व स्पेक्ट्रम पट्टी पर लाइमन, बामर और पाशन श्रेणी समझो।
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अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
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रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
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सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए
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