कण A और B टकराते हैं; C तभी बनता है जब टक्कर की ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर या अधिक हो। तापमान बढ़ाएँ, उत्प्रेरक डालें या कण बढ़ाएँ, फिर ग्राफ़ देखें
नियंत्रण
मापन
- समय
- 0.0s
- Ea / RT
- 3.50
- A शेष
- 25
- C बना
- 0
- A–B टक्करें प्रति सेकंड
- 0.0/s
- सफल टक्करें (अभिक्रिया दर)
- 0.00/s
- Ea से ऊपर का अंश, e^(−Ea/RT)
- 3.0%
- गिना गया सफल अंश
- 0.0%
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- ‘चलाएँ’ दबाकर दस सेकंड बॉक्स को देखिए। A और B नाम के दो तरह के कण इधर-उधर दौड़ रहे हैं; हर चमक का मतलब है कि उस टक्कर में पर्याप्त ऊर्जा थी, और वहाँ एक हरा C कण बन गया।
- दाईं ओर के दोनों ग्राफ़ देखिए। ऊपर वाला टक्कर की ऊर्जा का वितरण है, जिसमें सक्रियण ऊर्जा पर लाल बिंदीदार रेखा है; रेखा के दाईं ओर का हरा क्षेत्र उन टक्करों का अंश है जो अभिक्रिया करा सकती हैं। नीचे वाला समय के साथ बना उत्पाद दिखाता है।
- तापमान का स्लाइडर दाईं ओर खींचिए। हरा अंश बढ़ता है, चमकें जल्दी-जल्दी आती हैं और उत्पाद का वक्र तीखा हो जाता है। ध्यान दीजिए कि प्रति सेकंड कुल टक्करें थोड़ी ही बढ़ती हैं, पर सफल टक्करें छलाँग लगाती हैं।
- उत्प्रेरक के बॉक्स में टिक कीजिए। बिंदीदार रेखा बाईं ओर खिसककर कम सक्रियण ऊर्जा पर आ जाती है, हरा क्षेत्र तुरंत चौड़ा हो जाता है, और पुरानी जगह धूसर रेखा के रूप में बनी रहती है ताकि दिखे कि क्या बदला।
- सांद्रता का स्लाइडर बदलिए। कम या ज़्यादा कणों के साथ प्रयोग नए सिरे से शुरू होता है, और पिछले प्रयोग का उत्पाद-वक्र तुलना के लिए धूसर बिंदीदार रेखा में रहता है। मिटाने के लिए फिर से शुरू दबाइए।
गर्मी में दूध खराब होता है, फ़्रिज में क्यों नहीं
गर्मी के दिनों में एक गिलास दूध रसोई में रख दीजिए, शाम तक उसमें खट्टी गंध आ जाती है। वही दूध फ़्रिज में कई दिन ठीक रहता है। रसायन तो नहीं बदला: वही जीवाणु, वही शर्करा, वही अभिक्रियाएँ। बदली है तो सिर्फ़ रफ़्तार। इसी रफ़्तार की बात इस पन्ने पर है।
एक बार ध्यान दें तो हर तरफ़ दर के उदाहरण मिलते हैं। गर्म पानी में एफ़र्वेसेंट गोली आधे मिनट में घुल जाती है, ठंडे पानी में बहुत देर लगती है। लोहे की कील को जंग लगने में सालों लगते हैं, पर लोहे का बारीक रेशा (स्टील वूल) आग दिखाने पर चमककर जल उठता है। प्रेशर कुकर में दाल खुले बर्तन से चौथाई समय में गल जाती है। सामग्री वही, रफ़्तार अलग।
सवाल सीधे हैं। गर्म करने से अभिक्रिया तेज़ क्यों होती है? चूर्ण बनाने से फ़ायदा क्यों होता है? उत्प्रेरक असल में करता क्या है, और वह खत्म क्यों नहीं होता? संघट्ट सिद्धांत तीनों का उत्तर एक ही तस्वीर से देता है: छोटे-छोटे कण एक-दूसरे से टकरा रहे हैं, और सिर्फ़ ज़ोरदार टक्करें काम की हैं। ऊपर के सिमुलेशन में हर नॉब घुमाकर आप इस तस्वीर को बदलते देख सकते हैं।
शुरू से: अभिक्रिया की दर क्या है
रासायनिक अभिक्रिया एक पल में नहीं हो जाती। कुछ समय में अभिकारक उत्पाद में बदलते हैं और मात्राएँ बदलती रहती हैं। कोई अभिक्रिया पलक झपकते खत्म होती है, जैसे सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में नमक का विलयन डालते ही सफ़ेद दूधिया हो जाना। कोई सालों चलती है, जैसे गेट पर धीरे-धीरे जंग लगना। अभिक्रिया कितनी तेज़ है, इसे संख्या में कहना ही अभिक्रिया की दर है।
मात्राएँ बदलती हैं, इसलिए हम दर को सांद्रता के बदलने की रफ़्तार से नापते हैं। सांद्रता एक लीटर मिश्रण में किसी पदार्थ की मात्रा है, इकाई mol L⁻¹। अभिकारक की सांद्रता घटती है, उत्पाद की बढ़ती है। परिवर्तन की मात्रा को लगे हुए समय से भाग दीजिए, दर मिल जाती है।
दर = −Δ[अभिकारक] / Δtअभिकारक की सांद्रता घटती है, इसलिए ऋण चिह्न से दर धनात्मक रहती है।
दर = +Δ[उत्पाद] / Δtउत्पाद की सांद्रता बढ़ती है, इसलिए चिह्न बदलने की ज़रूरत नहीं।
दर की इकाई: mol L⁻¹ s⁻¹धीमी अभिक्रियाओं में मिनट या घंटे भी लिए जाते हैं।
औसत दर और तात्क्षणिक दर
पूरे समय-अंतराल के परिवर्तन को उस अंतराल से भाग देने पर औसत दर मिलती है। किसी एक क्षण की दर के लिए बहुत छोटा अंतराल लेना पड़ता है; सांद्रता-समय ग्राफ़ में वह उस बिंदु पर स्पर्श रेखा का ढाल है। परीक्षा में दोनों पूछी जाती हैं, और सिमुलेशन का ग्राफ़ दिखाता है कि दोनों अलग क्यों हैं।
सिमुलेशन का हरा उत्पाद-वक्र देखिए। शुरू में तीखा, फिर धीरे-धीरे सपाट। शुरू में A और B बहुत हैं, इसलिए सफल टक्करें भी जल्दी-जल्दी होती हैं। बाद में अभिकारक कम पड़ते हैं, टक्करें घटती हैं, वक्र चपटा हो जाता है। यानी तापमान न बदले तब भी अभिक्रिया के दौरान तात्क्षणिक दर घटती जाती है।
दर इस पर भी निर्भर है कि गिनते किसे हैं
A + B → C में हर C बनने पर एक A और एक B खर्च होता है, इसलिए तीनों दरें बराबर हैं। 2A → B हो तो A, B के बनने से दुगुनी रफ़्तार से घटता है। इसलिए रसायनज्ञ हर दर को उसके गुणांक से भाग देकर अभिक्रिया की एक ही संख्या निकालते हैं। इस पन्ने की अभिक्रिया A + B → C है, तो C की गिनती से ही दर समझ आ जाती है।
संघट्ट सिद्धांत सरल शब्दों में
संघट्ट सिद्धांत कहता है कि अभिकारक कण आपस में टकराएँ तभी अभिक्रिया संभव है। जिन दो अणुओं की कभी मुलाकात ही नहीं होती, वे अभिक्रिया नहीं कर सकते। इसी से समझ आता है कि अधिक दाब की गैस या अधिक सांद्रता के विलयन में अभिक्रिया तेज़ क्यों होती है: प्रति सेकंड मुलाकातें अधिक होती हैं।
पर ज़्यादातर मुलाकातों में कुछ नहीं होता। कमरे के तापमान पर एक फ़्लास्क में हर सेकंड अरबों-खरबों टक्करें होती हैं, फिर भी अभिक्रिया को पूरा होने में मिनट लग सकते हैं। इसलिए सिद्धांत एक टक्कर को प्रभावी मानने के लिए दो शर्तें और जोड़ता है।
- कणों में टक्कर होनी चाहिए। संपर्क नहीं तो अभिक्रिया नहीं।
- टक्कर की ऊर्जा कम से कम सक्रियण ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए। हल्की चोट से कण बिना बदले उछलकर अलग हो जाते हैं।
- कणों का मिलन सही अभिविन्यास में होना चाहिए। अणु का एक सक्रिय सिरा होता है; बगल से टकराने पर ऊर्जा होते हुए भी काम न बने, ऐसा हो सकता है।
काम के शब्द
पहले इन शब्दों को पक्का कर लीजिए। परिभाषा वाले ज़्यादातर प्रश्न इसी तालिका से आते हैं।
| शब्द | सरल भाषा में अर्थ | प्रतीक या इकाई |
|---|---|---|
| अभिक्रिया की दर | अभिकारक कितनी तेज़ी से खर्च हो रहे हैं या उत्पाद कितनी तेज़ी से बन रहा है | mol L⁻¹ s⁻¹ |
| संघट्ट | दो कणों का इतना पास आना कि वे एक-दूसरे को प्रभावित करें | प्रति सेकंड टक्करें |
| प्रभावी संघट्ट | पर्याप्त ऊर्जा और सही अभिविन्यास वाली टक्कर, जो अभिक्रिया कराती है | प्रति सेकंड सफल टक्करें |
| सक्रियण ऊर्जा | अभिक्रिया कराने के लिए टक्कर में चाहिए न्यूनतम ऊर्जा; पहाड़ की ऊँचाई | Ea, kJ mol⁻¹ |
| सांद्रता | एक लीटर मिश्रण में किसी पदार्थ की मात्रा | mol L⁻¹ |
| उत्प्रेरक | वह पदार्थ जो कम ऊर्जा का रास्ता देकर अभिक्रिया तेज़ करता है, पर खुद खर्च नहीं होता | कोई प्रतीक नहीं |
| पृष्ठीय क्षेत्रफल | ठोस का वह कुल भाग जहाँ अभिकारक उसे छू सकते हैं | cm² या m² |
| दर स्थिरांक | दर समीकरण की वह संख्या जिसमें तापमान और उत्प्रेरक का असर रहता है | k |
| तापमान | कणों की औसत गतिज ऊर्जा का माप | K या °C |
सक्रियण ऊर्जा: वह पहाड़ जिसे हर अभिक्रिया को पार करना है
सोचिए एक गेंद को पहाड़ के ऊपर से लुढ़ककर दूसरी ओर की घाटी में पहुँचना है। घाटी नीची हो तब भी गेंद को पहले ऊपर धकेलना पड़ेगा। अणुओं के लिए यह पहाड़ ही सक्रियण ऊर्जा है। नए बंध बनने से पहले अभिकारकों के पुराने बंध खिंचकर टूटना शुरू करते हैं, इसमें ऊर्जा लगती है, और वह ऊर्जा टक्कर की गतिज ऊर्जा से आती है।
सिमुलेशन में पहाड़ ऊपर के ग्राफ़ की लाल बिंदीदार रेखा है। रेखा के बाईं ओर की ऊर्जा वाली टक्कर में कण उछलकर अलग हो जाते हैं, और दाईं ओर की ऊर्जा वाली टक्कर में C बनता है और चमक दिखती है। उत्प्रेरक के बिना रेखा 3.5 RT पर है, उत्प्रेरक के साथ 2.0 RT पर।
यह भी ध्यान रखिए कि पहाड़ क्या नहीं बताता। कोई अभिक्रिया कुल मिलाकर बहुत ढलान वाली (खूब ऊष्मा छोड़ने वाली) होकर भी धीमी हो सकती है, अगर पहाड़ ऊँचा हो। हवा में कोयला जलना बहुत अनुकूल है, फिर भी कोयले का टुकड़ा सैकड़ों साल हवा में पड़ा रह सकता है, जब तक कोई आग लगाकर कुछ कणों को पहाड़ के पार न पहुँचा दे। अभिक्रिया संभव है या नहीं, और तेज़ है या नहीं, ये दो अलग सवाल हैं।
Ea या उससे अधिक ऊर्जा वाली टक्करों का अंश ∝ e^(−Ea/RT)बोल्ट्ज़मान गुणक। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹; Ea जूल में; T केल्विन में।
k = A · e^(−Ea/RT)आरेनियस समीकरण: A आवृत्ति गुणक है, जिसमें टक्करों की संख्या और अभिविन्यास का असर है।
ऊर्जा का ग्राफ़: ज़रा-सा खिसकने पर इतना फ़र्क क्यों
सभी कणों की ऊर्जा बराबर नहीं होती। किसी भी नमूने में ज़्यादातर कण औसत के आसपास होते हैं, कुछ धीमे, और गिनती के कुछ बहुत तेज़। सिमुलेशन के ऊपर वाले ग्राफ़ में टक्करों की ऊर्जा का फैलाव खींचा गया है, और दाईं ओर की पतली पूँछ ज़्यादा ऊर्जा वाली टक्करों का छोटा समूह है।
सक्रियण ऊर्जा के दाईं ओर वक्र के नीचे का क्षेत्रफल ही अभिक्रिया करा सकने वाली टक्करों का अंश है। बॉक्स में यह ठीक e^(−Ea/RT) है, और वक्र के पीछे के धूसर स्तंभ वे टक्करें हैं जो बॉक्स ने खुद गिनी हैं, इसलिए सिद्धांत और प्रयोग आप साथ-साथ मिलाकर देख सकते हैं। शुरुआती स्थिति (300 K, उत्प्रेरक के बिना) में अंश 3.0% है।
रेखा ज़रा-सी खिसके या पूँछ थोड़ी लंबी हो, तो क्षेत्रफल बहुत बदल जाता है, क्योंकि पूँछ बहुत तीखी गिरती है। इस पन्ने की बाकी हर चीज़ का राज़ यही है: दर को पूँछ नियंत्रित करती है, भीड़ का बीच वाला हिस्सा नहीं।
| तापमान | Ea से ऊपर का अंश, उत्प्रेरक के बिना | Ea से ऊपर का अंश, उत्प्रेरक के साथ |
|---|---|---|
| 200 K | 0.5% | 5.0% |
| 300 K | 3.0% | 13.5% |
| 400 K | 7.2% | 22.3% |
| 500 K | 12.2% | 30.1% |
| 600 K | 17.4% | 36.8% |
कारक 1: तापमान
तापमान का स्लाइडर बढ़ाते ही दो बातें होती हैं। कण तेज़ चलते हैं, इसलिए ज़्यादा बार टकराते हैं। और उससे कहीं बड़ी बात: टक्करों का एक बड़ा हिस्सा अब पहाड़ पार करने लायक ऊर्जा पा लेता है। असली कारण दूसरा है।
टक्करें बढ़ती हैं, पर बस थोड़ी
टक्कर की बारंबारता कणों की औसत चाल के साथ बढ़ती है, और औसत चाल तापमान के वर्गमूल के साथ बढ़ती है। 300 K से 600 K का मतलब तापमान दुगुना, पर टक्करों की बारंबारता केवल 1.41 गुना बढ़ती है। बस इतना ही होता तो गर्म करने से कुछ खास न बदलता।
सफल टक्करें बहुत ज़्यादा बढ़ती हैं
उसी छलाँग में 300 K से 600 K तक जाने पर Ea से ऊपर का अंश 3.0% से 17.4% हो जाता है, यानी 5.8 गुना। दोनों असर गुणा करें तो प्रति सेकंड सफल टक्करें लगभग 8.1 गुना। इसीलिए गर्म करने पर अभिक्रिया इतनी ज़ोर से तेज़ होती है।
हर 10 °C पर दर का मोटा नियम
कमरे के तापमान के आसपास कई अभिक्रियाओं की दर हर 10 °C बढ़ने पर लगभग दुगुनी (कुछ में तिगुनी) हो जाती है। यह मोटा अंगूठा-नियम है, कोई सूत्र नहीं: यह सक्रियण ऊर्जा और तापमान-सीमा पर निर्भर करता है, और अधिक Ea वाली अभिक्रिया कम Ea वाली से ज़्यादा संवेदनशील होती है। अनुमान के लिए, और जहाँ प्रश्न में नियम दिया हो वहाँ, इसे लगाइए; असली संख्या चाहिए तो आरेनियस समीकरण।
कारक 2: सांद्रता (गैसों में दाब)
उसी जगह में अधिक कण मतलब प्रति सेकंड अधिक मुलाकातें। A कण दुगुने कर दें तो हर B कण को A से टकराने के दुगुने मौके मिलते हैं। B भी दुगुना कर दें तो टकराने वाले B भी दुगुने। A–B मुलाकातों की संख्या इसलिए दोनों संख्याओं के गुणनफल के साथ बढ़ती है।
सिमुलेशन में शुरू में बॉक्स में हर एक के 25 कण हैं, यानी कुल 625 संभावित A–B जोड़े। स्लाइडर 40 पर ले जाएँ तो जोड़े 1,600 हो जाते हैं, यानी 2.56 गुना, और प्रति सेकंड टक्करें भी लगभग उतनी ही बढ़ती हैं। Ea से ऊपर का अंश नहीं बदलता, क्योंकि तापमान और Ea नहीं बदले।
गैसों में दाब बढ़ाने पर उतने ही कण कम जगह में ठूँसे जाते हैं, जो सांद्रता बढ़ाने के बराबर है। शुद्ध ठोस या द्रव की सांद्रता नहीं बदलती (घनत्व स्थिर), इसीलिए अगले हिस्से में सिर्फ़ सतह मायने रखती है।
दर = k [A]ᵐ [B]ⁿदर नियम। m और n प्रयोग से मिलते हैं, संतुलित समीकरण के गुणांकों से नहीं।
एक-चरण A + B → C: दर = k [A][B]केवल एक संघट्ट-चरण हो, जैसे इस सिमुलेशन में, तभी कोटि गुणांकों के बराबर होती है।
कारक 3: ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल
ठोस और द्रव या गैस के बीच अभिक्रिया वहीं होती है जहाँ वे छूते हैं, यानी सतह पर। ठंडी चाय में चीनी का क्यूब धीरे घुलता है, पर उसी वज़न की बारीक चीनी कुछ सेकंड में गायब। चूर्ण बनाने से चीनी नहीं बदलती, चाय के सामने उसका ज़्यादा हिस्सा खुल जाता है।
संघट्ट की भाषा में: बड़ी सतह मतलब दूसरे कणों के ठोस से टकराने की ज़्यादा जगह। सफल टक्करों का अंश वही रहता है, प्रति सेकंड टक्करें बढ़ती हैं, ठीक सांद्रता बढ़ाने की तरह। यह बॉक्स मिश्रित गैस या विलयन है, उसमें ठोस नहीं है, इसलिए पृष्ठीय क्षेत्रफल का अलग स्लाइडर नहीं है। असर वैसे ही काम करता है जैसे बॉक्स में और कण डालना।
बारीक चूर्ण इसी वजह से खतरनाक भी हो सकता है। आटा मिल में आटे की धूल, खदान में कोयले का चूरा, लकड़ी के कारखाने में बुरादा, सबकी सतह बहुत बड़ी होती है, और एक चिंगारी पूरे बादल को धमाके में बदल सकती है, जबकि वही चीज़ ढेर में केवल सुलगती।
कारक 4: उत्प्रेरक
उत्प्रेरक खुद खर्च हुए बिना अभिक्रिया तेज़ करता है। वह ऐसा रास्ता देता है जिसकी सक्रियण ऊर्जा कम है। सिमुलेशन में उत्प्रेरक के बॉक्स में टिक करें तो बिंदीदार रेखा 3.5 RT से 2.0 RT पर आ जाती है। 300 K पर रेखा के दाईं ओर का हरा अंश 3.0% से 13.5% हो जाता है, यानी सफल टक्करें लगभग 4.5 गुना, तापमान या सांद्रता बदले बिना।
असल ज़िंदगी में असर बहुत बड़ा हो सकता है, क्योंकि बोल्ट्ज़मान गुणक बेहद संवेदनशील है। 300 K पर Ea को 25 kJ mol⁻¹ घटाने से दर लगभग 2.25 × 10⁴ गुना बढ़ती है; नीचे के हल किए गए प्रश्नों में आप खुद गणना करेंगे। स्कूल में मिलने वाले उत्प्रेरक: हाइड्रोजन परॉक्साइड के लिए मैंगनीज़ डाइऑक्साइड, हेबर प्रक्रम में लोहा, सल्फ़्यूरिक अम्ल के लिए वैनेडियम पेंटाऑक्साइड, और हमारे शरीर के एंज़ाइम।
- उत्प्रेरक अग्र और पश्च दोनों अभिक्रियाओं की Ea घटाता है, इसलिए दोनों को बराबर तेज़ करता है।
- ΔH नहीं बदलता। अभिकारक और उत्पाद उसी ऊर्जा पर रहते हैं; बीच का पहाड़ ही नीचा होता है।
- साम्यावस्था की स्थिति या साम्य स्थिरांक नहीं बदलता। वह बस पहले पहुँचाने में मदद करता है।
- कुल मिलाकर खर्च नहीं होता। बीच के चरण में भाग ले सकता है, पर अंत में वापस मिल जाता है।
- हर अभिक्रिया के लिए नहीं होता। एक अभिक्रिया का उत्प्रेरक दूसरी में कुछ भी न करे, ऐसा हो सकता है।
दर को प्रभावित करने वाली और बातें
प्रकाश कुछ अभिक्रियाएँ शुरू करता या तेज़ करता है। फ़ोटोग्राफ़ी की फ़िल्म और धूप में हाइड्रोजन-क्लोरीन की अभिक्रिया, दोनों में प्रकाश के फ़ोटॉन बंध तोड़ने की ऊर्जा देते हैं; यह काम टक्कर नहीं करती।
अभिकारकों की प्रकृति भी बहुत कुछ तय करती है। सोडियम पानी से उग्रता से अभिक्रिया करता है, लोहा लगभग नहीं करता। विलयन में आयनों की अभिक्रिया, जैसे सिल्वर आयन और क्लोराइड आयन का मिलना, बहुत तेज़ होती है क्योंकि कोई बंध तोड़ना नहीं पड़ता; जबकि मज़बूत सहसंयोजी बंध तोड़ने हों तो अभिक्रिया धीमी होती है।
अवस्था और हिलाना-डुलाना भी मायने रखता है। गैस या हिलाए गए द्रव में कण ठोस में फँसे कणों से ज़्यादा मिलते हैं। अच्छी तरह हिलाए गए बीकर में अभिक्रिया पहले खत्म होती है, क्योंकि हिलाना सतह पर लगातार नया अभिकारक पहुँचाता रहता है।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें
कॉपी-पेन ले लीजिए। कुछ दबाने से पहले अनुमान लिखिए, फिर चलाकर मिलाइए।
- सब कुछ शुरुआती मानों पर रखकर दस सेकंड बाद सफल टक्करों की दर और Ea से ऊपर का अंश, दोनों लिख लीजिए। फिर फिर से शुरू दबाइए।
- तापमान 600 K कीजिए और प्रति सेकंड कुल टक्करों की तुलना सफल टक्करों से कीजिए। कौन ज़्यादा बदला? इससे दिखता है कि ऊष्मा मुख्य रूप से ऊर्जा-वक्र की पूँछ के रास्ते काम करती है।
- तापमान 200 K कीजिए। उत्पाद का वक्र बहुत सपाट मिलेगा; कुछ होता दिखे इसके लिए 2× गति का बटन दबाइए।
- किसी प्रयोग के बीच में उत्प्रेरक के बॉक्स में टिक कीजिए। तापमान वही रहते हुए उसी पल उत्पाद का वक्र ऊपर की ओर मुड़ेगा।
- सांद्रता 40 पर लीजिए, फिर 10 पर। पिछले प्रयोग की धूसर बिंदीदार रेखा से देखिए कि बड़ा बॉक्स कितना पहले खत्म होता है।
- कुछ सेकंड तक सिद्धांत वाला अंश और गिना हुआ अंश मिलाकर देखिए। मोटे तौर पर मिलेंगे। थोड़ा फ़र्क हो तो कुल टक्करें गिन लीजिए, क्योंकि छोटे नमूने में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।
हल किए गए प्रश्न
हर प्रश्न की संख्याएँ शुरू में दिए गए मानों से गणना करके निकाली गई हैं। चरणों को समझिए, फिर मान बदलकर खुद आज़माइए।
प्रश्न 1: सांद्रता के परिवर्तन से औसत दर
एक अभिकारक की सांद्रता 30 सेकंड में 0.80 mol L⁻¹ से घटकर 0.50 mol L⁻¹ हो गई। औसत अभिक्रिया दर क्या है?
सांद्रता का परिवर्तन = 0.50 − 0.80 = −0.30 mol L⁻¹, यानी 0.30 की कमी। दर = यह परिवर्तन ÷ समय।
दर = 0.30 / 30 = 0.010 mol L⁻¹ s⁻¹
मिनट में: 0.010 × 60 = 0.60 mol L⁻¹ min⁻¹
प्रश्न 2: हर 10 °C का मोटा नियम
एक अभिक्रिया 25 °C पर 40 मिनट लेती है। हर 10 °C पर दर दुगुनी मानते हुए 55 °C पर समय का अनुमान लगाइए।
तापमान में वृद्धि 55 − 25 = 30 °C, इसलिए दर 3 बार दुगुनी होती है। गति-वृद्धि 2 की 3 घात है।
गति-वृद्धि = 2^3 = 8
समय = 40 / 8 = 5 मिनट
प्रश्न 3: 300 K और 310 K पर आरेनियस अंश
एक अभिक्रिया की Ea = 50 kJ mol⁻¹ है। 300 K और 310 K पर इतनी या अधिक ऊर्जा वाली टक्करों का अंश और उनका अनुपात निकालिए। R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹।
Ea को जूल में लीजिए: 50 kJ = 50,000 J। फिर हर तापमान पर Ea/RT निकालिए।
300 K पर Ea/RT = 50,000 / (8.314 × 300) = 20.05
310 K पर Ea/RT = 50,000 / (8.314 × 310) = 19.40
300 K पर अंश = e^(−20.05) = 1.97 × 10⁻⁹
310 K पर अंश = e^(−19.40) = 3.76 × 10⁻⁹
अनुपात = 3.76 × 10⁻⁹ / 1.97 × 10⁻⁹ ≈ 1.91
प्रश्न 4: उत्प्रेरक कितनी मदद करता है
एक उत्प्रेरक Ea को 75 kJ mol⁻¹ से घटाकर 50 kJ mol⁻¹ कर देता है। आवृत्ति गुणक A वही मानकर 300 K पर दर कितने गुना बढ़ेगी?
दोनों दरों में अंतर केवल घातांक में है, इसलिए अनुपात e की वह घात है जो Ea की कमी को RT से भाग देकर मिलती है।
Ea की कमी = 75 − 50 = 25 kJ mol⁻¹
अनुपात = e^(25,000 / (8.314 × 300)) = e^10.02 ≈ 2.25 × 10⁴
प्रश्न 5: दो सांद्रताएँ साथ बदलें तो
एक-चरण अभिक्रिया A + B → उत्पाद की दर = k[A][B] है। उसी तापमान पर [A] को 0.10 से 0.30 mol L⁻¹ और [B] को 0.10 से 0.20 mol L⁻¹ किया गया। दर कितनी गुना होगी?
A का गुणक = 0.30 / 0.10 = 3
B का गुणक = 0.20 / 0.10 = 2
दर का गुणक = 3 × 2 = 6तापमान वही है, इसलिए k नहीं बदला।
प्रश्न 6: कटे हुए घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल
2 cm भुजा के एक ठोस घन को 0.1 cm भुजा के छोटे घनों में काटा गया। पहले और बाद का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल तुलना कीजिए।
घन के छह फलक होते हैं, इसलिए पृष्ठीय क्षेत्रफल 6 × भुजा का वर्ग। छोटे घनों की संख्या आयतनों का अनुपात है, (2 / 0.1) का घन।
पहले: 6 × 2² = 24 cm²
छोटे घन: (2 / 0.1)³ = 8,000
बाद में: 8,000 × 6 × 0.1² = 480 cm²
अनुपात = 480 / 24 = 20द्रव्यमान वही, अभिक्रिया की जगह लगभग इतने गुना ज़्यादा।
प्रश्न 7: आरेनियस ग्राफ़ से Ea निकालना
आरेनियस समीकरण का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर ln k = ln A − Ea/(RT) मिलता है। ln k बनाम 1/T का ग्राफ़ सरल रेखा है, जिसका ढाल −Ea/R है। प्रयोगशाला में ढाल −6,000 K मिला। Ea क्या है?
Ea = −ढाल × R = 6,000 × 8.314
Ea = 49.9 kJ mol⁻¹R को J mol⁻¹ K⁻¹ में गुणा करके 1000 से भाग देने पर kJ मिलता है।
आम गलतियाँ
ये गलतियाँ हर साल उत्तर-पुस्तिकाओं में अंक कटवाती हैं।
- "उत्प्रेरक ΔH बदलता है।" नहीं। वह पहाड़ नीचा करता है, शुरू या अंत की ऊर्जा नहीं बदलता।
- "उत्प्रेरक साम्यावस्था खिसका देता है।" नहीं। वह अग्र और पश्च अभिक्रिया को बराबर तेज़ करता है, इसलिए साम्यावस्था वहीं रहती है जहाँ थी।
- "उत्प्रेरक खर्च हो जाता है।" नहीं। वह वापस मिल जाता है; अंत में अपरिवर्तित बरामद किया जा सकता है।
- "गर्म करने से कण ज़्यादा टकराते हैं, इसलिए दर बढ़ती है।" इससे थोड़ी मदद मिलती है, पर मुख्य कारण है Ea से अधिक ऊर्जा वाली टक्करों का बढ़ा हुआ अंश।
- "हर टक्कर अभिक्रिया है।" ज़्यादातर नहीं। ऊर्जा या अभिविन्यास की कमी से वे उछलकर अलग हो जाती हैं।
- "कोटि का मतलब गुणांक।" कोटि प्रयोग से मिलती है। केवल एक-चरण अभिक्रिया में कोटि और गुणांक बराबर होते हैं।
- "पूरी अभिक्रिया में दर एक-सी रहती है।" नहीं। अभिकारक खर्च होने के साथ दर घटती है, इसीलिए उत्पाद का वक्र चपटा होता है।
असल ज़िंदगी में कहाँ दिखता है
खाना सुरक्षित रखना रसोई में संघट्ट सिद्धांत है। लगभग 4 °C का फ़्रिज जीवाणुओं और सड़न की अभिक्रियाओं को धीमा करता है, डीप फ़्रीज़र लगभग रोक देता है। प्रेशर कुकर उलटा काम करता है: ज़्यादा दाब पर पानी का क्वथनांक बढ़ता है, और ज़्यादा गर्म पानी में खाना बहुत कम समय में पक जाता है।
उद्योग में उपज जितनी ज़रूरी है, रफ़्तार भी उतनी ही। हेबर प्रक्रम में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन से अमोनिया लोहे के उत्प्रेरक पर बनती है, क्योंकि उत्प्रेरक के बिना किसी भी काम लायक तापमान पर अभिक्रिया इतनी धीमी है कि फ़ायदा नहीं। गाड़ियों के कैटालिटिक कन्वर्टर में प्लैटिनम, पैलेडियम और रोडियम कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड को कुछ ही सेकंड में हानिरहित गैसों में बदल देते हैं।
आपका शरीर उत्प्रेरकों पर चलता है। लार का एमाइलेज़ एंज़ाइम चावल चबाने के एक मिनट में स्टार्च को शर्करा में तोड़ देता है, जिसमें एंज़ाइम के बिना परखनली में कई दिन लगते। हर एंज़ाइम सिर्फ़ अपनी अभिक्रिया पर काम करता है और संकरी तापमान-सीमा में सबसे अच्छा चलता है, इसीलिए बहुत तेज़ बुखार खतरनाक है।
सुरक्षा भी दर पर निर्भर है। आटा मिलों में धूल हटाई जाती है, खदानों में कोयले का चूरा काबू में रखा जाता है, दवा की दुकानों में कुछ दवाएँ ठंडे में रखी जाती हैं, सब इसलिए कि पृष्ठीय क्षेत्रफल और तापमान एक हानिरहित चीज़ को उम्मीद से कहीं तेज़ अभिक्रिया करा सकते हैं।
परीक्षा की तैयारी
कक्षा 12 की रसायन विज्ञान में यह पाठ रासायनिक बलगतिकी के रूप में आता है, और CBSE/NCERT के अनुसार प्रश्न तीन तरह के बनते हैं: परिभाषा या व्याख्या, ग्राफ़ की व्याख्या, और छोटी गणना। नीचे की सूची से तैयारी कीजिए; पाठ्यक्रम की सटीक सीमा अपने बोर्ड की नवीनतम किताब और पाठ्यक्रम से मिला लीजिए।
- अभिक्रिया की दर की परिभाषा इकाई के साथ लिखिए, और अभिकारक व उत्पाद के लिए कौन-सा चिह्न लिया, यह बताइए।
- तापमान का असर समझाइए: टक्करें अधिक होती हैं और Ea के बराबर या अधिक ऊर्जा वाली टक्करों का अंश बढ़ता है। दूसरे कारण को अधिक भार दीजिए।
- उत्प्रेरक कैसे काम करता है, एक वाक्य में लिखिए: कम सक्रियण ऊर्जा का वैकल्पिक रास्ता देता है, इसलिए अधिक टक्करें प्रभावी होती हैं।
- Ea अंकित और उसके दाईं ओर छायांकित क्षेत्र वाला बोल्ट्ज़मान वितरण बनाइए। उसी Ea रेखा के साथ ऊँचे तापमान के लिए फिर बनाइए (शिखर नीचा, पूँछ लंबी)।
- सांद्रता और समय की तालिका से औसत दर निकालिए। इकाई मत भूलिए।
- आरेनियस समीकरण में R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ लीजिए और Ea को जूल में बदलिए।
तेज़ दोहराव
परीक्षा से पहली रात पाँच मिनट में इतना पढ़ लीजिए, कोई पंक्ति कमज़ोर लगे तो सिमुलेशन में लौट आइए।
- दर = प्रति इकाई समय सांद्रता में परिवर्तन, इकाई mol L⁻¹ s⁻¹।
- संघट्ट सिद्धांत: अभिक्रिया के लिए कम से कम Ea ऊर्जा और सही अभिविन्यास वाली टक्कर चाहिए।
- Ea या उससे अधिक ऊर्जा वाला अंश e^(−Ea/RT) के समानुपाती है।
- तापमान: टक्करें थोड़ी बढ़ती हैं, Ea से ऊपर का अंश बहुत बढ़ता है। मोटा नियम हर 10 °C पर दुगुनी।
- सांद्रता, दाब और पृष्ठीय क्षेत्रफल प्रति सेकंड टक्करों की संख्या बढ़ाते हैं।
- उत्प्रेरक Ea घटाता है, अग्र और पश्च अभिक्रिया को बराबर तेज़ करता है, खर्च नहीं होता। ΔH या साम्यावस्था नहीं बदलता।
- अभिकारक खर्च होने के साथ अभिक्रिया की दर घटती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रासायनिक अभिक्रिया की दर क्या होती है?
अभिक्रिया की दर यह है कि अभिकारक कितनी तेज़ी से खर्च हो रहे हैं या उत्पाद कितनी तेज़ी से बन रहे हैं, जिसे प्रति इकाई समय सांद्रता के परिवर्तन से नापा जाता है, आमतौर पर mol L⁻¹ s⁻¹ में। तेज़ अभिक्रिया में सांद्रता जल्दी बदलती है; धीमी में नापने लायक बदलाव आने में मिनट, घंटे या साल लगते हैं।
संघट्ट सिद्धांत सरल शब्दों में क्या कहता है?
संघट्ट सिद्धांत कहता है कि अभिक्रिया के लिए कणों को टकराना पड़ता है, पर उत्पाद केवल वही टक्करें बनाती हैं जिनमें कम से कम सक्रियण ऊर्जा हो और अभिविन्यास सही हो। ज़्यादातर टक्करें असफल होकर उछल जाती हैं। जो कारक दर बढ़ाता है, वह या तो टक्करें बढ़ाता है या अधिक टक्करों को सफल बनाता है।
तापमान बढ़ाने पर अभिक्रिया की दर क्यों बढ़ती है?
गर्म करने पर कण तेज़ चलते हैं, इसलिए थोड़ी ज़्यादा टक्करें होती हैं, और ज़्यादा अहम यह कि टक्करों का काफ़ी बड़ा हिस्सा सक्रियण ऊर्जा के बराबर या अधिक ऊर्जा पा लेता है। सिमुलेशन में 300 K से 600 K पर टक्करें 1.41 गुना बढ़ती हैं, पर सफल टक्करें लगभग 8.1 गुना।
उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा पर क्या असर डालता है?
उत्प्रेरक कम सक्रियण ऊर्जा वाला एक वैकल्पिक रास्ता देता है। तब अधिक टक्करें पहाड़ पार कर पाती हैं और अभिक्रिया तेज़ होती है। उत्प्रेरक अंत में वापस मिल जाता है, इसलिए खर्च नहीं होता, और वह ΔH या साम्यावस्था नहीं बदलता।
क्या उत्प्रेरक साम्यावस्था बदलता है?
नहीं। उत्प्रेरक अग्र और पश्च अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा बराबर मात्रा में घटाता है, इसलिए दोनों बराबर तेज़ होती हैं। निकाय साम्यावस्था पर पहले पहुँचता है, पर उसी संघटन और उसी साम्य स्थिरांक के साथ।
क्या तापमान दुगुना करने पर दर भी दुगुनी हो जाती है?
ठीक ऐसा नहीं। दर तापमान पर e^(−Ea/RT) के ज़रिए निर्भर है, इसलिए नतीजा Ea पर टिका है। मोटा नियम कहता है कि कई अभिक्रियाओं की दर हर 10 °C बढ़ने पर लगभग दुगुनी होती है, जो केल्विन मान दुगुना करने से बहुत छोटा बदलाव है।
चूर्ण टुकड़े से तेज़ अभिक्रिया क्यों करता है?
अभिक्रिया ठोस की सतह पर ही होती है। टुकड़े को चूर्ण बनाने से दूसरे अभिकारक के टकराने के लिए कहीं ज़्यादा सतह खुल जाती है। हल किए प्रश्न में 2 cm भुजा के घन को 0.1 cm के घनों में काटने पर पृष्ठीय क्षेत्रफल 20 गुना हो जाता है।
क्या पूरी अभिक्रिया में दर एक-सी रहती है?
नहीं। शुरू में अभिकारक भरपूर होने से दर सबसे अधिक होती है, फिर उनके खर्च होने के साथ घटती जाती है। सांद्रता-समय वक्र चपटा होता जाता है, और किसी क्षण की तात्क्षणिक दर उस बिंदु का ढाल है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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कक्षा 11 · 12
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प्रकार्यात्मक समूह क्या है, ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन को कैसे पहचानें? आठ परिवारों की संरचना, IUPAC नाम, परीक्षण और हल किए गए सवाल देखो।
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कक्षा 12
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कक्षा 11 · 12
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