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इलेक्ट्रॉन असल में कहाँ रहता है? कक्षकों के आकार खुद घुमाकर देखें

कक्षक नाभिक के चारों ओर का वह त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक होती है, सामान्यतः लगभग 90%। यह बोर की कक्षा जैसा निश्चित पथ नहीं है। s गोलाकार, p डंबल जैसा और d चार पंखुड़ियों वाले फूल जैसा होता है। हर कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।

तरंग फलन का धनात्मक (+) भागतरंग फलन का ऋणात्मक (−) भागनोड: जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य हैअक्ष

p कक्षक डंबल जैसा है: दो पालियाँ, एक धनात्मक और एक ऋणात्मक, बीच में नाभिक से गुज़रता नोडल तल। तीनों p आपस में 90° पर हैं।

गति

नियंत्रण

कौन-सा कक्षक

2,200
1.3 ×

मापन

मुख्य क्वांटम संख्या, n
2
दिगंशी क्वांटम संख्या, l
1
उपकोश
2p
चुंबकीय क्वांटम संख्या, mₗ के मान
−1, 0, +1
त्रिज्य नोड (n − l − 1)
0
कोणीय नोड (l)
1
कुल नोड (n − 1)
1
उपकोश में कक्षक (2l + 1)
3
उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन
6
नाभिक से औसत दूरी
5.0a₀
वही दूरी पिकोमीटर में
265pm

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. सिमुलेशन खुलते ही 2pz कक्षक धीरे-धीरे घूमता दिखता है। हर बिंदु इलेक्ट्रॉन की एक काल्पनिक तस्वीर है, और हज़ारों तस्वीरें मिलकर डंबल का आकार बनाती हैं। थीम के रंग के बिंदु धनात्मक पाली और नारंगी बिंदु ऋणात्मक पाली दिखाते हैं।
  2. “कौन-सा कक्षक” बटनों से 1s, 2s, 2p या 3d चुनें। दाईं ओर के मापन पैनल में n, l, mₗ के मान, नोडों की संख्या, उपकोश में कक्षक और इलेक्ट्रॉन की संख्या तथा नाभिक से औसत दूरी बदलती दिखेगी।
  3. कैनवास पर माउस या उँगली खींचकर खुद घुमाएँ, या फ़ोकस करके तीर वाली कुंजियाँ दबाएँ। “रोकें” दबाने पर घूमना रुकता है, तब आकार आराम से देखें। ज़ूम और बिंदु स्लाइडर से बादल को पास लाएँ या घना करें।
  4. “नोड दिखाएँ” पर टिक लगाएँ। लाल सतहें उन जगहों को दिखाती हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता ठीक शून्य है: 2s में गोला, 2p में एक तल, 3d में दो तल (dz² में दो शंकु)। हर एक को पैनल की नोड संख्या से मिलाएँ।

इलेक्ट्रॉन को पकड़ा नहीं जा सकता, सिर्फ़ ढूँढा जा सकता है

सोचिए अँधेरे कमरे में एक मच्छर उड़ रहा है। आप हर सेकंड एक बार फ़्लैश चलाकर फ़ोटो खींचते हैं। हज़ार फ़ोटो एक के ऊपर एक रख दें तो क्या दिखेगा? मच्छर का कोई एक रास्ता नहीं, बल्कि बिंदुओं का बादल, जो कमरे के कुछ कोनों में घना और कुछ में विरल है। जहाँ बादल घना है, मच्छर वहाँ ज़्यादा समय बिताता है।

परमाणु में इलेक्ट्रॉन के साथ ठीक यही होता है, बस एक अंतर के साथ: इलेक्ट्रॉन की फ़ोटो लेने वाला प्रकाश ही उसे धक्का दे देता है। हाइज़ेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत कहता है कि किसी क्षण इलेक्ट्रॉन की स्थिति और वेग दोनों एक साथ बिल्कुल सही नहीं जाने जा सकते। इसलिए हम पूछते हैं, “यहाँ मिलने की प्रायिकता कितनी है?”, यह नहीं कि “इलेक्ट्रॉन ठीक कहाँ है?”।

प्रायिकता का वही नक्शा कक्षक है। सिमुलेशन का हर बिंदु एक काल्पनिक तस्वीर है, और घने-विरल हिस्से मिलकर कक्षक की शक्ल बनाते हैं। बिंदु गणित से, एक तय शुरुआती बीज से रखे गए हैं, इसलिए चित्र स्थिर रहता है और झिलमिलाता नहीं।

आगे हम शुरू से समझेंगे कि कक्षक और कक्षा अलग क्यों हैं, चार क्वांटम संख्याएँ क्या बताती हैं, नोड कैसे गिनते हैं, और s, p, d के आकार वैसे क्यों हैं। साथ-साथ सिमुलेशन में हर बात जाँचते चलें।

कक्षा और कक्षक: दो अलग विचार

1913 में नील्स बोर ने कहा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षा में घूमता है, जैसे सूर्य के चारों ओर ग्रह। हाइड्रोजन की पहली कक्षा की त्रिज्या 52.9 pm है, जिसे बोर त्रिज्या a₀ कहते हैं। यह चित्र सरल है और हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम को अच्छी तरह समझाता है।

पर यह चित्र टिकता नहीं। एक से अधिक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं में हिसाब नहीं बैठता, और अनिश्चितता सिद्धांत से सीधा टकराव होता है, क्योंकि निश्चित पथ का मतलब है स्थिति और वेग एक साथ ज्ञात होना। 1926 में श्रोडिंगर ने एक समीकरण दिया जिसके हल तरंग फलन ψ (साई) हैं।

ψ को सीधे नापा नहीं जा सकता। पर ψ² प्रायिकता घनत्व है: किसी बिंदु के पास छोटे आयतन में इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता वहाँ के ψ² के समानुपाती होती है। जहाँ ψ² बड़ा है, वहाँ इलेक्ट्रॉन अधिक समय बिताता है। ψ² के घने क्षेत्र का त्रिविमीय रूप ही कक्षक कहलाता है।

विषयकक्षा (बोर)कक्षक (क्वांटम)
प्रकृतिसमतल वृत्ताकार पथत्रिविमीय क्षेत्र
इलेक्ट्रॉन की स्थितिसिद्धांत में निश्चितकेवल प्रायिकता
अनिश्चितता सिद्धांतउल्लंघन करती हैपालन करता है
धारण क्षमताकोश में 2n² इलेक्ट्रॉनएक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन
आकारकेवल वृत्तगोला, डंबल, फूल आदि

कक्षक के ज़रूरी शब्द एक तालिका में

परिभाषा तभी पूरे अंक दिलाती है जब शब्द सटीक हों। ये शब्द बार-बार लौटकर आते हैं।

शब्दअर्थउदाहरण
कक्षकनाभिक के चारों ओर वह क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक है1s, 2px
कोशएक ही मुख्य क्वांटम संख्या n वाले सभी कक्षकn = 1, 2, 3
उपकोशसमान n और l वाले कक्षक, जिनके नाम s, p, d, f हैं3d
तरंग फलन, ψइलेक्ट्रॉन का वर्णन करने वाला गणितीय फलनψ₁ₛ
प्रायिकता घनत्व, ψ²किसी बिंदु पर इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता का माप1s में नाभिक के पास सबसे अधिक
नोडवह स्थान जहाँ ψ = 0, यानी इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता शून्य2p कक्षक के बीच का तल
त्रिज्य नोडनाभिक को घेरने वाला गोलाकार नोड2s में एक
कोणीय नोडनाभिक से गुज़रता तल या शंकु जहाँ ψ = 03d में दो
पाली (लोब)कक्षक की एक पंखुड़ी या भागp की दो पालियाँ
समऊर्जी (विकृत) कक्षकबराबर ऊर्जा वाले कक्षकतीनों 2p कक्षक

चार क्वांटम संख्याएँ: इलेक्ट्रॉन का पता

घर के पते की तरह सोचिए: इलाका, गली, मकान नंबर, मंज़िल। परमाणु के हर इलेक्ट्रॉन का भी चार संख्याओं का पता होता है। पहली तीन बताती हैं कि इलेक्ट्रॉन किस कक्षक में है, और चौथी बताती है कि उस कक्षक में वह कैसे घूर्णन कर रहा है।

मुख्य क्वांटम संख्या, n (इलाका)

n = 1, 2, 3, ... पूर्ण संख्याएँ। यह कोश तय करती है, यानी कक्षक का मोटा आकार और ऊर्जा। n जितना बड़ा, कक्षक उतना बड़ा और ऊर्जा उतनी अधिक।

n-वें कोश में कुल n² कक्षक होते हैं, इसलिए चौथे कोश में 16। सिमुलेशन में 1s से 3d पर जाने पर औसत दूरी लगभग 1.5 a₀ से बढ़कर 10.5 a₀ हो जाती है: कक्षक बड़ा होता है।

दिगंशी क्वांटम संख्या, l (गली)

l का मान 0 से n − 1 तक होता है। यह आकार तय करती है: l = 0 पर s (गोला), l = 1 पर p (डंबल), l = 2 पर d (फूल), l = 3 पर f (जटिल)।

इसलिए n = 1 में केवल s, n = 2 में s और p, और n = 3 में s, p, d होते हैं। l का मान कोणीय नोडों की संख्या भी है, जो आगे आएगा।

चुंबकीय क्वांटम संख्या, mₗ (मकान नंबर)

mₗ का मान −l से +l तक, शून्य सहित। कुल (2l + 1) मान, इसलिए उपकोश में उतने ही कक्षक। s के लिए mₗ: 0; p के लिए: −1, 0, +1; d के लिए: −2, −1, 0, +1, +2; f के लिए: −3, −2, −1, 0, +1, +2, +3।

mₗ बताती है कि कक्षक अंतरिक्ष में किस दिशा में है। चुंबकीय क्षेत्र में ये दिशाएँ अलग ऊर्जा पाती हैं, इसी से नाम पड़ा। क्षेत्र न हो तो तीनों p कक्षकों की ऊर्जा समान रहती है।

चक्रण क्वांटम संख्या, mₛ (मंज़िल)

mₛ का मान +½ या −½ होता है: इलेक्ट्रॉन के चक्रण की दो संभव दिशाएँ। इसका कक्षक के आकार से कोई संबंध नहीं।

पाउली का अपवर्जन सिद्धांत कहता है कि एक परमाणु में दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ एक जैसी नहीं हो सकतीं। इसीलिए एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन होते हैं और उनके चक्रण विपरीत होते हैं।

s, p, d: तीन परिवारों के आकार

अब सिमुलेशन के सामने बैठिए। हर आकार के पीछे तर्क है, और वह तर्क l के मान से ही आता है। चित्र रटने से बेहतर है तर्क समझना।

s कक्षक: एकदम गोला

l = 0 का अर्थ है कोई कोणीय नोड नहीं, इसलिए हर दिशा से एक जैसा। 1s में बिंदु केंद्र की ओर घने हैं। एक रोचक बात: घनत्व नाभिक के ठीक पास सबसे अधिक होने पर भी वहाँ का आयतन इतना छोटा है कि इलेक्ट्रॉन सबसे अधिक थोड़ी दूरी पर मिलता है।

हाइड्रोजन के 1s में वह सबसे संभावित दूरी ठीक 1 a₀ यानी 52.9 pm है। इसी कारण बोर की पहली कक्षा की त्रिज्या यही आई थी।

p कक्षक: डंबल और उसका नोडल तल

l = 1 का अर्थ है एक कोणीय नोड, यानी नाभिक से गुज़रता एक तल। तल कक्षक को दो पालियों में बाँटता है, एक धनात्मक और दूसरी ऋणात्मक। तीनों p कक्षक x, y, z अक्षों पर पड़े हैं, आपस में 90° पर।

सिमुलेशन में 2pz चुनकर नोड चालू करें। xy तल दोनों पालियों के बीच से काटता है। 2px या 2py चुनने पर तल बदलता है, पर आकार वही रहता है।

d कक्षक: फूल और एक अपवाद

l = 2 का अर्थ है दो कोणीय नोड और पाँच कक्षक (mₗ = −2, −1, 0, +1, +2)। इनमें से चार चार-पंखुड़ी वाले फूल हैं। 3dxy, 3dxz और 3dyz की पंखुड़ियाँ दो अक्षों के बीच में होती हैं, जबकि 3dx²−y² की पंखुड़ियाँ अक्षों के साथ-साथ होती हैं। इन चारों के नोड दो लंबवत तल हैं।

पाँचवाँ 3dz² अलग है: z अक्ष पर दो बड़ी पालियाँ और xy तल में एक छल्ला। इसके दो नोड तल नहीं, दो शंकु हैं, जिनका अर्धकोण z अक्ष से 54.7° है। यह असल में दो फूल-आकारों का मिश्रण है, इसलिए बाकी से अलग दिखता है।

नोड गिनने का आसान नियम

नोड दो तरह के होते हैं। त्रिज्य नोड नाभिक को घेरता गोला है। कोणीय नोड नाभिक से गुज़रता तल (या शंकु) है। गिनती के नियम छोटे हैं: त्रिज्य नोड = n − l − 1, कोणीय नोड = l, इसलिए कुल नोड = n − 1।

नोड पर प्रायिकता शून्य है, इसलिए इलेक्ट्रॉन वहाँ नहीं मिलता, फिर भी वह एक ओर से दूसरी ओर जा सकता है। यह क्वांटम दुनिया की अजीब बात है, इसलिए नोड को दीवार न समझें।

त्रिज्य नोड = n − l − 1गोलाकार नोडों की संख्या

कोणीय नोड = lतल या शंकु नोडों की संख्या

कुल नोड = n − 1दोनों का योग

उपकोशत्रिज्य नोडकोणीय नोडकुल नोडकक्षकों की संख्याअधिकतम इलेक्ट्रॉन
1s00012
2s10112
3s20212
2p01136
3p11236
3d022510
4d123510

पाली के + और − चिह्न का अर्थ

क्या आपने दो रंग के बिंदु देखे? वह ψ का चिह्न है। तरंग फलन एक तरंग है, इसलिए कहीं धनात्मक और कहीं ऋणात्मक हो सकता है, पानी की लहर के शीर्ष और गर्त की तरह। ऋणात्मक का अर्थ ऋणात्मक आवेश नहीं, तरंग की विपरीत कला है।

प्रायिकता ψ² पर निर्भर है, इसलिए चिह्न से घनत्व नहीं बदलता और दोनों रंग बराबर घने रखे गए हैं। तो फिर चिह्न क्यों मायने रखता है? जब दो परमाणु बंध बनाते हैं, उनके कक्षक एक-दूसरे पर चढ़ते हैं। समान चिह्न की पालियाँ मिलें तो तरंग प्रबल होती है, इलेक्ट्रॉन दोनों नाभिकों के बीच जमा होते हैं और बंध बनता है।

विपरीत चिह्न की पालियाँ मिलें तो तरंग कट जाती है, नाभिकों के बीच नया नोड बनता है, और यह प्रतिबंधी (एंटीबॉन्डिंग) संयोजन है। अणु के आकार और बंध कोणों को समझने की नींव यही चिह्न है। दो pz आमने-सामने मिलें तो σ बंध, और बगल-बगल मिलें तो π बंध बनता है।

कोश और उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन आते हैं

मूल नियम एक ही है: एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन। उपकोश में (2l + 1) कक्षक हैं, इसलिए उसकी क्षमता 2(2l + 1): s में 2, p में 6, d में 10, f में 14। पूरे n-वें कोश की क्षमता 2n²: पहले में 2, दूसरे में 8, तीसरे में 18, चौथे में 32।

भरने का क्रम (n + l) नियम से चलता है: जिसका n + l कम, वह पहले भरता है; बराबर हो तो कम n पहले। 4s के लिए n + l = 4, 3d के लिए 5, इसलिए 4s पहले भरता है। पूरा क्रम: 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p, 5s।

इसी क्रम में इलेक्ट्रॉन डालें तो कुल योग इस तरह बनते हैं: 1s: 2 · 2s: 4 · 2p: 10 · 3s: 12 · 3p: 18 · 4s: 20 · 3d: 30 · 4p: 36 · 5s: 38। यानी 4s भरने तक 20 और 3d पूरा भरने तक 30 इलेक्ट्रॉन लगते हैं, जो जिंक का परमाणु क्रमांक है।

उपकोश की क्षमता = 2(2l + 1)प्रति कक्षक दो इलेक्ट्रॉन

कोश की क्षमता = 2n²n-वें कोश के कुल इलेक्ट्रॉन

कोश में कक्षक = n²सभी उपकोश मिलाकर

सिमुलेशन में खुद करके देखने वाले प्रयोग

हर प्रयोग में एक-दो मिनट लगते हैं। करते-करते नियम अपने आप समझ आ जाएँगे।

  • प्रयोग 1 (आकार): 1s, 2s और 3d चुनकर हर बार औसत दूरी पढ़ें। कोश जितना बड़ा, कक्षक उतना फैला हुआ, यानी इलेक्ट्रॉन औसतन उतना दूर।
  • प्रयोग 2 (नोड गिनना): 2s और 2pz दोनों में नोड चालू करें। दोनों में कुल नोड बराबर (n − 1) हैं, पर एक गोला है और दूसरा तल। देखें कि बिंदुओं का रंग कहाँ बदलता है।
  • प्रयोग 3 (p की तीन दिशाएँ): 2px, 2py, 2pz बारी-बारी चुनकर पालियों की दिशा बदलते देखें। तीनों आकार हूबहू समान हैं, केवल दिशा अलग है, इसलिए ऊर्जा भी बराबर है।
  • प्रयोग 4 (d के फूल): 3dxy और 3dx²−y² की तुलना करें। एक दूसरे को 45° घुमाने पर मिलता है। फिर 3dz² खोलकर उसका छल्ला ढूँढें।
  • प्रयोग 5 (दृष्टिकोण): “रोकें” दबाकर बादल को इस तरह घुमाएँ कि z अक्ष के सीध में देखें। तब pz एक गोल धब्बे जैसा दिखता है, जबकि वह डंबल है। त्रिविमीय आकार को एक ही दिशा से देखकर नहीं परखा जा सकता।
  • प्रयोग 6 (घनत्व): बिंदु घटाकर 500 करें, फिर बढ़ाकर 4000। कम बिंदुओं में आकार धुँधला और अधिक में साफ़ होता है। प्रायिकता-बादल का स्वभाव यही है।

हल किए गए प्रश्न

नीचे हर संख्या ऊपर के नियमों से निकाली गई है। सूत्र समझकर खुद हिसाब करके मिलाएँ।

प्रश्न 1: 3d की क्वांटम संख्याएँ और नोड

3d उपकोश के लिए n = 3 और l = 2। mₗ के मान −2, −1, 0, +1, +2, यानी 5 कक्षक और अधिकतम 5 × 2 = 10 इलेक्ट्रॉन।

त्रिज्य नोड = 3 − 2 − 1 = 0, कोणीय नोड = 2, कुल नोड = 3 − 1 = 2।

प्रश्न 2: चौथे कोश की क्षमता

n = 4 के लिए l का मान 0 से 3 तक, यानी 4 उपकोश: s, p, d, f। कक्षक = 1 + 3 + 5 + 7 = 16, जो n² = 16 से मेल खाता है।

इलेक्ट्रॉन = 2 + 6 + 10 + 14 = 32, जो 2n² = 32 से मेल खाता है।

प्रश्न 3: 3p और 3s के नोडों की तुलना

3p के लिए n = 3, l = 1। त्रिज्य नोड = 3 − 1 − 1 = 1, कोणीय नोड = 1, कुल 2। 3s में त्रिज्य 2, कोणीय 0, कुल भी 2।

ध्यान दें, एक ही कोश में कुल नोड हमेशा बराबर (n − 1) रहते हैं; केवल त्रिज्य और कोणीय का बँटवारा l के साथ बदलता है।

प्रश्न 4: हाइड्रोजन की ऊर्जाएँ और लाल रेखा

हाइड्रोजन में n-वें स्तर की ऊर्जा E = −13.6 / n² eV। अतः n = 1: -13.60 eV, n = 2: -3.40 eV, n = 3: -1.51 eV, n = 4: -0.85 eV।

n = 3 से n = 2 पर गिरने पर 1.89 eV निकलती है। रिडबर्ग सूत्र 1/λ = R(1/2² − 1/3²), R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹ से λ लगभग 656 nm आता है। यह बामर श्रेणी की लाल रेखा (Hα) है।

प्रश्न 5: नाभिक से औसत दूरी

हाइड्रोजन जैसे परमाणु में औसत दूरी ⟨r⟩ = a₀ × (3n² − l(l + 1)) / 2। सीधे मान रखें।

उपकोश⟨r⟩ (a₀)⟨r⟩ (pm)
1s1.579
2s6.0318
2p5.0265
3d10.5556

प्रश्न 6: कौन-से क्वांटम संख्या समूह मान्य हैं

याद रखें: l सदैव n से छोटा और mₗ का मान −l से +l के बीच। पाँचों समूह जाँचें।

समूहनिष्कर्ष
n = 3, l = 2, mₗ = −2मान्य
n = 2, l = 2, mₗ = 0अमान्य: l सदैव n से छोटा होना चाहिए
n = 3, l = 1, mₗ = +2अमान्य: mₗ का मान −l से +l के बाहर नहीं हो सकता
n = 4, l = 3, mₗ = −3मान्य
n = 1, l = 1, mₗ = 0अमान्य: l सदैव n से छोटा होना चाहिए

प्रश्न 7: कौन-सा उपकोश पहले भरता है

3d (n + l = 5) और 4s (n + l = 4) की तुलना करें। 4s का मान कम है, इसलिए वह पहले भरता है। सभी उपकोश सजाने पर क्रम: 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s, 3d, 4p, 5s।

इलेक्ट्रॉन की सबसे संभावित दूरी

औसत दूरी और सबसे संभावित दूरी एक चीज़ नहीं हैं। जिस उपकोश में l = n − 1 हो (जैसे 1s, 2p, 3d), उसमें इलेक्ट्रॉन की सबसे संभावित दूरी n² a₀ होती है। नीचे के मान इसी सूत्र से निकाले गए हैं।

उपकोशसबसे संभावित दूरी (a₀)पिकोमीटर में
1s153
2p4212
3d9476

ये गलतियाँ बहुत लोग करते हैं

परीक्षा में ये चूकें अंक कटवाती हैं। देखिए कहीं आप भी तो नहीं कर रहे।

  • कक्षक को कक्षा कह देना। कक्षा निश्चित पथ है, कक्षक प्रायिकता का क्षेत्र। दोनों शब्द आपस में बदले नहीं जा सकते।
  • यह मान लेना कि p कक्षक में इलेक्ट्रॉन आठ के आकार में दौड़ता है। उसका कोई निश्चित पथ नहीं, वह किसी भी पाली में हो सकता है, बस नोडल तल पर कभी नहीं मिलता।
  • + और − को विद्युत आवेश समझना। ये तरंग फलन के चिह्न हैं; इलेक्ट्रॉन का आवेश सदैव ऋणात्मक ही है।
  • नोड को दीवार समझना। नोड केवल बताता है कि वहाँ प्रायिकता शून्य है; इलेक्ट्रॉन फिर भी एक ओर से दूसरी ओर पहुँच सकता है।
  • l ≥ n लिख देना। l का अधिकतम मान n − 1 है, इसलिए 2d या 1p नाम का कोई उपकोश नहीं होता।
  • mₗ के मान −l से +l तक लिखना भूलकर कक्षकों की गलत संख्या बता देना।
  • 3dz² के छल्ले को गलत समझना। वह d कक्षक का ही हिस्सा है, अलग s कक्षक नहीं, और उसके नोड दो शंकु हैं।
  • 4s और 3d का भरने का क्रम गड़बड़ा देना। 4s पहले भरता है, पर संक्रमण धातु इलेक्ट्रॉन खोते समय पहले 4s वाले ही छोड़ती है।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कक्षक

कक्षक सिर्फ़ किताब की तस्वीर नहीं हैं। आसपास की बहुत-सी चीज़ें इन्हीं से समझ आती हैं।

  • रंगीन यौगिक: कॉपर सल्फेट का नीला रंग इसलिए है कि Cu²⁺ के 3d कक्षकों के इलेक्ट्रॉन प्रकाश सोखकर एक d कक्षक से दूसरे में कूदते हैं। d कक्षक न होते तो यह रंग न होता।
  • आतिशबाज़ी के रंग: गर्मी से इलेक्ट्रॉन ऊँचे कक्षकों में जाते हैं और लौटते समय निश्चित तरंगदैर्ध्य का प्रकाश छोड़ते हैं। सोडियम पीला, स्ट्रॉन्शियम लाल, कॉपर नीला-हरा।
  • अणुओं का आकार: मीथेन के चारों C–H बंध समान हैं, क्योंकि एक s और तीन p मिलकर चार समान sp³ संकर कक्षक बनाते हैं। कक्षकों का आकार जानने से अणु का आकार समझ आता है।
  • चुंबकत्व: लोहे के 3d कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए वह चुंबक की ओर खिंचता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन गिनकर बताया जा सकता है कि पदार्थ अनुचुंबकीय होगा या नहीं।
  • अर्धचालक और LED: सिलिकॉन के s और p कक्षक मिलकर ऊर्जा बैंड बनाते हैं। बैंडों का अंतराल तय करता है कि LED किस रंग का प्रकाश देगी।

परीक्षा कोना: CBSE और NCERT शैली के प्रश्न

कक्षक और क्वांटम संख्याएँ लगभग हर साल एक अंक, दो अंक और लंबे उत्तर के रूप में आते हैं।

एक अंक के प्रश्न

सामान्य प्रश्न: d उपकोश में कितने कक्षक होते हैं? उत्तर: 5, क्योंकि l = 2 पर (2l + 1) = 5। एक और: n = 4 के लिए l का अधिकतम मान क्या है? उत्तर: 3।

दो और तीन अंक के प्रश्न

सामान्य प्रश्न: 3p इलेक्ट्रॉन की चारों क्वांटम संख्याएँ लिखिए और कक्षक में नोडों की संख्या बताइए। उत्तर: n = 3, l = 1, mₗ में से एक −1, 0, +1, mₛ = ±½; त्रिज्य नोड 1, कोणीय नोड 1।

पाँच अंक के प्रश्न

सामान्य प्रश्न: (n + l) नियम से समझाइए कि 4s, 3d से पहले क्यों भरता है। उत्तर: 4s के लिए n + l = 4 और 3d के लिए 5; कम मान का अर्थ कम ऊर्जा, इसलिए 4s पहले भरता है। साथ में अक्षों और चिह्नों सहित s, p, d कक्षकों का नामांकित चित्र बनाएँ।

एक नज़र में दोहराव

परीक्षा से पहली रात बस यह सूची एक बार पढ़ लेना काफ़ी है।

  • कक्षक नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन मिलने का सबसे संभावित त्रिविमीय क्षेत्र है, ψ² का घना भाग।
  • चार क्वांटम संख्याएँ: n (कोश और आकार), l (आकृति), mₗ (दिशा), mₛ (चक्रण)।
  • l का मान 0 से n − 1; mₗ का मान −l से +l; mₛ = ±½।
  • त्रिज्य नोड = n − l − 1, कोणीय नोड = l, कुल नोड = n − 1।
  • s गोला, p डंबल (तीन, 90° पर), d फूल (पाँच, dz² अपवाद)।
  • उपकोश की क्षमता 2(2l + 1); कोश में n² कक्षक और 2n² इलेक्ट्रॉन।
  • पाउली सिद्धांत: एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन, विपरीत चक्रण के साथ।
  • भरने का क्रम (n + l) नियम से: 4s, 3d से पहले।
  • पाली के + और − तरंग की कला हैं, आवेश नहीं; बंध बनने में यही निर्णायक हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा (orbit) और कक्षक (orbital) में क्या अंतर है?

कक्षा बोर के मॉडल में इलेक्ट्रॉन का निश्चित वृत्ताकार पथ है। कक्षक नाभिक के चारों ओर का त्रिविमीय क्षेत्र है जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की प्रायिकता सबसे अधिक होती है। अनिश्चितता सिद्धांत निश्चित पथ को नकारता है, इसलिए आधुनिक रसायन में कक्षक का प्रयोग होता है।

एक कक्षक में कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं?

अधिकतम दो, और उनके चक्रण विपरीत (+½ और −½) होने चाहिए। यह पाउली के अपवर्जन सिद्धांत का परिणाम है: एक परमाणु में दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं।

p कक्षक डंबल जैसा क्यों होता है?

p कक्षक में l = 1 होता है, यानी एक कोणीय नोड। यह नोडल तल नाभिक से गुज़रकर कक्षक को दो पालियों में बाँटता है, एक में तरंग फलन धनात्मक और दूसरी में ऋणात्मक। दोनों मिलकर डंबल जैसा रूप बनाती हैं।

नोड क्या है और उसे कैसे गिनें?

नोड वह स्थान है जहाँ तरंग फलन शून्य होता है, यानी वहाँ इलेक्ट्रॉन नहीं मिलता। त्रिज्य नोड n − l − 1, कोणीय नोड l और कुल नोड n − 1 होते हैं। जैसे 2s में एक त्रिज्य नोड है और कोणीय नोड नहीं।

d उपकोश में कितने कक्षक और कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं?

d के लिए l = 2, इसलिए mₗ के मान −2, −1, 0, +1, +2 हैं: पाँच कक्षक। प्रत्येक में दो इलेक्ट्रॉन, कुल दस। पाँचों कक्षक dxy, dxz, dyz, dx²−y² और dz² हैं।

4s कक्षक 3d से पहले क्यों भरता है?

(n + l) नियम से 4s का मान 4 और 3d का मान 5 है। कम मान पहले भरता है। 4s कक्षक नाभिक के पास तक भी पहुँचता है, जिससे कई परमाणुओं में उसकी ऊर्जा कम हो जाती है।

कक्षक की पालियों पर + और − चिह्न का क्या अर्थ है?

ये तरंग फलन ψ के चिह्न हैं, तरंग की कला जैसे, विद्युत आवेश नहीं। प्रायिकता ψ² पर निर्भर है, इसलिए चिह्न घनत्व नहीं बदलता, पर समान चिह्न की पालियाँ मिलकर बंध और विपरीत चिह्न की पालियाँ कटकर प्रतिबंध बनाती हैं।

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