ठोस: कण अपनी जगह पर रहकर कंपन करते हैं। ऊष्मा दें तो कंपन बढ़ता है और ताप चढ़ता है
नियंत्रण
किस चरण पर जाएँ
मापन
- ताप
- -20.0°C
- परम ताप
- 253.1K
- अवस्था
- ठोस (बर्फ)
- दी गई ऊष्मा
- 0J/g
- ऊष्मा जा रही है
- कणों की चाल बढ़ाने में
- औसत गतिज ऊर्जा (0 °C की तुलना में)
- 0.93×
- कण: ठोस · द्रव · गैस
- 48 · 0 · 0
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- सिमुलेशन खुलते ही 1 g बर्फ −-20 °C से गर्म होना शुरू कर देती है। बाईं ओर के डिब्बे में ठोस कण जालक पर अपनी जगह कंपन करते हैं। दाईं ओर तापन वक्र पर बिंदु ऊपर चढ़ता है और “दी गई ऊष्मा” की संख्या बढ़ती जाती है।
- 0 °C पर पहुँचते ही वक्र सपाट हो जाता है। मापन पैनल में “ऊष्मा जा रही है” अब आकर्षण तोड़ने में दिखाता है। दी गई ऊष्मा बढ़ रही है, पर ताप और औसत गतिज ऊर्जा वही हैं। डिब्बे में ऊपरी पंक्ति के कण एक-एक करके हरे होते हैं, यानी पिघल रहे हैं।
- सब द्रव हो जाने पर ताप फिर चढ़ता है। 100 °C पर दूसरा सपाट भाग आता है, इस बार बहुत लंबा: नारंगी कण एक-एक करके छूटते हैं और पूरे डिब्बे में दौड़ने लगते हैं। यही क्वथन है। ग्राफ़ के नीचे ऊष्मा-अक्ष पर देखें, यह कितना चौड़ा है।
- कभी भी “रोकें” दबाकर “दी गई ऊष्मा” स्लाइडर खींचें, या “किस चरण पर जाएँ” से कोई चरण चुनें। बर्नर की शक्ति बदलकर देखें कि हर समतल भाग कितनी जल्दी पार होता है। “गर्म करने की जगह ठंडा करें” पर टिक लगाकर उलटी प्रक्रिया देखें: संघनन और जमना।
गर्म कढ़ाई, ठंडी बर्फ और एक अजीब थर्मामीटर
चाय के प्याले से भाप उठती है। फ़्रीज़र से निकली बर्फ थोड़ी देर में पानी बन जाती है। गीली कमीज़ धूप में सूख जाती है, जबकि उसमें पानी उबल तो नहीं रहा था। तीनों घटनाओं में एक ही बात है: पानी एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जा रहा है।
अब एक छोटा प्रयोग सोचिए। एक बर्तन में बर्फ रखकर चूल्हे पर चढ़ा दें और हर मिनट थर्मामीटर पढ़ें। बर्फ पिघलते समय थर्मामीटर काफ़ी देर 0 °C पर टिका रहता है, जबकि चूल्हा पूरी तेज़ी से जल रहा है। पानी उबलते समय वह 100 °C पर अटक जाता है। हम ऊष्मा दे रहे हैं और ताप बढ़ने से मना कर रहा है, तो ऊष्मा जा कहाँ रही है?
ऊपर का सिमुलेशन ठीक यही प्रयोग कणों की नज़र से चलाता है। 1 g बर्फ को −-20 °C से 120 °C की भाप तक पहुँचाने में कुल 3,094 J लगते हैं। हैरानी की बात: इसका 73% केवल उबलते पानी को भाप बनाने में जाता है, और उस दौरान ताप ज़रा भी नहीं बदलता।
पाठ्यपुस्तकों में इसे अवस्था-परिवर्तन और गुप्त ऊष्मा कहा गया है। नीचे हम इसे शुरू से समझेंगे: कण कैसे सजे होते हैं, ऊष्मा मिलने पर वे क्या करते हैं और ताप क्यों रुक जाता है। साथ-साथ सिमुलेशन में हर बात जाँच सकते हैं।
शुरुआत से: सब कुछ छोटे-छोटे गतिमान कणों से बना है
पानी की एक बूँद को बाँटते जाएँ तो अंत में अकेले अणु मिलते हैं। 18 g पानी में लगभग 6.022 × 10²³ अणु होते हैं, इसलिए 1 g में करीब 3.34 × 10²²। सिमुलेशन में 48 बिंदु हैं और हर बिंदु एक विशाल भीड़ का प्रतिनिधि है। चित्र एक मॉडल है, पर उससे दिखता व्यवहार सच्चा है।
द्रव्य का गतिज सिद्धांत तीन सरल बातें कहता है। एक, द्रव्य बहुत छोटे कणों से बना है। दो, कण हर समय गति में रहते हैं, और पदार्थ जितना गर्म, गति उतनी तेज़। तीन, कणों के बीच आकर्षण बल होता है, पास होने पर अधिक और दूर होने पर कम।
दो ऊर्जाओं की रस्साकशी सोचिए। कणों की गतिज ऊर्जा उन्हें बिखेरना चाहती है। उनके बीच का आकर्षण (स्थितिज ऊर्जा) उन्हें साथ रखना चाहता है। जो जीतता है वही अवस्था तय करता है: आकर्षण जीते तो ठोस, दोनों लगभग बराबर हों तो द्रव, गति जीते तो गैस।
और ताप? ताप कणों की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। परम ताप (केल्विन में) दोगुना हो तो औसत गतिज ऊर्जा भी दोगुनी। मापन पैनल की “औसत गतिज ऊर्जा” पंक्ति इसे सीधे दिखाती है, 0 °C को 1 मानकर: −-20 °C पर लगभग 0.93, 100 °C पर 1.37 और 120 °C पर 1.44।
द्रव्य की अवस्थाओं के प्रमुख शब्द
परिभाषा लिखते समय ये शब्द सटीक होने चाहिए। पहले स्तंभ वाले शब्दों पर प्रश्न अक्सर आते हैं।
| शब्द | अर्थ | मान या मात्रक |
|---|---|---|
| गलन | ठोस का ऊष्मा लेकर द्रव में बदलना | बर्फ: 0 °C |
| गलनांक | वह निश्चित ताप (निश्चित दाब पर) जिस पर ठोस द्रव में बदलता है | बर्फ: 273.15 K = 0 °C |
| क्वथन | द्रव का निश्चित ताप पर पूरे आयतन से वाष्प में बदलना | पानी: 100 °C |
| क्वथनांक | वह ताप जिस पर द्रव का वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है | पानी, 1 atm पर: 373.15 K |
| वाष्पन | द्रव का केवल सतह से, किसी भी ताप पर, धीरे-धीरे वाष्प बनना | — |
| संघनन | गैस या वाष्प का ऊष्मा छोड़कर द्रव बनना | ऊष्मा निकलती है |
| जमना (हिमीकरण) | द्रव का ऊष्मा छोड़कर ठोस बनना | ऊष्मा निकलती है |
| ऊर्ध्वपातन | ठोस का द्रव बने बिना सीधे गैस में बदलना | कपूर, आयोडीन, शुष्क बर्फ |
| विशिष्ट ऊष्मा धारिता (c) | 1 g पदार्थ का ताप 1 K बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा | पानी: 4.18 J g⁻¹ K⁻¹ |
| गुप्त ऊष्मा (L) | ताप बदले बिना 1 g पदार्थ की अवस्था बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा | 334 J/g (गलन), 2,260 J/g (वाष्पन) |
ठोस, द्रव और गैस: तीनों आमने-सामने
अंतर रटने की ज़रूरत नहीं। तालिका की हर पंक्ति कणों के चित्र से सीधे निकलती है।
ठोस: ठसाठस और काँपते हुए
ठोस में आकर्षण इतना प्रबल है कि कण अपनी जगह नहीं छोड़ पाते। वे बस अपनी जगह के आसपास थरथराते हैं। इसीलिए लकड़ी का टुकड़ा उसी आकार में रहता है जिसमें आपने रखा।
सिमुलेशन में ठोस कण, थीम के रंग में, पंक्तियों में सजे हैं। गर्म करने पर कंपन बढ़ता है, पर कोई जगह नहीं छोड़ता, जब तक गलनांक पर बंधन टूट न जाएँ।
द्रव: पास-पास, पर फिसलने को स्वतंत्र
द्रव में कण अब भी लगभग सटे हैं, इसलिए आयतन मुश्किल से बदलता है। पर गति की ऊर्जा अब पकड़ को थोड़ा ढीला करने लायक है, और कण एक-दूसरे के बगल से फिसलने लगते हैं। इसीलिए द्रव बर्तन का आकार ले लेता है और उँडेलने पर बहता है।
हरे कण बर्तन की तली में एक ढेर बनाते हैं और ऊपर जगह खाली रहती है। ठोस जितने पास होने के कारण द्रव को दबाकर छोटा करना लगभग असंभव है।
गैस: दूर-दूर, तेज़ और मुक्त
गैस में कण इतने दूर हैं कि आकर्षण का असर लगभग नहीं रहता। वे सीधी रेखा में चलते हैं जब तक दीवार या दूसरे कण से टकरा न जाएँ, इसलिए गैस जिस बर्तन में हो उसे पूरा भर देती है।
नारंगी कण पूरे डिब्बे में दौड़ रहे हैं। असली गैस में दूरियाँ इससे भी कहीं अधिक होती हैं; डिब्बा छोटा है, इसलिए दूरियाँ चित्र में छोटी दिखाई गई हैं।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| कणों की व्यवस्था | नियमित, सटे हुए | पास-पास पर अनियमित | बहुत दूर-दूर |
| कणों की गति | निश्चित स्थानों पर कंपन | एक-दूसरे के बगल से फिसलते हैं | तेज़, सीधी रेखा में |
| आकर्षण बल | बहुत प्रबल | मध्यम | नगण्य |
| आकार | निश्चित | बर्तन जैसा | पूरा बर्तन भरती है |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | निश्चित नहीं |
| संपीड्यता | लगभग नहीं | बहुत कम | आसानी से दबती है |
| घनत्व | प्रायः सबसे अधिक | ठोस के आसपास | बहुत कम |
| बहाव | नहीं | हाँ | हाँ |
पानी का तापन वक्र: पाँच भाग
सिमुलेशन के दाएँ ग्राफ़ में x-अक्ष पर 1 g पानी को दी गई ऊष्मा और y-अक्ष पर ताप है। रेखा पाँच भागों में टूटती है: दो ढलान, एक सपाट भाग, फिर एक और सपाट भाग और अंत में एक ढलान।
इन्हें क्रम से पढ़ें। ढलान पर ताप बढ़ रहा है और कण तेज़ हो रहे हैं। सपाट भाग पर ताप और औसत गति स्थिर है, पर अवस्था बदल रही है। इन दोनों में फ़र्क करना पूरे अध्याय की कुंजी है।
भाग 1: बर्फ −-20 °C से 0 °C (ढलान)
ठोस बर्फ गर्म हो रही है। इसकी विशिष्ट ऊष्मा 2.1 J g⁻¹ K⁻¹ है, इसलिए -20 °C बढ़ाने में 2.1 × -20 = 42 J लगते हैं। सबसे बाईं ओर का यह छोटा ढलान मुश्किल से दिखता है, क्योंकि वह x-अक्ष की चौड़ाई के दो प्रतिशत से भी कम है।
कण बस और ज़ोर से कंपन करते हैं। संख्याएँ बढ़ती हैं, पर कोई अपना स्थान नहीं छोड़ता।
भाग 2: 0 °C पर गलन (सपाट)
अब ताप 0 °C पर रुक जाता है। प्रति ग्राम बर्फ पिघलाने में 334 J लगते हैं, और उनमें से कुछ भी कणों को तेज़ नहीं करता। वह नियमित व्यवस्था को तोड़ने में खर्च होता है, यानी हर कण को उसकी जगह पर थामे रखने वाली पकड़ ढीली करने में।
इस दौरान सिमुलेशन में ठोस (थीम का रंग) और द्रव (हरे) कण साथ-साथ रहते हैं। रेखा सपाट रहते हुए कण एक-एक करके बदलते हैं, और 334 J पूरे होने पर आख़िरी कण भी द्रव हो जाता है। बर्नर की डिफ़ॉल्ट शक्ति 100 J/g/s पर यह भाग 3.34 सेकंड में पार होता है।
भाग 3: पानी 0 °C से 100 °C (ढलान)
अब सब द्रव है। पानी की विशिष्ट ऊष्मा 4.18 J g⁻¹ K⁻¹ है, इसलिए 1 g को 100 °C गर्म करने में 4.18 × 100 = 418 J लगते हैं। यह गलन की 334 J से थोड़ा अधिक है, पर वाष्पन से बहुत कम।
रेखा लगभग सीधी है, क्योंकि द्रव पानी की विशिष्ट ऊष्मा लगभग नहीं बदलती। हरे कणों की औसत चाल धीरे-धीरे बढ़ती है, जो थोड़ी तेज़ होती हलचल के रूप में दिखती है।
भाग 4: 100 °C पर क्वथन (सपाट, सबसे लंबा)
ताप फिर रुक जाता है, इस बार 100 °C पर, और प्रति ग्राम 2,260 J लगते हैं। यह गलन का 6.8 गुना है, और उसी पानी को 0 से 100 °C तक गर्म करने में लगी ऊष्मा का 5.4 गुना।
इतना अधिक क्यों? गलन में कण केवल अपने जालक स्थान से छूटते हैं और पड़ोसियों के पास ही रहते हैं। वाष्प बनने के लिए हर कण को पड़ोसियों के आकर्षण से पूरी तरह निकलकर बहुत दूर जाना पड़ता है, जिसमें कहीं अधिक ऊर्जा लगती है। 100 J/g/s पर यह भाग 22.6 सेकंड में पार होता है।
भाग 5: भाप 100 °C से 120 °C (ढलान)
अब सब गैस है। भाप की विशिष्ट ऊष्मा लगभग 2.0 J g⁻¹ K⁻¹ है, इसलिए 120 °C तक जाने में 40 J और लगते हैं। रेखा फिर ढलान लेती है और ताप तथा औसत गतिज ऊर्जा साथ-साथ बढ़ते हैं।
कुल 42 + 334 + 418 + 2,260 + 40 = 3,094 J, यही संख्या “दी गई ऊष्मा” पर अंत में दिखती है।
| भाग | क्या हो रहा है | ताप | आवश्यक ऊष्मा (J) | अब तक कुल (J) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बर्फ गर्म हो रही है | −-20 → 0 °C | 42 | 42 |
| 2 | बर्फ पिघल रही है | 0 °C | 334 | 376 |
| 3 | पानी गर्म हो रहा है | 0 → 100 °C | 418 | 794 |
| 4 | पानी उबलकर भाप बन रहा है | 100 °C | 2,260 | 3,054 |
| 5 | भाप गर्म हो रही है | 100 → 120 °C | 40 | 3,094 |
दो सूत्र: Q = mcΔT और Q = mL
पूरे ग्राफ़ का गणित दो सूत्रों से चलता है: एक ढलान के लिए और एक सपाट भागों के लिए। ग्राफ़ देखकर ही बताया जा सकता है कि किस प्रश्न में कौन-सा सूत्र चाहिए।
ढलान पर ताप बदलता है, इसलिए विशिष्ट ऊष्मा चाहिए। सपाट भाग पर ताप नहीं बदलता, इसलिए ΔT शून्य है और वह सूत्र कुछ नहीं देता। वहाँ गुप्त ऊष्मा चाहिए।
Q = m c ΔTताप बदलने पर (अवस्था वही): m द्रव्यमान, c विशिष्ट ऊष्मा, ΔT ताप में परिवर्तन
Q = m Lअवस्था बदलने पर (ताप वही): L गुप्त ऊष्मा
T (K) = t (°C) + 273परम ताप, गतिज ऊर्जा का अनुपात निकालने में काम आता है
औसत गतिज ऊर्जा ∝ T (K)कणों की औसत गतिज ऊर्जा परम ताप के अनुक्रमानुपाती है
हर प्रतीक का अर्थ
Q अवशोषित या मुक्त ऊष्मा है, मात्रक जूल (J)। m द्रव्यमान है, ग्राम या किलोग्राम में, बस c और L के मात्रक से मेल खाए। c विशिष्ट ऊष्मा धारिता है, यानी 1 g का ताप 1 K बढ़ाने की ऊष्मा। L गुप्त ऊष्मा है, यानी 1 g की अवस्था बदलने की ऊष्मा।
- पानी: c = 4.18 J g⁻¹ K⁻¹ (बर्फ 2.1, भाप 2.0)
- बर्फ के संगलन की गुप्त ऊष्मा: L = 334 J/g = 3.34 × 10⁵ J/kg (लगभग 80 cal/g)
- पानी के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा: L = 2,260 J/g = 2.26 × 10⁶ J/kg (लगभग 540 cal/g)
जब दोनों सूत्र साथ चाहिए
एक अवस्था से दूसरी तक जाने के लिए भाग-भाग में जोड़ें: हर ढलान के लिए Q = mcΔT, हर सपाट भाग के लिए Q = mL, फिर सबका योग। पूरी यात्रा एक ही सूत्र से हल करने की कोशिश कभी न करें।
ताप रुक क्यों जाता है: गुप्त ऊष्मा की भीतरी कहानी
“गुप्त” का अर्थ छिपी हुई। ऊष्मा अंदर जा रही है, पर थर्मामीटर में नहीं दिखती। असल में वह स्थितिज ऊर्जा में चली गई है। कणों की चाल नहीं बढ़ी, इसलिए ताप नहीं बढ़ा।
हर कण को अपने पड़ोसियों द्वारा बने गड्ढे में बैठा सोचिए। गड्ढे से निकलने में ऊर्जा लगती है, पर निकल जाने पर कण पहले जितना ही तेज़ चलता है। गलन में कण गड्ढे की दीवारें ढीली करते हैं; वाष्पन में पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं।
सिमुलेशन में दो मापन साथ-साथ देखें: “औसत गतिज ऊर्जा” और “दी गई ऊष्मा”। सपाट भाग पर पहला स्थिर रहता है (0 °C पर 1.00, 100 °C पर 1.37) जबकि दूसरा बढ़ता रहता है।
यही बात उलटी दिशा में भी होती है। भाप के संघनन और पानी के जमने पर ठीक उतनी ही ऊष्मा बाहर निकलती है। इसीलिए भाप से जलना उबलते पानी से जलने से कहीं अधिक हानिकारक है, जिसे प्रश्न 6 में हल करेंगे।
वाष्पन, क्वथन और ऊर्ध्वपातन
पानी को उड़ने के लिए 100 °C तक पहुँचना ज़रूरी नहीं; गीली कमीज़ ठंडे दिन में भी सूखती है। यह वाष्पन है, क्वथन नहीं, और इसका अंतर परीक्षा का नियमित प्रश्न है।
वाष्पन ठंडक क्यों देता है
सतह से वही कण निकलते हैं जिनकी ऊर्जा सबसे अधिक होती है। जो बच जाते हैं उनकी औसत गतिज ऊर्जा कम हो जाती है, यानी द्रव ठंडा होता है। हवा में पसीना सूखने पर ठंडक लगना और मटके का पानी ठंडा रहना, दोनों इसी कारण हैं।
क्वथनांक दाब पर निर्भर करता है
द्रव तब उबलता है जब उसका वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाए। बाहरी दाब घटे तो क्वथनांक घटता है (ऊँचे पहाड़ पर पानी 100 °C से कम पर उबलता है, इसलिए खाना देर से पकता है); दाब बढ़े तो क्वथनांक बढ़ता है (प्रेशर कुकर में पानी 100 °C से ऊपर उबलता है और खाना जल्दी पकता है)। 100 °C का मान सामान्य वायुमंडलीय दाब का है।
ऊर्ध्वपातन: द्रव बने बिना गैस
कुछ ठोस गर्म करने पर द्रव बने बिना सीधे गैस बन जाते हैं। इसे ऊर्ध्वपातन कहते हैं। कपूर, नैफ़थलीन, आयोडीन और अमोनियम क्लोराइड ऐसा करते हैं। शुष्क बर्फ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड) सामान्य दाब पर लगभग −78 °C पर ऊर्ध्वपातित होती है।
इसका उलटा, यानी गैस का सीधे ठोस बनना, निक्षेपण कहलाता है; फ़्रीज़र की दीवार पर जमा पाला इसका उदाहरण है। सिमुलेशन में पानी की केवल तीन अवस्थाएँ हैं, पर ऊर्ध्वपातन का विचार वही है: कण एक ही चरण में सारे बंधन तोड़ देते हैं, इसलिए लगी ऊष्मा गलन और वाष्पन की ऊष्मा के योग के पास होती है।
चौथी अवस्था प्लाज़्मा (एक नज़र में)
बहुत ऊँचे ताप पर गैस के अणु टूटकर आयनों और इलेक्ट्रॉनों का मिश्रण बन जाते हैं, जिसे प्लाज़्मा कहते हैं। सूर्य, बिजली की कौंध और नियॉन बल्ब में प्लाज़्मा होता है। स्कूल की अधिकतर परीक्षाओं में तीन अवस्थाएँ ही मुख्य हैं, प्लाज़्मा सामान्य ज्ञान है।
| पहलू | वाष्पन | क्वथन |
|---|---|---|
| ताप | किसी भी ताप पर | एक निश्चित ताप (क्वथनांक) पर |
| कहाँ होता है | केवल सतह पर | पूरे द्रव में, बुलबुले उठते हैं |
| गति | धीमा | तेज़ |
| शीतलता | बचे द्रव को ठंडा करता है | बाहर से ऊष्मा चाहिए |
| निर्भर करता है | सतह क्षेत्रफल, ताप, आर्द्रता और हवा पर | बाहरी दाब पर |
सिमुलेशन में खुद करके देखें
पढ़ना एक बात है, करके देखना दूसरी। नीचे के चार प्रयोग क्रम से करें। हर प्रयोग से पहले “फिर से शुरू” दबाएँ।
प्रयोग 1: दोनों समतल भाग मापें
बर्नर की शक्ति 100 J/g/s रखकर सिमुलेशन चलाएँ और हाथ में स्टॉपवॉच रखें। गलन का भाग लगभग 3.34 सेकंड में निकलना चाहिए और क्वथन का लगभग 22.6 सेकंड में। अनुपात 6.8 है, ठीक दोनों गुप्त ऊष्माओं के अनुपात जितना।
पूरी यात्रा लगभग 30.9 सेकंड की है, इसलिए अधिकतर समय क्वथन का भाग खा जाता है। घर पर केतली में पानी उबलते देखें तो यही दिखता है: उबलना शुरू होने के बाद पानी सूखने में बहुत समय लगता है।
प्रयोग 2: कणों को देखें, ऊष्मा को नहीं
“रोकें” दबाएँ, “किस चरण पर जाएँ” में “गलन” चुनें और “दी गई ऊष्मा” स्लाइडर को धीरे-धीरे दाईं ओर खींचें। कण एक-एक करके थीम के रंग से हरे होते जाएँगे। “कण: ठोस · द्रव · गैस” पंक्ति की संख्याएँ पढ़ें।
इस पूरे समय ताप और औसत गतिज ऊर्जा नहीं बदलते। केवल दी गई ऊष्मा बढ़ती है और ठोस कणों की संख्या घटती है।
प्रयोग 3: उलटी दिशा में चलें
“गर्म करने की जगह ठंडा करें” पर टिक लगाएँ। “गैस (भाप)” चुनकर चलाएँ। ताप गिरता है, 100 °C पर रुकता है, और नारंगी कण एक-एक करके हरे होकर तली में जमा होते हैं: संघनन। 0 °C पर फिर रुकता है, जब हरे कण जालक में लौटते हैं: जमना।
ऊष्मा अंदर जा रही है या बाहर आ रही है? बाहर। संघनन में प्रति ग्राम 2,260 J और जमने में 334 J निकलते हैं।
प्रयोग 4: बर्नर की शक्ति बदलें
शक्ति 400 J/g/s करके फिर चलाएँ। हर समतल भाग जल्दी पार होता है, पर ग्राफ़ का आकार वही रहता है, क्योंकि x-अक्ष पर समय नहीं, दी गई ऊष्मा है। बर्नर की शक्ति केवल यह तय करती है कि आप वक्र पर कितनी तेज़ी से चल रहे हैं।
प्रयोगशाला में प्रायः ताप-समय ग्राफ़ बनता है। हीटर की शक्ति स्थिर हो तो वह इसी ग्राफ़ का संस्करण है, बस x-अक्ष को शक्ति से भाग दिया गया।
हल किए गए प्रश्न
हर हल में पहले दिया गया, फिर सूत्र, फिर मान रखना। याद रखें: ढलान पर Q = mcΔT, सपाट भाग पर Q = mL। पानी का c 4.18 J g⁻¹ K⁻¹, बर्फ का 2.1 और भाप का 2.0; L गलन के लिए 334 J/g और वाष्पन के लिए 2,260 J/g।
प्रश्न 1: सिमुलेशन की पूरी यात्रा
1 g बर्फ को −-20 °C से 120 °C की भाप बनाने में कितनी ऊष्मा लगेगी?
चरण 1: 2.1 × -20 = 42 J। चरण 2: 334 J। चरण 3: 4.18 × 100 = 418 J। चरण 4: 2,260 J। चरण 5: 2.0 × 20 = 40 J। कुल 3,094 J। इसका 73% अकेले क्वथन में और 11% गलन में जाता है।
प्रश्न 2: चाय के लिए पानी गर्म करना
250 g पानी को 25 °C से 100 °C तक गर्म करने में कितनी ऊष्मा लगेगी? (c = 4.18 J g⁻¹ K⁻¹)
Q = mcΔT = 250 × 4.18 × 75 = 78,375 J ≈ 78.4 kJ। पानी उबलने लगे तो ताप बढ़ना रुक जाता है और आगे की ऊष्मा भाप बनाती है।
प्रश्न 3: 0 °C की बर्फ पिघलाना
50 g बर्फ ठीक 0 °C पर है। उसे पूरी तरह पिघलाने में कितनी ऊष्मा लगेगी?
ताप नहीं बदल रहा, केवल अवस्था बदल रही है, इसलिए Q = mL = 50 × 334 = 16,700 J ≈ 16.7 kJ। बना हुआ पानी अब भी 0 °C पर है।
प्रश्न 4: बर्फ से 20 °C का पानी
10 g बर्फ −10 °C पर है। उसे 20 °C का पानी बनाने में कितनी ऊष्मा चाहिए?
तीन चरण। (क) बर्फ −10 से 0 °C: 10 × 2.1 × 10 = 210 J। (ख) गलन: 10 × 334 = 3,340 J। (ग) पानी 0 से 20 °C: 10 × 4.18 × 20 = 836 J। कुल 210 + 3,340 + 836 = 4,386 J। ध्यान दें, सबसे बड़ा भाग गलन का है।
प्रश्न 5: उबलते पानी को भाप बनाना
100 g पानी 100 °C पर उबल रहा है। उसे पूरा भाप बनाने में कितनी ऊष्मा लगेगी? तुलना करें कि उसे 0 से 100 °C तक गर्म करने में कितनी लगती है।
भाप बनाने में Q = mL = 100 × 2,260 = 2,26,000 J = 226 kJ। 0 से 100 °C तक गर्म करने में 100 × 4.18 × 100 = 41,800 J ≈ 41.8 kJ। भाप बनाने में लगभग 5.4 गुना ऊष्मा लगती है।
प्रश्न 6: भाप से जलना और उबलते पानी से जलना
1 g भाप (100 °C) और 1 g उबलता पानी (100 °C) अलग-अलग त्वचा पर गिरकर 37 °C तक ठंडे होते हैं। त्वचा को प्रत्येक से कितनी ऊष्मा मिलती है?
उबलता पानी: 1 × 4.18 × 63 = 263.3 J। भाप: पहले संघनन से 2,260 J, फिर ठंडा होने से 263.3 J, कुल 2,523.3 J। भाप लगभग 9.6 गुना अधिक ऊष्मा देती है, इसीलिए भाप से जलना इतना गंभीर होता है।
प्रश्न 7: पानी के गिलास में बर्फ
30 °C के 200 g पानी में 0 °C की 20 g बर्फ डाली गई। परिवेश में ऊष्मा हानि न मानें तो अंतिम ताप क्या होगा?
पानी 0 °C तक ठंडा होने पर 200 × 4.18 × 30 = 25,080 J छोड़ता है। बर्फ पिघलाने में 20 × 334 = 6,680 J लगते हैं, इसलिए सारी बर्फ पिघल जाएगी। बचे 18,400 J कुल 220 g पानी को गर्म रखते हैं: ΔT = 18,400 ÷ (220 × 4.18) = 20.0 °C। अंतिम ताप लगभग 20.0 °C।
प्रश्न 8: 1000 W का हीटर
एक वाट यानी एक जूल प्रति सेकंड। 1,000 W का हीटर 0 °C की बर्फ पर एक मिनट (60 s) चलता है। कितने ग्राम बर्फ पिघलेगी? (हानि अनदेखी करें।)
दी गई ऊष्मा = 1,000 × 60 = 60,000 J। पिघली बर्फ = Q ÷ L = 60,000 ÷ 334 ≈ 180 g।
प्रश्न 9: भाप का संघनन
2 g भाप 100 °C पर संघनित होकर उसी ताप का पानी बनती है। कितनी ऊष्मा निकलती है?
Q = mL = 2 × 2,260 = 4,520 J। इसी मुक्त ऊष्मा से उबलती केतली के ऊपर रखा ढक्कन इतना गर्म हो जाता है।
वे गलतियाँ जो सब करते हैं
इन गलतियों से बचेंगे तो द्रव्य की अवस्थाओं के प्रश्न में अंक नहीं कटेंगे।
- यह मानना कि गर्म करने पर ताप बढ़ता ही है। गलन और क्वथन के दौरान ऊष्मा देने पर भी ताप स्थिर रहता है, क्योंकि ऊष्मा गुप्त है।
- ऊष्मा और ताप को एक समझना। ऊष्मा ऊर्जा है (जूल में); ताप औसत गतिज ऊर्जा का माप है (°C या K)।
- सपाट भाग पर Q = mcΔT लगा देना। वहाँ ΔT शून्य है, इसलिए Q = mL लगता है।
- वाष्पन और क्वथन को एक मानना। वाष्पन किसी भी ताप पर सतह पर होता है; क्वथन एक निश्चित ताप पर पूरे द्रव में।
- “गर्म करने पर कण फूलकर बड़े हो जाते हैं” लिखना। कण का आकार नहीं बदलता; उनकी चाल और बीच की दूरी बदलती है।
- विशिष्ट ऊष्मा और गुप्त ऊष्मा के मात्रक गड़बड़ा देना। विशिष्ट ऊष्मा J g⁻¹ K⁻¹ (इसमें K है), गुप्त ऊष्मा J/g (इसमें K नहीं)।
- बहु-चरणीय प्रश्न में कोई चरण छोड़ देना। बर्फ से भाप तक पाँच भाग होते हैं और पाँचों गिनने होते हैं।
- यह कहना कि ठोस में कण गति नहीं करते। वे अपनी जगह कंपन करते हैं, बस जगह छोड़ते नहीं।
रोज़मर्रा में द्रव्य की अवस्थाएँ
अवस्था-परिवर्तन रसोई से लेकर बिजलीघर तक हर जगह काम कर रहे हैं।
- शरबत में बर्फ: 0 °C का पानी नहीं, 0 °C की बर्फ ज़्यादा ठंडा करती है, क्योंकि पिघलने में प्रति ग्राम 334 J पेय से खींचती है।
- पसीना और मटका: सतह से वाष्पन में सबसे ऊर्जावान कण निकल जाते हैं, इसलिए जो बचता है वह ठंडा होता है।
- प्रेशर कुकर: बढ़ा दाब क्वथनांक को 100 °C से ऊपर ले जाता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
- भाप इंजन और बिजलीघर: पानी उबालकर भाप बनती है, भाप टरबाइन घुमाती है और फिर संघनित होकर पानी बन जाती है।
- रेफ़्रिजरेटर और एयर कंडीशनर: द्रव प्रशीतक भीतर वाष्पित होकर ऊष्मा सोखता है और बाहर संघनित होकर छोड़ देता है।
- नैफ़थलीन की गोलियाँ और कपूर: अलमारी में रखे रहने पर सप्ताहों में घटकर ग़ायब हो जाते हैं, ऊर्ध्वपातन से।
- शुष्क बर्फ: आइसक्रीम और खाने के परिवहन में ठंडक के लिए काम आती है; पानी नहीं छोड़ती, क्योंकि सीधे गैस बन जाती है।
- कोहरा और ओस: हवा की जलवाष्प ठंडी सतहों पर संघनित होकर छोटी बूँदें बनाती है।
परीक्षा कोना: CBSE और NCERT
कक्षा 9 विज्ञान का “हमारे आस-पास के पदार्थ” अध्याय (नए संस्करणों में क्रम या नाम अलग हो सकता है) कणों की प्रकृति, तीन अवस्थाएँ, अवस्था-परिवर्तन, गुप्त ऊष्मा, वाष्पन और ऊर्ध्वपातन समेटता है। कक्षा 11 भौतिकी के “पदार्थ के ऊष्मीय गुण” में विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, Q = mcΔT, Q = mL और अवस्था-परिवर्तन के ग्राफ़ पर गणनाएँ आती हैं। अपने नवीनतम पाठ्यक्रम से अध्याय का नाम मिला लें।
वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है: गलन के दौरान ताप क्या रहता है, किस प्रक्रिया में ऊष्मा निकलती है, कौन-से पदार्थ ऊर्ध्वपातित होते हैं और ग्राफ़ के किसी भाग का अर्थ क्या है। लघु और दीर्घ उत्तर वाले प्रश्नों में परिभाषा, कारण (“बर्फ पिघलते समय ताप स्थिर क्यों रहता है?”) और बहु-चरणीय गणना आती है।
एक नमूना प्रश्न
पाठ: 10 g बर्फ −10 °C पर है और उसे लगातार गर्म किया जा रहा है। (बर्फ का c = 2.1 J g⁻¹ K⁻¹, पानी का c = 4.18 J g⁻¹ K⁻¹, संगलन की गुप्त ऊष्मा 334 J/g।)
(क) गुप्त ऊष्मा की परिभाषा दें। (ख) कण मॉडल के आधार पर समझाएँ कि बर्फ पिघलते समय ताप 0 °C पर क्यों रहता है। (ग) बर्फ को 0 °C के पानी में बदलने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए? (घ) 20 °C तक पहुँचने के लिए कुल ऊष्मा निकालें और बताएँ कि कौन-सा चरण सबसे अधिक लेता है।
(ग) का उत्तर: 210 + 3,340 = 3,550 J। (घ) का उत्तर: कुल 4,386 J; गलन का भाग 3,340 J सबसे बड़ा है (प्रश्न 4 देखें)।
पुनरावृत्ति: अंतिम समय का सार
परीक्षा से पहले की रात यह सूची और वक्र का रेखाचित्र एक बार देख लेना काफ़ी है।
- ठोस में कण अपनी जगह कंपन करते हैं, द्रव में फिसलते हैं, गैस में मुक्त दौड़ते हैं; आकर्षण इसी क्रम में घटता है।
- ताप कणों की औसत गतिज ऊर्जा का माप है; T (K) = t (°C) + 273।
- बर्फ का गलनांक 0 °C (273 K); पानी का क्वथनांक 100 °C (373 K), 1 atm पर।
- अवस्था बदलते समय ऊष्मा देने पर भी ताप स्थिर रहता है; यह ऊष्मा गुप्त ऊष्मा है।
- ढलान पर Q = mcΔT, सपाट भाग पर Q = mL। पानी का c = 4.18 J g⁻¹ K⁻¹; L (संगलन) = 334 J/g; L (वाष्पन) = 2,260 J/g।
- वाष्पन: किसी भी ताप पर, केवल सतह पर, ठंडक देता है। क्वथन: निश्चित ताप पर, पूरे द्रव में।
- ऊर्ध्वपातन: ठोस से सीधे गैस (कपूर, नैफ़थलीन, आयोडीन, शुष्क बर्फ)।
- 1 g बर्फ −-20 °C से 120 °C की भाप तक: कुल 3,094 J, जिसका 73% क्वथन में जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
द्रव्य की तीन अवस्थाएँ कौन-सी हैं?
द्रव्य की तीन प्रचलित अवस्थाएँ ठोस, द्रव और गैस हैं। ठोस में कण अपनी जगह कंपन करते हैं, इसलिए आकार और आयतन दोनों निश्चित रहते हैं। द्रव में कण फिसलते हैं, आयतन निश्चित पर आकार बर्तन जैसा होता है। गैस में कण स्वतंत्र दौड़ते हैं, इसलिए आकार और आयतन दोनों निश्चित नहीं होते।
गुप्त ऊष्मा क्या है?
ताप बदले बिना किसी पदार्थ के इकाई द्रव्यमान की अवस्था बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। सूत्र Q = mL है। पानी के लिए संगलन की गुप्त ऊष्मा 334 J/g और वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 2,260 J/g है।
बर्फ पिघलते समय ताप स्थिर क्यों रहता है?
ऊष्मा कणों की चाल नहीं बढ़ाती; वह ठोस की नियमित व्यवस्था तोड़ने में लगती है, जिससे कणों की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है। कणों की औसत गतिज ऊर्जा वही रहती है, इसलिए जब तक सारी बर्फ पिघल न जाए, ताप भी वही रहता है।
गलनांक और क्वथनांक क्या हैं?
निश्चित दाब पर जिस ताप पर ठोस द्रव में बदलता है, वह गलनांक है। जिस ताप पर द्रव का वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है और पूरे द्रव में उबाल आता है, वह क्वथनांक है। 1 atm पर पानी का गलनांक 0 °C और क्वथनांक 100 °C है।
वाष्पन और क्वथन में क्या अंतर है?
वाष्पन किसी भी ताप पर केवल सतह पर धीरे-धीरे होता है और द्रव को ठंडा करता है। क्वथन केवल क्वथनांक पर होता है, पूरे द्रव में बुलबुले बनते हैं और बाहर से ऊष्मा देनी पड़ती है।
ऊर्ध्वपातन क्या है? उदाहरण दें।
जब कोई ठोस गर्म करने पर द्रव बने बिना सीधे गैस में बदल जाता है, तो उसे ऊर्ध्वपातन कहते हैं। उदाहरण: कपूर, नैफ़थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड और शुष्क बर्फ (ठोस कार्बन डाइऑक्साइड)।
पानी की विशिष्ट ऊष्मा धारिता कितनी है?
लगभग 4.18 J g⁻¹ K⁻¹, यानी 1 g पानी का ताप 1 K बढ़ाने में लगभग 4.18 J लगते हैं। बर्फ के लिए मान लगभग 2.1 और भाप के लिए लगभग 2.0 J g⁻¹ K⁻¹ है।
प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों पकता है?
बंद प्रेशर कुकर में दाब बढ़ता है, जिससे पानी का क्वथनांक 100 °C से ऊपर चला जाता है। पानी खुले बर्तन से अधिक गर्म होता है, इसलिए खाना जल्दी पकता है।
भाप से जलना उबलते पानी से जलने से अधिक गंभीर क्यों है?
100 °C की भाप संघनित होते समय प्रति ग्राम 2,260 J गुप्त ऊष्मा छोड़ती है, जबकि उसी ताप का पानी केवल ठंडा होने की ऊष्मा देता है। प्रश्न 6 में भाप लगभग 9.6 गुना अधिक ऊष्मा त्वचा को देती है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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SSC Chemistry: syllabus and preparation
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HSC Chemistry: syllabus and preparation
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Class 9-10 Chemistry textbook
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रसायन विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 9 · 11
परमाणु की संरचना
परमाणु की संरचना चित्र और एनिमेशन के साथ: प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन, परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, हल किए गए उदाहरणों सहित।
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बॉयल का नियम, चार्ल्स का नियम, गे-लुसाक और आवोगाद्रो नियम, आदर्श गैस समीकरण PV = nRT: पिस्टन खींचकर खुद देखें, ग्राफ़, R के मान, व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
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आयनिक बंध किसे कहते हैं, धातु के इलेक्ट्रॉन अधातु में जाकर आयन कैसे बनाते हैं, और सूत्र आवेश संतुलन से कैसे निकलता है: NaCl, MgO, CaCl2 चुनकर खुद देखें, सूत्र और हल सहित।
कक्षा 10 · 12
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
वैद्युत अपघटन किसे कहते हैं, कैथोड-एनोड पर क्या बनता है, और फैराडे के नियम से द्रव्यमान कैसे निकलता है: पिघला NaCl, CuSO4 या अम्लीकृत पानी चुनकर खुद देखें, सूत्र और हल सहित।
कक्षा 10 · 11
सहसंयोजक बंध
सहसंयोजक बंध किसे कहते हैं, एकल-द्वि-त्रिआबंध कैसे बनते हैं, अष्टक नियम क्या है: H₂O, NH₃, CH₄, CO₂ का डॉट-क्रॉस चित्र सिमुलेशन में खुद बनाएँ, ध्रुवता के साथ।
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कक्षा 10 · 12
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अभिक्रिया की दर किन बातों पर निर्भर करती है? संघट्ट सिद्धांत के सिमुलेशन में तापमान, सांद्रता और उत्प्रेरक बदलकर सक्रियण ऊर्जा का ग्राफ़ और उत्पाद का वक्र खुद देखें।
कक्षा 11
परमाणु कक्षक: s, p, d के आकार, क्वांटम संख्याएँ और नोड
1s, 2s, 2p और 3d कक्षक को 3D में घुमाकर देखें। कक्षा और कक्षक का अंतर, चार क्वांटम संख्याएँ, त्रिज्य व कोणीय नोड गिनना, उपकोश की क्षमता, हल सहित उदाहरण।
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त्रिविमीय अणु बनाएँ और घुमाएँ। देखें कि आबंध युग्म और एकाकी युग्म CH4, NH3, H2O, PCl5, SF6 की आकृति, आबंध कोण और संकरण कैसे तय करते हैं, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
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मोल अवधारणा: मोलर द्रव्यमान, आवोगाद्रो संख्या और मोलर आयतन
मोल किसे कहते हैं, आवोगाद्रो संख्या कितनी है, मोलर द्रव्यमान और STP पर मोलर आयतन (22.4 लीटर) क्या है? आभासी तराज़ू पर तौलकर मोल और अणुओं की संख्या खुद निकालें; प्रतिशत संघटन और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
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विसरण और निःस्राव: ग्राहम का नियम
नली में NH₃ और HCl से सफ़ेद छल्ला बनते देखें, फिर सूक्ष्म छिद्र से गैसों के निःस्राव की दौड़ देखें। ग्राहम के विसरण नियम की व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 9 · 10
रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास
रासायनिक समीकरण कैसे संतुलित करें? गुणांक बदलकर दोनों ओर के परमाणु गिनें। जल, मीथेन, जंग, अम्ल और रसोई गैस के पाँच हल किए उदाहरण, कक्षा 10 की परीक्षा के लिए।
कक्षा 11
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रासायनिक साम्य क्या है, साम्य स्थिरांक Kc कैसे निकालें, और सांद्रता, ताप या दाब बदलने पर अभिक्रिया किस ओर खिसकती है? हैबर प्रक्रिया की दर-रेखाओं से ले शातेलिए का सिद्धांत समझें।
कक्षा 9 · 12
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गैल्वेनिक सेल बिजली कैसे बनाता है? डेनियल सेल में इलेक्ट्रॉन और लवण सेतु के आयन किस ओर जाते हैं, छड़ों का द्रव्यमान कैसे बदलता है, मानक और नर्स्ट EMF क्या है? सांद्रता बदलकर खुद देखो।
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ऑक्सीकरण और अपचयन क्या हैं, ऑक्सीकरण संख्या कैसे निकालते हैं, और ऑक्सीकारक कौन है? पाँच रेडॉक्स अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन का चलना देखो, अर्ध-अभिक्रियाओं और हल किए सवालों के साथ।
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हाइड्रोकार्बन: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और संरचनात्मक समावयवी 3D में
ऐल्केन, ऐल्कीन और ऐल्काइन को घूमते बॉल-स्टिक मॉडल में देखो। कार्बन की संख्या बदलो, सामान्य सूत्र और IUPAC नाम पढ़ो, और ब्यूटेन, पेंटेन, हेक्सेन के सभी संरचनात्मक समावयवी देखो।
कक्षा 11 · 12
प्रकार्यात्मक समूह: ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन
प्रकार्यात्मक समूह क्या है, ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन को कैसे पहचानें? आठ परिवारों की संरचना, IUPAC नाम, परीक्षण और हल किए गए सवाल देखो।
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बहुलक क्या है, योगात्मक और संघनन बहुलकीकरण में क्या अंतर है? एथीन से पॉलिथीन और नायलॉन-6,6 बनते देखो, शृंखला का मोलर द्रव्यमान और निकले पानी की गणना के साथ।
कक्षा 9 · 11
मिश्रण अलग करने की विधियाँ: निस्यंदन, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, क्रिस्टलन
निस्यंदन, सरल व प्रभाजी आसवन, पेपर क्रोमैटोग्राफी और क्रिस्टलन को चलते देखो। Rf की गणना, क्वथनांक के समतल भाग और क्रिस्टल की प्राप्ति खुद निकालो।
कक्षा 12
क्रिस्टल जालक: SC, BCC और FCC एकक कोष्ठिका, संकुलन क्षमता और घनत्व
सरल, अंतःकेंद्रित और फलक-केंद्रित घनीय कोष्ठिका घुमाकर देखो। प्रति कोष्ठिका परमाणु, समन्वय संख्या, संकुलन क्षमता (52.4%, 68%, 74%) और घनत्व की गणना।
कक्षा 11 · 12
रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु
देखिए अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय में A और Z कैसे बदलते हैं, नाभिकीय समीकरण संतुलित कीजिए और 100 परमाणुओं का यादृच्छिक क्षय अर्ध-आयु वक्र पर चलता देखिए। कार्बन-14 आयु निर्धारण सहित मुफ़्त सिमुलेशन।
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